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रजिस्ट्रेशन जांचें-परखें फिर लें कर्ज

Mon, 15 Feb 2016 11:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा Updated Mon, 15 Feb 2016 11:21 PM IST
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Once again , check the registration study the debt

बांदा। ‘न खाता न बही, जो सूदखोर कहें वही सही’।

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मुसीबत के मारे लोगों को कर्ज देकर वसूली करने वाले सूदखोर यही कर रहे हैं। इनके शिकंजे में न सिर्फ अनपढ़ और गरीब, बल्कि बड़े घरानों के पढ़े-लिखे लोग भी फंस जाते हैं।

किसी की कोई चीज गिरवी रखकर शर्तों के तहत कर्ज देना साहूकारी कहलाता है। इसमें ब्याज की दर भी तय होती है लेकिन इसकी आड़ मेें बिना पंजीकरण कराए तमाम लोग साहूकारी के नाम पर सूदखोरी का धंधा कर रहे हैं।

सूखे से बेहाल जिले के लोगों को चाहिए कि साहूकारों के रजिस्ट्रेशन आदि की भलीभांति जांच-परख के बाद ही उनसे कर्ज लें, ताकि नियम विरुद्ध वसूली पर उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सके।

बांदा में 41 पुरुष, 22 महिलाएं साहूकार
बांदा। जिले में 63 साहूकार रजिस्ट्रेशन कराए हुए हैं। इनमें 22 महिलाएं हैं। कई सराफा व्यवसायियों ने साहूकारी का रजिस्ट्रेशन करा रखा है।

कुछ तो पूरे परिवार का पंजीकरण कराए हैं। बांदा शहर में पंजीकृत साहूकारों में कांग्रेस, सपा, बसपा और भाजपा से जुड़े लोग साहूकारी का रजिस्ट्रेशन कराकर यह धंधा कर रहे हैं। अखबार से जुड़े लोग भी पंजीकृत साहूकार हैं।

यह है अधिनियम, तोड़ा तो होगी जेल
बांदा। उत्तर प्रदेश साहूकार विनियम अधिनियम-2008 की धारा 12 के तहत साहूकार, बैंकों द्वारा सामान्यत: ली जाने वाली दर पर ब्याज की अधिकतम दर तय करेगा लेकिन अनियमितता/मनमानी नहीं करेगा। धारा 11 के तहत गिरवी रखी गई वस्तु को अमानत की तरह रखेगा।

इकरारनामे में मूलधन का उल्लेख और रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज होना चाहिए। कर्जदार किस्त वापस करे तो एक गवाह के सामने साहूकार इसे लेकर रसीद देगा। ब्याज का निर्धारण वार्षिक होगा।

धारा 22 के तहत बिना रजिस्ट्रेशन के साहूकारी करने या पंजीकरण की शर्तों का उल्लंघन करने पर छह माह तक की जेल या 5000 हजार रुपये जुर्माना या दोनों सजाएं होंगी।

एक्ट की धारा 23 में प्रावधान है कि कर्जदार का उत्पीड़न किया तो तीन माह की कैद या 500 रुपये जुर्माना अथवा दोनों सजाएं होंगी।

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