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खत्म हो गई सरहद की सड़क, पैदल चलना भी दुश्वार
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बांदा। ओवरलोडिंग से जिले की ध्वस्त हुई सड़कों में मंडल मुख्यालय से बमुश्किल पांच किलोमीटर दूर दुरेड़ी-पहरहा मार्ग भी शामिल है। यह मार्ग यूपी-एमपी को जोड़ता है।
इस पार बांदा जिला और उस पार छतरपुर है। मध्य प्रदेश और बांदा जिले की केन नदी की खदानों के ओवरलोड ट्रकों ने सड़क का नामोनिशान मिटा दिया है। यहां छोटे वाहन तो दूर पैदल चलना भी दूभर है। इसी मार्ग पर गांव और महाविद्यालय सहित अन्य विद्यालय हैं।
बांदा जिले के दुरेड़ी और छतरपुर जिले के पहरहा गांव के बीच सड़क दूरी करीब 16 किलोमीटर है। अपनी सीमा तक बांदा पीडब्ल्यूडी ने इसे बनाया था। ग्रामीण सड़क होने से इसकी भार वाहन क्षमता लगभग 7 टन थी, लेकिन खदानें चालू होते ही 25 से 45 टन तक के ओवरलोड ट्रकों की आवाजाही ने चंद दिनों में ही सड़क की धज्जियां उड़ा दीं।
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अब सिर्फ धूल और गिट्टी बची है। बारिश में दलदल और अन्य दिनों में ट्रकों से उड़ती धूल राहगीरों सहित ग्रामीणों और स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए कष्टदाई बनी है। कई बार दुर्घटनाएं भी हुई हैं।
पूरे मार्ग में एक से डेढ़ फीट के गड्ढे हैं। बाइकों और पैदल राहगीर फिसलकर घायल हो रहे हैं। संबंधित स्कूल-कालेजों के प्रबंधक व प्रधानाचार्य और ग्रामीणों ने अनेकों बार ट्रकों पर लगाम लगाने और ध्वस्त सड़क के निर्माण की मांगें कीं पर कोई सुनवाई नहीं हुई। पीडब्ल्यूडी अभियंताओं का कहना है कि सड़क की क्षमता से अधिक वाहनों से सड़क ध्वस्त हुई है।
सड़क निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी को निर्देश
दो सूबों की सीमावर्ती दुरेड़ी-पहरहा सड़क के ध्वस्त होने के मामले में एडीएम एडीएम संतोष बहादुर का कहना है कि ग्रामीणों की शिकायत पर पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता को सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग पर भी रोक लगाई जा रही है।
नवोदय और महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को खतरा
ध्वस्त हो चुकी सड़क जवाहर नवोदय विद्यालय व एकलव्य महाविद्यालय समेत एक दर्जन प्राथमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं का भी रास्ता है। दुपहिया, साइकिल या पैदल आ-जा रहे छात्र-छात्राओं को धूल, कीचड़ के साथ हादसे का भी भय बना रहता है। सड़क से रोजाना लगभग 10 हजार छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों का आवागमन है।
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इस पार बांदा जिला और उस पार छतरपुर है। मध्य प्रदेश और बांदा जिले की केन नदी की खदानों के ओवरलोड ट्रकों ने सड़क का नामोनिशान मिटा दिया है। यहां छोटे वाहन तो दूर पैदल चलना भी दूभर है। इसी मार्ग पर गांव और महाविद्यालय सहित अन्य विद्यालय हैं।
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बांदा जिले के दुरेड़ी और छतरपुर जिले के पहरहा गांव के बीच सड़क दूरी करीब 16 किलोमीटर है। अपनी सीमा तक बांदा पीडब्ल्यूडी ने इसे बनाया था। ग्रामीण सड़क होने से इसकी भार वाहन क्षमता लगभग 7 टन थी, लेकिन खदानें चालू होते ही 25 से 45 टन तक के ओवरलोड ट्रकों की आवाजाही ने चंद दिनों में ही सड़क की धज्जियां उड़ा दीं।
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अब सिर्फ धूल और गिट्टी बची है। बारिश में दलदल और अन्य दिनों में ट्रकों से उड़ती धूल राहगीरों सहित ग्रामीणों और स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए कष्टदाई बनी है। कई बार दुर्घटनाएं भी हुई हैं।
पूरे मार्ग में एक से डेढ़ फीट के गड्ढे हैं। बाइकों और पैदल राहगीर फिसलकर घायल हो रहे हैं। संबंधित स्कूल-कालेजों के प्रबंधक व प्रधानाचार्य और ग्रामीणों ने अनेकों बार ट्रकों पर लगाम लगाने और ध्वस्त सड़क के निर्माण की मांगें कीं पर कोई सुनवाई नहीं हुई। पीडब्ल्यूडी अभियंताओं का कहना है कि सड़क की क्षमता से अधिक वाहनों से सड़क ध्वस्त हुई है।
सड़क निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी को निर्देश
दो सूबों की सीमावर्ती दुरेड़ी-पहरहा सड़क के ध्वस्त होने के मामले में एडीएम एडीएम संतोष बहादुर का कहना है कि ग्रामीणों की शिकायत पर पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता को सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग पर भी रोक लगाई जा रही है।
नवोदय और महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को खतरा
ध्वस्त हो चुकी सड़क जवाहर नवोदय विद्यालय व एकलव्य महाविद्यालय समेत एक दर्जन प्राथमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं का भी रास्ता है। दुपहिया, साइकिल या पैदल आ-जा रहे छात्र-छात्राओं को धूल, कीचड़ के साथ हादसे का भी भय बना रहता है। सड़क से रोजाना लगभग 10 हजार छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों का आवागमन है।