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हड़ताल पर भी जारी रखी प्राइवेट डाक्टरों ने सेवाएं
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जिला अस्पताल में डाक्टरों के कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़।
- फोटो : BANDA
बांदा। आयुर्वेदिक चिकित्सकों को केंद्र सरकार द्वारा सर्जरी की अनुमति दिए जाने से खफा निजी चिकित्सक शुक्रवार को यहां देश व्यापी हड़ताल पर रहे। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर प्राइवेट चिकित्सकों ने जनरल ओपीडी सेवाएं ठप रखीं। अलबत्ता गंभीर मरीजों का इलाज करते रहे। ऐसे में हड़ताल का यहां कोई खास असर नहीं रहा।
आईएमए से जुड़े निजी अस्पतालों के चिकित्सकों ने हड़ताल का पूरा समर्थन किया। हालांकि अस्पताल खोलकर इलाज करते रहे। उनकी दलील थी कि जो मरीज आ गए हैं उनको तो देखना ही पड़ेगा। हालांकि हड़ताल की खबर से काफी मरीज अस्पतालों को नहीं आए।
उधर, प्रदेश में एस्मा लागू होने से आईएमए से जुड़े सरकारी डाक्टर हड़ताल से किनारा किए रहे। आईएमए के एक सदस्य का कहना था कि निजी चिकित्सकों को छोड़कर कोई सरकारी डाक्टर हड़ताल पर नहीं हैं। शायद यह एस्मा का डर भी है।
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उधर, प्राइवेट अस्पतालों में हड़ताल की खबर और शहर के दो बड़े डाक्टरों के बाहर होने पर उनके क्लीनिक बंद होने से रोजमर्रा की तुलना में ज्यादा मरीज जिला अस्पताल पहुंचे। डाक्टरों के कक्षों के बाहर और ट्रामा सेंटर में काफी भीड़ रही।
जिला अस्पताल में 833 मरीज ओपीडी में आए। जबकि आम दिनों में इनका आंकड़ा 700 के आसपास रहता है। उधर, आईएमए सचिव डा.नरेंद्र गुप्ता ने बताया कि आयुर्वेदिक चिकित्सकों को सर्जरी की अनुमति दिया जाना उचित नहीं है। औषधीय तकनीक से मरीज का इलाज तो किया जा सकता है, लेकिन सर्जरी मरीज को खतरे में डाल सकती है। जरूरत पडने पर संगठन आगे भी आंदोलन का निर्णय ले सकता है।
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आईएमए से जुड़े निजी अस्पतालों के चिकित्सकों ने हड़ताल का पूरा समर्थन किया। हालांकि अस्पताल खोलकर इलाज करते रहे। उनकी दलील थी कि जो मरीज आ गए हैं उनको तो देखना ही पड़ेगा। हालांकि हड़ताल की खबर से काफी मरीज अस्पतालों को नहीं आए।
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उधर, प्रदेश में एस्मा लागू होने से आईएमए से जुड़े सरकारी डाक्टर हड़ताल से किनारा किए रहे। आईएमए के एक सदस्य का कहना था कि निजी चिकित्सकों को छोड़कर कोई सरकारी डाक्टर हड़ताल पर नहीं हैं। शायद यह एस्मा का डर भी है।
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उधर, प्राइवेट अस्पतालों में हड़ताल की खबर और शहर के दो बड़े डाक्टरों के बाहर होने पर उनके क्लीनिक बंद होने से रोजमर्रा की तुलना में ज्यादा मरीज जिला अस्पताल पहुंचे। डाक्टरों के कक्षों के बाहर और ट्रामा सेंटर में काफी भीड़ रही।
जिला अस्पताल में 833 मरीज ओपीडी में आए। जबकि आम दिनों में इनका आंकड़ा 700 के आसपास रहता है। उधर, आईएमए सचिव डा.नरेंद्र गुप्ता ने बताया कि आयुर्वेदिक चिकित्सकों को सर्जरी की अनुमति दिया जाना उचित नहीं है। औषधीय तकनीक से मरीज का इलाज तो किया जा सकता है, लेकिन सर्जरी मरीज को खतरे में डाल सकती है। जरूरत पडने पर संगठन आगे भी आंदोलन का निर्णय ले सकता है।

डा.नरेंद्र गुप्ता।- फोटो : BANDA