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बिजली के लिए बिलबिलाया बुंदेलखंड
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 01 Jun 2016 11:53 PM IST
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बिजली संकट
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड को 24 घंटे बिजली देने का मुख्यमंत्री का आदेश धरा रह गया है। बिजली उत्पादन में आई जबर्दस्त गिरावट से यहां औपचारिक तौर पर 10 घंटे कटौती की जा रही है। फाल्ट में कटौती अलग होती है। पावर कारपोरेशन अभियंताओं का कहना है कि मुख्यालय (लखनऊ) कंट्रोल रूम से कटौती कराई जा रही है। अगले एक-दो दिनों में स्थिति कुछ सुधर सकती है।
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मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड को 24 घंटे बिजली देने का आदेश दिया था। पावर कारपोरेशन ने उसे 22 घंटे में बदल दिया। कुछ दिन शहरों को 20 से 22 और गांवों को 15 से 18 घंटे बिजली मिलती रही, लेकिन पखवारे भर से पूरे बुंदेलखंड और खासकर चित्रकूटधाम मंडल में बिजली आपूर्ति चरमरा गई है।
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हाल ही में कई बार आई आंधी से टावर, लाइन और ट्रांसफार्मर ध्वस्त होने से शहर और गांवों में चल रहा बिजली का जबर्दस्त संकट बरकरार ही था कि अब कई दिनों से लखनऊ स्थित पावर कारपोरेशन कंट्रोल रूम ने रोजाना 10 घंटे बिजली कटौती कराना शुरू कर दिया। भीषण गर्मी में दिन-रात हो रही कटौती से हाहाकार के हालात हैं। जलापूर्ति भी प्रभावित है।
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चित्रकूटधाम मंडल के मुख्य अभियंता (वितरण) एके सक्सेना ने बताया कि जो भी कटौती हो रही है, वह ऊपर से की जा रही है। यह इमरजेंसी कटौती है। शेड्यूल की नहीं। उन्होंने बताया कि शेड्यूल शहर में 22 और गांवों में 20 घंटा बिजली आपूर्ति का है।
उधर, कटौती की बाबत अधिशासी अभियंता (ट्रांसमिशन) उमेश वर्मा ने बताया कि प्रदेश में बिजली उत्पादन में आई गिरावट से यह इमरजेंसी रोस्टिंग कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों से 10 घंटा कटौती कराई जा रही है। गांवों में भी यही स्थिति है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि एक-दो दिनों में हालात सुधरने की उम्मीद है।