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संस्कृत की आचार्य व शास्त्री परीक्षा में अंधेरगर्दी
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 02 Jun 2016 12:10 AM IST
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अतर्रा के मन्नूलाल संस्कृत महाविद्यालय में यूं हुई आचार्य और शास्त्री की परीक्षा।
- फोटो : अमर उजाला
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अतर्रा। शास्त्री व आचार्य की परीक्षा में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ीं। परीक्षार्थी कक्षों में जमीन पर एक साथ बैठकर नकल करते रहे। कक्ष निरीक्षक व केंद्र व्यवस्थापक जानबूझ कर अनदेखी करते रहे। मन्नूलाल संस्कृत महाविद्यालय में स्वकेन्द्र प्रणाली के तहत बुधवार को दूसरी पाली में 55 परीक्षार्थियों ने शास्त्री व आचार्य की परीक्षा दी।
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इसमें शास्त्री द्वितीय वर्ष के 43 और आचार्य प्रथम वर्ष के 12 परीक्षार्थी शामिल हुए। शास्त्री और आचार्य की परीक्षा स्नातक श्रेणी में मानी जाती हैं। लेकिन महाविद्यालय परीक्षा में नियमों का जमकर माखौल उड़ा। कक्ष संख्या एक में 16, कक्ष संख्या 2 में 17, मनोविज्ञान कक्ष में 10 और लाइब्रेरी कक्ष में 12 परीक्षार्थी बैठाए गए हैं। परीक्षार्थी टाट-फट्टी में बैठकर परीक्षा अपने तरीके से देते रहे। नकल रोकने के लिए लगाए गए कक्ष निरीक्षक कुर्सियों में आराम फरमाते रहे।
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मीडिया का कैमरा चमका तो हड़कंप मच गया। कुर्सियों पर सो रहे कक्ष निरीक्षक चौंक उठे और नकल छीनने का ढोंग करने लगे। कालेज के एक लिपिक ने पहले मीडिया को अंदर जाने से रोका। लेकिन काफी समझाने-बुझाने पर वह राजी हुआ। परीक्षा में यह स्थिति तब है जब मंगलवार को ही संपूर्णानंद विश्वविद्यालय वाराणसी के उप कुलपति रामकिशोर त्रिपाठी ने निरीक्षण के समय केंद्र व्यवस्थापक को सख्त चेतावनी दी थी। उधर, केंद्र व्यवस्थापक मनमोहन प्रसाद से इस बारे में पूछने पर उन्होने बात टाल दी। उन्होंने कहा कि संस्कृत की परीक्षा में तो ऐसा होता रहता है। शास्त्री और आचार्य की परीक्षा 4 जून तक होनी हैं।
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