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भूसे के लिए पैसा नहीं, कंटीली झाड़ियां खाकर मर रहे गोवंश

Thu, 04 Nov 2021 07:36 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 04 Nov 2021 07:36 PM IST
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No money for straw, cows dying by eating thorn bushes
No money for straw, cows dying by eating thorn bushes - फोटो : BANDA
करतल। गोवंश संरक्षण के तमाम दावे खोखले साबित हो रहे हैं। ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश के सीमावर्ती रगौली भटपुरा में स्थित गोशाला केंद्र है। हाल ही में यहां 28 गायों की मौत हो गई है। इन्हें परिसर में ही जेसीबी से खुदाई कराकर दफना दिया गया है। यहां साढ़े पांच सौ गोवंश बताए जा रहे हैं। गोशाला संचालक कंटीली झाड़ियां काटकर गोवंशों को परोस रहे हैं।
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गोशालाओं में प्रति गाय 30 रुपये प्रतिदिन की दर से सरकारी भुगतान किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन असलियत इसके विपरीत है। रगौली भटपुरा की गायों को वहीं जंगल में लगे कांटेदार पौधों की टहनियां काटकर परोसी जा रही हैं। कांटे गायों के गले की फांस बनकर मौत का सबब बन रहे हैं। भूख से दिन-ब-दिन कमजोर हो रही 28 गायों ने पिछले कुछ दिन के अंदर दम तोड़ दिया।
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गोशाला संचालक धनंजय सिंह का कहना है कि कई महीने से भूसा के लिए कोई पैसा नहीं मिला। किसान उधार भूसा नहीं दे रहे हैं। सीमावर्ती मध्य प्रदेश के कई गांवों से भी भूसा लाकर खिलाया जा चुका है। भूसे की देनदारी बकाया है।
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संचालक के मुताबिक मौजूदा में यहां 330 गोवंश संरक्षित हैं। उधर, खंड विकास अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि गोशाला की स्थिति के बारे में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी और अन्य संबंधित उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। गायों की मौत की जांच के लिए ब्लाक स्तरीय टीम गठित की जाएगी। उन्होंने बताया कि शासन समय-समय पर गोशाला के लिए पैसा देता है।
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