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पहले ही दिन बूचड़खाने में प्रशासन का विरोध
अमर उजाला बांदा
Updated Wed, 22 Mar 2017 11:43 PM IST
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मार्केट में प्रशासनिक टीम के विरोध में उतरे मीट विक्रेता।
- फोटो : अमर उजाला
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योगी सरकार द्वारा लागू किए गए बूचड़खाना विरोधी अभियान में यहां पहले ही दिन अधिकारियों को विरोध का सामना करना पड़ा। बूचड़खाना संबंधी जानकारियों से पूरी तरह अनभिज्ञ अधिकारी विरोध कर रहे लोगों को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। अलबत्ता मंडल मुख्यालय के इकलौते स्लाटर हाउस को बंद करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि जारी किए गए लाइसेंस सिर्फ मीट (मांस) बिक्री के हैं। पशु वध (स्लाटिंग) के नहीं।
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बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट रामेश्वर तिवारी, खाद्य सुरक्षा अभिहीत अधिकारी चंद्रशेखर मिश्रा, पुलिस क्षेत्राधिकारी डॉ. राकेश मिश्रा और कोतवाली प्रभारी केपी सिंह ने फोर्स के साथ खाईपार मोहल्ले में स्थित स्लाटर हाउस पहुंचे। यहां रोजमर्रा की तरह लाइसेंसधारक दुकानदार मीट की बिक्री कर रहे थे। दुकानदारों ने अधिकारियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2006 के तहत स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए लाइसेंस दिखाए। ये लाइसेंस पिछले वर्ष अक्तूबर में जारी हुए हैं। इनकी वैधता अक्तूबर 2021 (पांच वर्ष) है। शहर में लगभग 25 लाइसेंस धारक मीट विक्रेता है।
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अधिकारियों ने स्लाटर हाउस में ही पशुओं की कटान (स्लाटिंग) को गैरकानूनी बताते हुए स्लाटर हाउस भवन को ईंटों से चुनवाकर बंद कर देने घोषणा की। इस पर मीट विक्रेता भड़क गए। प्रशासन और संबंधित विभागों के विरुद्ध नारे शुरू कर दिए। दुकानदार मुन्ना, प्यारे कुरैशी, दिलशाद, आसिफ, आरिफ, अनीसा, अल्ला रक्खू, तुफैल आदि का कहना था कि यहां गिने-चुने बड़े जानवर (भैंस) ही काटे जाते हैं।
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नगर पालिका का मुंशी रोजाना प्रति जानवर 10 रुपये वसूलता है। इसके अलावा हरेक दुकानदार से 10 रुपये और लिए जाते हैं। दुकानदारों की दलील थी कि अगर यह अवैध है तो किस बात का पैसा वसूला जा रहा है? विक्रेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार ने मांस का निर्यात करने वाले बड़े बूचड़खानों को बंद करने का निर्णय लिया है न कि छोटी दुकानों को। ऐसी मनमानी की गई तो बड़ी संख्या में परिवार बेरोजगार होकर भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
अधिकारियों ने मीट विक्रेताओं को बृहस्पतिवार को लाइसेंस लेकर कलेक्ट्रेट में तलब किया है। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि डीएम से बात कर उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि स्लाटर हाउस भवन को स्थाई रूप से बंद कराया जाएगा। ताकि पशु वध का अवैध कार्य न हो सके।
बोले, अफसर
शहर में मीट की बहुत दुकानें हैं। मुझे इनकी जानकारी नहीं है कि उनके लाइसेंस हैं या नहीं। यह खाद्य सुरक्षा अधिकारी ही बताएंगे।-वीके श्रीवास्तव, ईओ, नगर पालिका, बांदा।
नगर पालिका ईओ से जानकारी मांगी है। खाईपार में एक स्लाटर हाउस है। वह लंबे अरसे से बंद है। जबकि दूसरे भवन में कारोबार चल रहा है। इसका पंजीकरण नगर पालिका करती है। मुझे इसकी जानकारी नहीं है। -डॉ.लाखन सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बांदा।
स्लाटर हाउस या मीट की दुकानों और उनके लाइसेंसधारकों के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। न ही कभी मुझे इसकी सूचना उपलब्ध कराई गई है।
डॉ.आरएन प्रसाद, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, बांदा।
आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है। जिन मीट विक्रेताओं के पास लाइसेंस नहीं होगा उन्हें काम नहीं करने दिया जाएगा। फिलहाल मेरे पास दुकानों का ब्योरा उपलब्ध नहीं है।-चंद्रशेखर मिश्रा, खाद्य एवं औषधि अभिहित अधिकारी, बांदा।