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15 दिन में 60 टीमें खोज पाईं सिर्फ 38 टीबी मरीज
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Tue, 13 Mar 2018 11:29 PM IST
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जिला क्षय रोग नियंत्रण केंद्र।
- फोटो : अमर उजाला
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एक पखवारे तक चले सक्रिय टीबी खोज अभियान का हाल खोदा पहाड़ और निकली चुहिया की तरह रहा। जोरशोर से चलाए गए अभियान में स्वास्थ्य विभाग की टीमों को 20 लाख की आबादी वाले जनपद में महज 38 नए टीबी रोगी मिले हैं। पूर्व में 1100 से ज्यादा टीबी मरीज यहां क्षय रोग नियंत्रण केंद्र में पंजीकृत हैं। जिला टीबी नियंत्रण केंद्र में रोजाना 20 से 25 मरीज आते हैं।
प्रदेश सरकार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने 24 फरवरी से 10 मार्च तक प्रदेशव्यापी टीबी खोज अभियान चलाया था। इसे बिल्कुल पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर चलाया गया। तीन सदस्यीय 60 टीमों ने घर-घर जाकर रोगियों की खोज की। टीम में आशा, आंगनबाड़ी और एक डाट्स प्रोवाइडर शामिल था। हर पांच टीम के ऊपर सुपरवाइजर तैनात किया गया। शासन के निर्देश के मुताबिक हर तीन माह में यह अभियान चलाया जाएगा। अभियान पूरा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताए गए आंकड़ों में जिले की सभी 10 स्वास्थ्य केंद्रों में 1,93,000 लोगों की जांच का लक्ष्य था। जबकि टीमों ने इससे बढ़कर 1,94,790 लोगों की जांच कर डाली। इनमें 1239 लोगों का बलगम जांच के लिए भेजा गया। इसमें 38 टीबी रोगी पाए गए।
सबसे ज्यादा नौ रोगी अतर्रा सीएचसी क्षेत्र में मिले। बिसंडा में छह, परसौड़ा में पांच, कमासिन और नरैनी में चार-चार, जसपुरा और बहेरी में तीन-तीन, बबेरू में दो तथा जिला क्षय रोग नियंत्रण केंद्र (डीटीसी) और बड़ोखर खुर्द पीएचसी में एक-एक मरीज खोजे गए हैं।
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1151 का आंकड़ा पार कर चुके टीबी मरीजों की फौज के बीच इलाज के लिए सिर्फ 32 कर्मचारियों का स्टाफ है। इसमें 13 एलटी, 14 सुपरवाइजर, तीन टीबी स्वास्थ्य पर्यवेक्षक और दो समन्यवक हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी डा.वीपी वर्मा ने बताया कि टीबी मरीजों के लिए दवाएं लखनऊ से आ रही हैं। बांदा जिले में 600 डोर टू डोर दवा सेंटर बनाए गए हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष कुमार के मुताबिक, जिला अस्पताल में टीबी मरीजों के लिए चार बेड आरक्षित किए गए हैं। इसमें दो महिलाओं के लिए होंगे। पूर्व में टीबी मरीज को भर्ती करने के लिए झांसी भेजा जाता था। अब यह सुविधा यहीं मिलेगी। ब्यूरो
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प्रदेश सरकार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने 24 फरवरी से 10 मार्च तक प्रदेशव्यापी टीबी खोज अभियान चलाया था। इसे बिल्कुल पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर चलाया गया। तीन सदस्यीय 60 टीमों ने घर-घर जाकर रोगियों की खोज की। टीम में आशा, आंगनबाड़ी और एक डाट्स प्रोवाइडर शामिल था। हर पांच टीम के ऊपर सुपरवाइजर तैनात किया गया। शासन के निर्देश के मुताबिक हर तीन माह में यह अभियान चलाया जाएगा। अभियान पूरा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताए गए आंकड़ों में जिले की सभी 10 स्वास्थ्य केंद्रों में 1,93,000 लोगों की जांच का लक्ष्य था। जबकि टीमों ने इससे बढ़कर 1,94,790 लोगों की जांच कर डाली। इनमें 1239 लोगों का बलगम जांच के लिए भेजा गया। इसमें 38 टीबी रोगी पाए गए।
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सबसे ज्यादा नौ रोगी अतर्रा सीएचसी क्षेत्र में मिले। बिसंडा में छह, परसौड़ा में पांच, कमासिन और नरैनी में चार-चार, जसपुरा और बहेरी में तीन-तीन, बबेरू में दो तथा जिला क्षय रोग नियंत्रण केंद्र (डीटीसी) और बड़ोखर खुर्द पीएचसी में एक-एक मरीज खोजे गए हैं।
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1151 का आंकड़ा पार कर चुके टीबी मरीजों की फौज के बीच इलाज के लिए सिर्फ 32 कर्मचारियों का स्टाफ है। इसमें 13 एलटी, 14 सुपरवाइजर, तीन टीबी स्वास्थ्य पर्यवेक्षक और दो समन्यवक हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी डा.वीपी वर्मा ने बताया कि टीबी मरीजों के लिए दवाएं लखनऊ से आ रही हैं। बांदा जिले में 600 डोर टू डोर दवा सेंटर बनाए गए हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष कुमार के मुताबिक, जिला अस्पताल में टीबी मरीजों के लिए चार बेड आरक्षित किए गए हैं। इसमें दो महिलाओं के लिए होंगे। पूर्व में टीबी मरीज को भर्ती करने के लिए झांसी भेजा जाता था। अब यह सुविधा यहीं मिलेगी। ब्यूरो