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Banda News: न बेड मिले न बेंच, फर्श पर किया मरीजों का उपचार
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बांदा। जिला अस्पताल में बुखार और डायरिया से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। सुबह अस्पताल खुलते ही ओपीडी और ट्राॅमा सेंटर में संचालित इमरजेंसी में भी मरीजों की भीड़ जुटी रही है। बेड और बेंच फुल हो जाने की वजह से मरीजों को फर्श पर लिटाकर उपचार किया जा रहा है। चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि मरीजों की संख्या में एकबारगी इजाफा होने से अव्यवस्था है।
गुरुवार को जिला अस्पताल में सुबह से ही मरीजों की भीड़ लगी रही। जिला अस्पताल की ओपीडी में 1100 से अधिक मरीजों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराकर उपचार कराया। दो बजे के बाद ट्रामा सेंटर इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ जमा हो गई। डायरिया से पीड़ित बरगहनी गांव निवासी शांती देवी (52), भरुआ निवसी अनुज (2) पुत्र कैलाश, अरबई गांव निवासी शशी (10) पुत्री राममिलन, स्वराज कालोनी गली नंबर तीन निवासी आराध्या (12) पुत्री राजकुमार तिवारी, तेरहीमाफी गांव निवासी उर्मिला (21) पत्नी मुकेश, मुक्तिधाम क्योटरा निवासी आराध्या (1) पुत्री देवेंद्र और जनपद छतरपुर के गौरिहार निवासी पांच माह के महेश पुत्र वरदानी समेत 12 से अधिक लोगों को डायरिया की चपेट में आने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इसी दौरान एक 60 वर्षीय वृद्ध पचिनिया अपने महिला तीमारदार के साथ ट्रामा सेंटर पहुंची। वहां पर सभी बेड और गद्दीदार बेंच फुल होने के कारण वह फर्श पर ही लेटकर चिकित्सक का इंतजार करने लगी। तीमारदार के कहने पर चिकित्सक मौके पर पहुंचे और उसका उपचार किया।
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सीएमस डा. आरके गुप्ता का कहना है कि कभी-कभी मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण अव्यवस्था होती है। मरीजों को भर्ती करने के साथ ही बेड या फिर गद्दीदार बेंच में लिटाकर उपचार किया जा रहा है।
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गुरुवार को जिला अस्पताल में सुबह से ही मरीजों की भीड़ लगी रही। जिला अस्पताल की ओपीडी में 1100 से अधिक मरीजों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराकर उपचार कराया। दो बजे के बाद ट्रामा सेंटर इमरजेंसी में मरीजों की भीड़ जमा हो गई। डायरिया से पीड़ित बरगहनी गांव निवासी शांती देवी (52), भरुआ निवसी अनुज (2) पुत्र कैलाश, अरबई गांव निवासी शशी (10) पुत्री राममिलन, स्वराज कालोनी गली नंबर तीन निवासी आराध्या (12) पुत्री राजकुमार तिवारी, तेरहीमाफी गांव निवासी उर्मिला (21) पत्नी मुकेश, मुक्तिधाम क्योटरा निवासी आराध्या (1) पुत्री देवेंद्र और जनपद छतरपुर के गौरिहार निवासी पांच माह के महेश पुत्र वरदानी समेत 12 से अधिक लोगों को डायरिया की चपेट में आने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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इसी दौरान एक 60 वर्षीय वृद्ध पचिनिया अपने महिला तीमारदार के साथ ट्रामा सेंटर पहुंची। वहां पर सभी बेड और गद्दीदार बेंच फुल होने के कारण वह फर्श पर ही लेटकर चिकित्सक का इंतजार करने लगी। तीमारदार के कहने पर चिकित्सक मौके पर पहुंचे और उसका उपचार किया।
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सीएमस डा. आरके गुप्ता का कहना है कि कभी-कभी मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण अव्यवस्था होती है। मरीजों को भर्ती करने के साथ ही बेड या फिर गद्दीदार बेंच में लिटाकर उपचार किया जा रहा है।