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पौधरोपण मामले की सुनवाई आठ मार्च को
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बांदा। बुंदेलखंड में पिछले एक दशक में पौधरोपण पर खर्च किए गए 300 करोड़ रुपये का हिसाब इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश करने में वन विभाग के पसीने छूट रहे हैं। हाल ही में दाखिल की गई जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने पिछले माह यह ब्योरा तलब किया था। 17 फरवरी को सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता/कौंसिल ने और वक्त मांग लिया है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 8 मार्च निर्धारित की है।
प्रदेश सरकार को कोर्ट में जवाब देना है कि बुंदेलखंड में वनों के विकास और पर्यावरण संतुलन के लिए कौन-कौन सी योजनाएं चलाईं जा रही हैं। बांदा के आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष सागर दीक्षित ने पिछले दिनों हाईकोर्ट में वकील सिद्धार्थ निरंजन, सत्यव्रत त्रिपाठी और धर्मपाल सिंह के जरिए दायर रिट में प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव और पर्यावरण एवं वन विभागाध्यक्ष समेत लखनऊ, झांसी, बांदा, चित्रकूट और महोबा के डीएफओ तथा वन संरक्षक को पक्षकार बनाया था। कहा था कि वर्ष 2011-12 में सीएजी की आडिट रिपोर्ट में बुंदेलखंड में विशेष पौधरोपण अभियान में तकरीबन 40 करोड़ की गड़बड़ी पाई गई थी।
वन अधिकारियों ने इसकी जांच में लीपापोती की है। हाईकोर्ट ने रिट पर प्रदेश सरकार और वन विभाग से 15 फरवरी को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। 15 फरवरी को सुनवाई में प्रदेश के अपर महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट से गुजारिश की कि जवाबी काउंटर दाखिल करने को और वक्त दिया जाए। अभी तैयारी नहीं हो पाई है। इस पर चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायाधीश सौरभ श्याम शमशेरी ने सुनवाई के बाद अगली तारीख 8 मार्च निर्धारित की है।
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इंसेट---
फोटो परिचय-13-
बुंदेलखंड में सरकारी पौधरोपण की पोल खोलती तस्वीर में याचिकाकर्ता/आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष सागर दीक्षित कृषि विवि बांदा में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा तामझाम के बीच किए गए पौधरोपण में मंत्री के हाथों लगाया गया पौधा सूखने पर दिखाते हुए।
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प्रदेश सरकार को कोर्ट में जवाब देना है कि बुंदेलखंड में वनों के विकास और पर्यावरण संतुलन के लिए कौन-कौन सी योजनाएं चलाईं जा रही हैं। बांदा के आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष सागर दीक्षित ने पिछले दिनों हाईकोर्ट में वकील सिद्धार्थ निरंजन, सत्यव्रत त्रिपाठी और धर्मपाल सिंह के जरिए दायर रिट में प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव और पर्यावरण एवं वन विभागाध्यक्ष समेत लखनऊ, झांसी, बांदा, चित्रकूट और महोबा के डीएफओ तथा वन संरक्षक को पक्षकार बनाया था। कहा था कि वर्ष 2011-12 में सीएजी की आडिट रिपोर्ट में बुंदेलखंड में विशेष पौधरोपण अभियान में तकरीबन 40 करोड़ की गड़बड़ी पाई गई थी।
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वन अधिकारियों ने इसकी जांच में लीपापोती की है। हाईकोर्ट ने रिट पर प्रदेश सरकार और वन विभाग से 15 फरवरी को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। 15 फरवरी को सुनवाई में प्रदेश के अपर महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट से गुजारिश की कि जवाबी काउंटर दाखिल करने को और वक्त दिया जाए। अभी तैयारी नहीं हो पाई है। इस पर चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायाधीश सौरभ श्याम शमशेरी ने सुनवाई के बाद अगली तारीख 8 मार्च निर्धारित की है।
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फोटो परिचय-13-
बुंदेलखंड में सरकारी पौधरोपण की पोल खोलती तस्वीर में याचिकाकर्ता/आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष सागर दीक्षित कृषि विवि बांदा में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा तामझाम के बीच किए गए पौधरोपण में मंत्री के हाथों लगाया गया पौधा सूखने पर दिखाते हुए।