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बुंदेलखंड के क्षेत्रीय शोध संस्थान करें बीज उत्पादन
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Regional research institutes of Bundelkhand should produce seeds
- फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेली किसानों को उन्नत प्रजाति के बीज उपलब्ध कराने की मंशा से कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय दलहनी, तिलहनी और मोटे अनाजों के बीज उत्पादन पर जोर दे रहा है। सभी छह कृषि विज्ञान केंद्रों एवं क्षेत्रीय शोध संस्थानों के माध्यम से बीज उत्पादन किया जाएगा।
कुलपति प्रो. नरेंद्र प्रताप सिंह ने शुक्रवार को कमासिन ब्लॉक में संचालित कृषि विज्ञान केंद्र व हमीरपुर कृषि विज्ञान केंद्र का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के सभी सातों जिलों में स्थापित कृषि विज्ञान केंद्र बीज उत्पादन का कार्य करें। बीज बदलाव से किसान अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
खेती में बीज का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कुरारा केंद्र में दलहनी फसलों के प्रजनक बीज उत्पादन पर जोर दिया। विश्वविद्यालय के निदेशक (प्रसार) प्रो. एनके बाजपेयी ने प्रक्षेत्र के सीमांकन, निर्माणाधीन भवनों और अन्य जानकारियां दीं।
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कृषि विज्ञान केंद्र अध्यक्ष डॉ. श्याम सिंह (बांदा) और मो. मुस्तफा (हमीरपुर) सहित केंद्र वैज्ञानिकों ने विभिन्न इकाइयों एवं संचालित गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया। भ्रमण में डॉ. मंजुल पांडेय, डॉ. मानवेंद्र सिंह, डॉ. प्रज्ञा ओझा व घनश्याम यादव उपस्थित रहे।
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कुलपति प्रो. नरेंद्र प्रताप सिंह ने शुक्रवार को कमासिन ब्लॉक में संचालित कृषि विज्ञान केंद्र व हमीरपुर कृषि विज्ञान केंद्र का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के सभी सातों जिलों में स्थापित कृषि विज्ञान केंद्र बीज उत्पादन का कार्य करें। बीज बदलाव से किसान अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
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खेती में बीज का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कुरारा केंद्र में दलहनी फसलों के प्रजनक बीज उत्पादन पर जोर दिया। विश्वविद्यालय के निदेशक (प्रसार) प्रो. एनके बाजपेयी ने प्रक्षेत्र के सीमांकन, निर्माणाधीन भवनों और अन्य जानकारियां दीं।
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कृषि विज्ञान केंद्र अध्यक्ष डॉ. श्याम सिंह (बांदा) और मो. मुस्तफा (हमीरपुर) सहित केंद्र वैज्ञानिकों ने विभिन्न इकाइयों एवं संचालित गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया। भ्रमण में डॉ. मंजुल पांडेय, डॉ. मानवेंद्र सिंह, डॉ. प्रज्ञा ओझा व घनश्याम यादव उपस्थित रहे।