{"_id":"5f74c9308ebc3e9b85056b0b","slug":"no-fee-sanctioned-to-farmers-for-soil-testing-banda-news-knp585782199","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों को मिट्टी की जांच में मंजूर नहीं शुल्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों को मिट्टी की जांच में मंजूर नहीं शुल्क
विज्ञापन
लैब में मिट्टी नमूनों की जांच करता मृदा विभाग का टेक्नीशियन।
- फोटो : BANDA
बांदा। किसानों से खेत की मिट्टी के सैंपल की जांच का शुल्क लिया जाने लगा है। कोरोना काल में आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे किसानों ने सशुल्क मिट्टी परीक्षण से किनारा कर लिया। इसकी बानगी मृदा परीक्षण विभाग के ताजे आंकड़े हैं।
अब तक मुफ्त कराए जाते रहे मृदा परीक्षण पर शासन ने 43 रुपये प्रति नमूने का शुल्क लागू कर दिया है। नतीजतन मिट्टी परीक्षण का काम चित्रकूटधाम मंडल में औंधे मुंह गिरा है। मुफ्त होने पर जहां 12 हजार से ज्यादा किसान मृदा परीक्षण कराते थे, वहीं शुल्क लागू होने के बाद 6 माह में मात्र 165 किसानों ने ही परीक्षण कराया है।
चित्रकूटधाम मंडल में भूमि संरक्षण विभाग अब तक चारों जिलों में प्रति वर्ष 12 हजार से अधिक खेतों की मिट्टी के नमूनों की जांच करता था। जांच के बाद किसानों को सलाह दी जाती थी कि उनके खेत में क्या कमी है? कौन सी फसल अच्छी होगी? किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी दिया जाता था।
विज्ञापन
किसानों को अपने खेत की मिट्टी के पोषक तत्वों की जानकारी रहती थी। सरकार भूमि संरक्षण विभाग को इसके लिए लगभग 50 लाख रुपये बजट प्रति वर्ष मुहैया कराती थी, लेकिन इस वर्ष सरकार ने विभाग को एक रुपये का बजट नहीं दिया है। न मिट्टी परीक्षण का लक्ष्य दिया है। मिट्टी परीक्षण का सरकारी अभियान ठप पड़ा है।
अब किसानों को मिट्टी का परीक्षण कराने के लिए शुल्क लागू कर दिया गया है। प्रति सैंपल 43 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। भूमि संरक्षण विभाग बाकायदा इसकी रसीद दे रहा है।
शुल्क लागू कर देने से खेतों की मिट्टी की जांच कराने के प्रति किसानों का रुझान तेजी से नीचे गिरा है। भूमि संरक्षण विभाग के आंकड़े इसके गवाह हैं। छह माह में 43 रुपये का शुल्क अदा कर मिट्टी की जांच कराने वाले किसानों की संख्या 165 है।
खेतों की मिट्टी की जांच पोषक तत्वों की जानकारी के लिए होती है। खेत में जिस तत्व की कमी होती है उसे पूरा किया जाता है। इससे उत्पादन बढ़ता है। मिट्टी की जांच न होने से निश्चित ही फसल के उत्पादन पर असर आ सकता है।-डॉ. प्रमोद कुमार, जिला कृषि अधिकारी।
भूमि संरक्षण मृदा परीक्षण प्रयोगशाला चित्रकूटधाम मंडल के सहायक निदेशक शैलेंद्र कुमार का कहना है कि चालू वित्तीय वर्ष में मृदा परीक्षण का कोई सरकारी लक्ष्य व बजट नहीं दिया गया है। सिर्फ शुल्क अदा कर किसान प्राइवेट तौर पर मिट्टी की जांच करा सकता है। किसान को खुद मिट्टी लैब में लाना होगी।
किसान मिथलेश कुमार (महुई) ने मिट्टी की जांच में भी शुल्क लागू कर दिए जाने पर दो टूक शब्दों में कहा कि हम पैसा देकर नहीं कराएंगे जांच। अब तक विभागीय कर्मी खुद आकर खेत से मिट्टी लेते थे और मुफ्त जांच करते थे। किसानों के दिन इसी तरह अच्छे आएंगे क्या?
किसान सद्दीश (जारी) का कहना है कि ब्याज पर पैसा लेकर किसी तरह खेतों की बुआई की है। पहले नि:शुल्क जांच होती थी तो करा लेते थे। अब पैसा देकर जांच नहीं कराएंगे। किसानों की समस्याओं को देखते हुए सरकार को मिट्टी की जांच मुफ्त कराने की व्यवस्था करानी चाहिए।
विज्ञापन
अब तक मुफ्त कराए जाते रहे मृदा परीक्षण पर शासन ने 43 रुपये प्रति नमूने का शुल्क लागू कर दिया है। नतीजतन मिट्टी परीक्षण का काम चित्रकूटधाम मंडल में औंधे मुंह गिरा है। मुफ्त होने पर जहां 12 हजार से ज्यादा किसान मृदा परीक्षण कराते थे, वहीं शुल्क लागू होने के बाद 6 माह में मात्र 165 किसानों ने ही परीक्षण कराया है।
विज्ञापन
चित्रकूटधाम मंडल में भूमि संरक्षण विभाग अब तक चारों जिलों में प्रति वर्ष 12 हजार से अधिक खेतों की मिट्टी के नमूनों की जांच करता था। जांच के बाद किसानों को सलाह दी जाती थी कि उनके खेत में क्या कमी है? कौन सी फसल अच्छी होगी? किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी दिया जाता था।
विज्ञापन
किसानों को अपने खेत की मिट्टी के पोषक तत्वों की जानकारी रहती थी। सरकार भूमि संरक्षण विभाग को इसके लिए लगभग 50 लाख रुपये बजट प्रति वर्ष मुहैया कराती थी, लेकिन इस वर्ष सरकार ने विभाग को एक रुपये का बजट नहीं दिया है। न मिट्टी परीक्षण का लक्ष्य दिया है। मिट्टी परीक्षण का सरकारी अभियान ठप पड़ा है।
अब किसानों को मिट्टी का परीक्षण कराने के लिए शुल्क लागू कर दिया गया है। प्रति सैंपल 43 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। भूमि संरक्षण विभाग बाकायदा इसकी रसीद दे रहा है।
शुल्क लागू कर देने से खेतों की मिट्टी की जांच कराने के प्रति किसानों का रुझान तेजी से नीचे गिरा है। भूमि संरक्षण विभाग के आंकड़े इसके गवाह हैं। छह माह में 43 रुपये का शुल्क अदा कर मिट्टी की जांच कराने वाले किसानों की संख्या 165 है।
खेतों की मिट्टी की जांच पोषक तत्वों की जानकारी के लिए होती है। खेत में जिस तत्व की कमी होती है उसे पूरा किया जाता है। इससे उत्पादन बढ़ता है। मिट्टी की जांच न होने से निश्चित ही फसल के उत्पादन पर असर आ सकता है।-डॉ. प्रमोद कुमार, जिला कृषि अधिकारी।
भूमि संरक्षण मृदा परीक्षण प्रयोगशाला चित्रकूटधाम मंडल के सहायक निदेशक शैलेंद्र कुमार का कहना है कि चालू वित्तीय वर्ष में मृदा परीक्षण का कोई सरकारी लक्ष्य व बजट नहीं दिया गया है। सिर्फ शुल्क अदा कर किसान प्राइवेट तौर पर मिट्टी की जांच करा सकता है। किसान को खुद मिट्टी लैब में लाना होगी।
किसान मिथलेश कुमार (महुई) ने मिट्टी की जांच में भी शुल्क लागू कर दिए जाने पर दो टूक शब्दों में कहा कि हम पैसा देकर नहीं कराएंगे जांच। अब तक विभागीय कर्मी खुद आकर खेत से मिट्टी लेते थे और मुफ्त जांच करते थे। किसानों के दिन इसी तरह अच्छे आएंगे क्या?
किसान सद्दीश (जारी) का कहना है कि ब्याज पर पैसा लेकर किसी तरह खेतों की बुआई की है। पहले नि:शुल्क जांच होती थी तो करा लेते थे। अब पैसा देकर जांच नहीं कराएंगे। किसानों की समस्याओं को देखते हुए सरकार को मिट्टी की जांच मुफ्त कराने की व्यवस्था करानी चाहिए।

मिथलेश कुमार।- फोटो : BANDA

किसान सिद्दीक- फोटो : BANDA