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पालिका में छाया रहा सन्नाटा, चर्चाओं के बीच गुजरा दिन
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 12 Aug 2015 12:19 AM IST
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एलईडी खरीद व शवदाह गृह के निर्माण में 2.60 करोड़ के घोटाले में दोषी पाए जाने के बाद नगर पालिका का नजारा मंगलवार को बदला सा नजर आया। चेयरमैन और ईओ के दफ्तर की कुर्सियां खाली रहीं। इक्का-दुक्का कर्मचारी मौजूद रहे। वह भी कामकाज की बजाए कानाफूसी करते नजर आए।
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लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने बांदा नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष व ईओ के खिलाफ मिली शिकायतों की जांच पूरी कर ली है। नगर पालिका अध्यक्ष विनोद जैन और अधिशाषी अधिकारी वीरेंद्र श्रीवास्तव को मंगलवार को जैसे ही घोटाले की रिपोर्ट सरकार को भेजे जाने की भनक लगी, चेहरों पर मायूसी छा गई।
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नगर पालिका परिषद कार्यालय में रोजाना नजर आने वाली भीड़ व चहल-पहल गायब रही। सिर्फ इक्का-दुक्का ठेकेदार व उनके गुर्गे वहां घूमते नजर आए। चेयरमैन विनोद जैन दोपहर में दफ्तर तो आईं, पर पांच मिनट के अंदर उठकर चली भी गईं।
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इस बीच कुछ कर्मचारी फाइल लेकर हस्ताक्षर कराने आए, लेकिन चेयरमैन ने झिड़कते हुए फाइलें लौटा दीं। उधर, ईओ मंगलवार को नगर पालिका में नजर ही नहीं आए। चहेतों से भरा रहने वाला चेयरमैन का कमरा दिनभर वीरान नजर आया। उधर, नगर पालिका के कर्मचारी फाइलों को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। दिनभर लिपिक और संविदा कर्मचारी फाइलों की आंकड़ेबाजी में जुटे नजर आए।
सीएम की जांच में दोषी थे चेयरमैन और ईओ
वाहन और बिजली उपकरण खरीद मामले में नगर पालिका अध्यक्ष विनोद जैन के विरुद्ध गबन और अन्य अनियमितताओं के विभिन्न आरोपों की जांच पिछले साल ही शुरू हो गई थी। शासन के आदेश पर जिलाधिकारी ने सिटी मजिस्ट्रेट को जांच सौंपी थी। सीएम की जांच में कई मामलों में चेयरमैन को भी दोषी भी पाया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
नगर पालिका अध्यक्ष पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए सामूहिक और अलग-अलग हस्ताक्षर वाले पत्रों से शासन को शिकायतें की गई थीं। शासन ने पिछले वर्ष जुलाई माह में जिलाधिकारी को जांच कराने के आदेश दिए। जांच का जिम्मा सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया।
तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अनिल कुमार ने शिकायतकर्ता नगर पालिका अवर अभियंता एसके मिश्रा और पालिका सदस्य दिनेश कुमार, श्याम मोहन धुरिया, दिलीप कुमार यादव, भारत और भ्रष्टाचार उन्मूलन मोर्चा महासचिव प्रशांत समुद्रे, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मोहम्मद इदरीस, पत्रकार रामजी गुप्ता, शासन द्वारा नामित नगर पालिका सदस्य एएस नोमानी, रामबहादुर सविता (महोबा), सपा नेता रामआसरे और रवींद्रनाथ से अलग-अलग साक्ष्य जुटाए और कई दिनों तक बयान दर्ज किए।
करीब माह भर चली जांच के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने डीएम को रिपोर्ट सौंपी। इसमें वाहन व बिजली उपकरण खरीद में अनियमितताएं मिली थीं। लेकिन रसूख के चलते चेयरमैन व ईओ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
चेयरमैन और ईओ ने टेंडर में किया था खेल
लगभग ढाई करोड़ के टेंडर गुपचुप ढंग से प्रकाशित कराने और चहेती फर्म को ठेका देने के खेल में भी चेयरमैन और ईओ जांच के दायरे में आए। पालिका सदस्यों की शिकायत पर मंडलायुक्त ने अपर जिलाधिकारी को जांच के आदेश दिए थे।
पालिका सदस्य हाजी शानिया खान, रानी देवी और बाला प्रसाद ने संयुक्त हस्ताक्षर युक्त पत्र में आयुक्त से नगर पालिका में 3 एस्कार्ट लोडर, 40 रिक्शा गाड़ी और 2 डंफर तथा सीवर जैटिंग पंप सेक्शन मशीन की खरीददारी के लिए स्थानीय अखबारों के बजाए लखनऊ और हरदोई के अखबारों में टेंडर प्रकाशित कराने के आरोप लगाए थे। अन्य ठेकेदारों को गुमराह करने की कोशिश बताई । यह जांच भी कुछ दिनों के बाद ठंडे बस्ते में चली गई।