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कांग्रेस को संजीवनी दे गए राहुल
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Sat, 17 Sep 2016 11:49 PM IST
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राहुल का स्वागत करते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। राहुल गांधी के बुंदेलखंड में तीन दिन कांग्रेस में नई जान फूंक गए। कुछ क्षेत्रों में तो राहुल का आगमन कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हुई। विधानसभा चुनाव में टिकट के दावेदारों में भी जोश आ गया है। बुंदेलखंड में कांग्रेस के चार विधायक हैं। दौरे से कांग्रेसी नेताओं को उम्मीद जागी है कि विधानसभा चुनाव में पार्टी की हैसियत और बढ़ेगी।
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कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बृहस्पतिवार की शाम चित्रकूट जिले की धरती से बुंदेलखंड में दाखिल हुए थे। पहली रात राम वनवास नगरी चित्रकूट में गुजारी। दूसरा दिन शुक्रवार को कुछ समय चित्रकूट और शेष बांदा में बीता। देर शाम महोबा पहुंच गए। रात्रि विश्राम वहीं किया। तीसरे दिन शनिवार को महोबा में भ्रमण और खाट सभा की। तीनों दिन पूरे समय बुंदेलखंड के कांग्रेसी नेता राहुल के साथ रहे। राहुल की हर खाट सभा, नुक्कड़ सभा और रोड शो में उमड़ी भीड़ ने कांग्रेसियों का सीना चौड़ा कर दिया। उन्हें विधानसभा चुनाव में परचम लहराता नजर आने लगा है।
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अब कांग्रेसी नेता और खासकर टिकट के दावेदारों ने टिकट हासिल करने के लिए जोड़तोड़ और कोशिशें तेज कर दी हैं। समर्थक भी उन्हें समझा रहे हैं कि राहुल की यात्रा के बाद बाजी कांग्रेस के पाले मेें आ गई है। राहुल के कार्यक्रमों में भीड़ और समर्थकों की प्रेरणा के बाद कई दावेदार लखनऊ और दिल्ली के लिए कूच कर गए हैं। हालांकि एक कड़वा सच यह भी है कि इससे पहले राहुल गांधी चार बार बुंदेलखंड आ चुके हैं। बांदा में दो बार रात भी बिता चुके हैं और रोड शो कर चुके हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के मौके पर भी वे आए, लेकिन कांग्रेस के वोट ग्राफ में कुछ खास इजाफा नहीं हुआ। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को करारी शिकस्त का मुंह देखना पड़ा। विधानसभा चुनाव में भी जो कांग्रेस प्रत्याशी जीते हैं, वे कांग्रेस के नाम पर कम अपनी खुद की पकड़ और छवि के बूते जीते हैं, वरना और प्रत्याशियों को जमानत बचाने के भी लाले पड़े हैं। अब जबकि यूपी विधानसभा के चुनाव को महज चार या पांच महीने बचे हैं तब राहुल गांधी का बुंदेलखंड की सड़कों पर खाक छानना कांग्रेस के लिए कितना कारगर साबित होगा, यह कहना मुश्किल है।
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दोनों गुट राहुल के सफर में रहे हमसफर
बांदा। राहुल के दौरे से कांग्रेस की गुटबाजी पर भी असर पड़ा है। जिले में कांग्रेस के दोनों विधायकों विवेक सिंह और दलजीत सिंह में पाला खिंचा है तो जिला और शहर कांग्रेस कमेटियों में भी 36 का आंकड़ा है। अक्सर गुटबंदी मीडिया तक भी पहुंचती रहीं, लेकिन राहुल गांधी के दौरे पर गुटबंदी नरम पड़ गई। दोनों गुटों के नेता राहुल के साथ रहे। अपने निर्वाचन क्षेत्र बांदा शहर में पिछले हफ्ते आई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर की यात्रा का कार्यक्रम बांदा शहर में न होने से खफा उनके कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने वाले सदर विधायक विवेक सिंह राहुल के साथ चित्रकूट से ही शामिल हो गए। राहुल गांधी का महोबा तक साथ दिया। विधायक दलजीत सिंह भी पूरे समय राहुल के साथ रहे। काफी अरसे के बाद कांग्रेसियों ने दोनों विधायकों को एक साथ एक ही मंच पर देखा। इसी तरह आए दिन अलग-अलग आयोजन करने वाली जिला और शहर कांग्र्रेस कमेटियों के पदाधिकारी और नेता भी राहुल के मंच और सफर में हमसफर रहे। जिलाध्यक्ष अखिलेश शुक्ल ने राहुल गांधी के कार्यक्रमों में सहयोग और शामिल होने वाले नागरिकों और सहयोगियों का आभार जताया है।
भीड़ से कांग्रेस नेता खुश
बांदा। अतर्रा में खाट सभा और बांदा में शहर कांग्रेस की स्वागत सभा से लेकर राहुल गांधी के रोड शो में उमड़ी भीड़ से कांग्रेस नेता गदगद हैं। राहुल के कार्यक्रमों में शामिल होने वाले किसानों और बांदा शहर के बाशिंदों तथा व्यवस्थाओं में पसीना बहाने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त कर रहे हैं। विधायक विवेक सिंह, विधायक दलजीत सिंह, जिलाध्यक्ष अखिलेश कुमार शुक्ल, प्रांतीय सचिव राजेश दीक्षित, युवा नेता कुतैबा जमां खां, शहर अध्यक्ष राजबहादुर गुप्ता, पूर्व विधायक रामेश्वर प्रसाद व शिरोमणि भाई, राज कुमार गर्ग, सैयद अल्तमश हुसैन, अल्पसंख्यक विभाग चेयरमैन रफत खां गोगा, विधायक के मीडिया प्रभारी केशव पाल, करन सिंह पंकज, रामसेवक जड़िया, मोहम्मद अजीज उर्फ अज्जन, यादवेंद्र द्विवेदी, डॉ. साजिद, अवधेश कपूर, महिला अध्यक्ष सीमा खान, ऋतुराज सिंह, शोएब रिजवी समेत कांग्रेसियों को लंबा काफिला साथ रहा। विधायक दलजीत सिंह ने राहुल गांधी को पत्र सौंपकर आंगनबाड़ी व सहायिकाओं की मांगें कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में शामिल करने का अनुरोध किया।
सेनानी की परपोती को कांग्रेस में आने का आफर
बदौसा। नेशनल हाईवे पर संकरी गली में स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय विश्वेश्वर वाजपेई के घर राहुल गांधी के लंच लेने से सेनानी का पूरा परिवार खुश है। शनिवार को भी खुशियां बरकरार रहीं। अपनी बस से उतर कर लगभग 100 मीटर पैदल चलकर स्वतंत्रता सेनानी के घर पहुंचने के दौरान स्थानीय बाशिंदों ने अपनी समस्याओं व परेशानियों का पुलिंदा राहुल गांधी को सौंप दिया। सेनानी के पुत्र कृष्ण कुमार वाजपेई ने अगुवानी की और महिलाओं ने आरती उतारी। राहुल ने स्वतंत्रता सेनानी की परपोती आकांक्षा वाजपेई से देर तक बातचीत की और उसे राजनीति में आने का आफर दिया। आकांक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्रा है। राहुल से उसने फर्राटेदार अंग्रेजी में बातचीत की। विश्वविद्यालय में सेनानी के आश्रित होने का कोई लाभ न मिलने का शिकवा भी किया। सेनानी के पुत्र विजय कुमार व कृष्ण कुमार, पौत्र राजकुमार और आशीष भी मौजूद रहे।
समर्पित कार्यकर्ता को राहुल ने गले लगाया
बांदा। न कभी टिकट की चाहत, न कोई पद या पैसे की दरकार। अपने को पूरी तरह कांग्रेस के प्रति समर्पित कर चार दशकों से जिला कार्यालय की कमान संभाले शिवबली सिंह की पार्टी के प्रति निष्ठा और कुर्बानी राहुल को तब पता चली, जब वे बांदा छोड़कर महोबा पहुंच गए। राहुल ने शनिवार की सुबह कांग्रेसी नेताओं को भेजकर शिवबली सिंह को महोबा बुलवाया। वहां बिरमा भवन में शाल ओढ़ाकर गले लगा लिया। पीठ थपथपाई और शाबासी दी। कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता ऐसे लोगों से प्रेरणा लें। शिवबली सिंह के बारे में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद राजेश मिश्र और प्रभारी महासचिव प्रदेश कांग्रेस मनोज तिवारी तथा जिलाध्यक्ष अखिलेश कुमार शुक्ल ने राहुल गांधी को जानकारी दी। बताया कि 1976 से वे लगातार कार्यालय की कमान संभाले हैं। हर चुनाव में पूरी जिम्मेदारी संभालते हैं। परास्नातक शिवबली सिंह पूरा समय कांग्रेस को देते चले आ रहे हैं। पूरे वर्ष 365 दिन कार्यालय खोलकर बैठते हैं। तीज त्योहार भी उनका कार्यालय में ही बीतता है।