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Banda News: मुख्य आरोपी समेत दो के मेडिकल स्टोर लाइसेंस निरस्त
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बांदा। कोडीनयुक्त सिरप की 30 हजार शीशियां पकड़े जाने के मामले में औषधि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है।
सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार ने सोमवार को मुख्य आरोपी समेत दो के मेडिकल स्टोर लाइसेंस निरस्त कर दिए। दोनों मेडिकल स्टोर के संचालक कोडीन सिरप मामले में गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वहीं हमीरपुर के एक मेडिकल स्टोर और अतर्रा निवासी एक आरोपी के पिता के नाम संचालित मेडिकल स्टोर के लाइसेंस की जांच चल रही है।
तीन सितंबर को बिसंडा थाना क्षेत्र में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर एसटीएफ और पुलिस ने 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त सिरप पकड़ा था। इसके बाद औषधि विभाग ने संबंधित मेडिकल स्टोर संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
पुलिस की एफआईआर में दर्ज नाम के आधार पर सोमवार को अतर्रा निवासी प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन के नाम संचालित श्रीश्याम मेडिकल एजेंसी और प्रवीण उर्फ लकी के नाम संचालित मामा जी मेडिकल एजेंसी के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए।
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प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन के नाम रोडवेज बस स्टैंड पर श्रीश्याम मेडिकल एजेंसी का थोक लाइसेंस था। वहीं प्रवीण गुप्ता लखन कॉलोनी में मामा जी मेडिकल एजेंसी संचालित करता था। दोनों को पुलिस ने मामले में गिरफ्तार किया है। मामले में अतर्रा निवासी रोहित पांडेय को भी गिरफ्तार किया गया है।
रामलीला मैदान स्थित श्रीराम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस उसके पिता के नाम है। इसके अलावा हमीरपुर के टेढ़ा स्थित ओम मेडिकल एजेंसी के संचालक रवींद्र गुप्ता भी मामले में वांछित हैं। इन दोनों मेडिकल स्टोर के लाइसेंस के संबंध में विभागीय जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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अब दवा बेचने पर होगी कार्रवाई
लाइसेंस निरस्त होने के बाद संबंधित मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध दवाओं की बिक्री नहीं की जा सकेगी। सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार ने बताया कि यदि संबंधित मेडिकल स्टोर से दवा की बिक्री करते पाया गया तो उसके खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि मामले में संबंधित आरोपियों या उनके परिवार के किसी सदस्य को भविष्य में मेडिकल स्टोर का लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकेगा।
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जांच रिपोर्ट का भी इंतजार
बरामद 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त सिरप के औषधि निरीक्षक दिव्यप्रकाश मौर्य ने नमूने लिए थे। इन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। सहायक आयुक्त ने बताया कि सामान्य तौर पर रिपोर्ट आने में न्यूनतम छह माह लगते हैं। मामला महत्वपूर्ण होने के कारण जल्द रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए प्रयोगशाला प्रभारी को पत्र भेजा गया है। रिपोर्ट से सिरप में कोडीन की मात्रा और गुणवत्ता संबंधी स्थिति स्पष्ट होगी।
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सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार ने सोमवार को मुख्य आरोपी समेत दो के मेडिकल स्टोर लाइसेंस निरस्त कर दिए। दोनों मेडिकल स्टोर के संचालक कोडीन सिरप मामले में गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वहीं हमीरपुर के एक मेडिकल स्टोर और अतर्रा निवासी एक आरोपी के पिता के नाम संचालित मेडिकल स्टोर के लाइसेंस की जांच चल रही है।
तीन सितंबर को बिसंडा थाना क्षेत्र में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर एसटीएफ और पुलिस ने 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त सिरप पकड़ा था। इसके बाद औषधि विभाग ने संबंधित मेडिकल स्टोर संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
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पुलिस की एफआईआर में दर्ज नाम के आधार पर सोमवार को अतर्रा निवासी प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन के नाम संचालित श्रीश्याम मेडिकल एजेंसी और प्रवीण उर्फ लकी के नाम संचालित मामा जी मेडिकल एजेंसी के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए।
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प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन के नाम रोडवेज बस स्टैंड पर श्रीश्याम मेडिकल एजेंसी का थोक लाइसेंस था। वहीं प्रवीण गुप्ता लखन कॉलोनी में मामा जी मेडिकल एजेंसी संचालित करता था। दोनों को पुलिस ने मामले में गिरफ्तार किया है। मामले में अतर्रा निवासी रोहित पांडेय को भी गिरफ्तार किया गया है।
रामलीला मैदान स्थित श्रीराम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस उसके पिता के नाम है। इसके अलावा हमीरपुर के टेढ़ा स्थित ओम मेडिकल एजेंसी के संचालक रवींद्र गुप्ता भी मामले में वांछित हैं। इन दोनों मेडिकल स्टोर के लाइसेंस के संबंध में विभागीय जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब दवा बेचने पर होगी कार्रवाई
लाइसेंस निरस्त होने के बाद संबंधित मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध दवाओं की बिक्री नहीं की जा सकेगी। सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार ने बताया कि यदि संबंधित मेडिकल स्टोर से दवा की बिक्री करते पाया गया तो उसके खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि मामले में संबंधित आरोपियों या उनके परिवार के किसी सदस्य को भविष्य में मेडिकल स्टोर का लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकेगा।
जांच रिपोर्ट का भी इंतजार
बरामद 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त सिरप के औषधि निरीक्षक दिव्यप्रकाश मौर्य ने नमूने लिए थे। इन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। सहायक आयुक्त ने बताया कि सामान्य तौर पर रिपोर्ट आने में न्यूनतम छह माह लगते हैं। मामला महत्वपूर्ण होने के कारण जल्द रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए प्रयोगशाला प्रभारी को पत्र भेजा गया है। रिपोर्ट से सिरप में कोडीन की मात्रा और गुणवत्ता संबंधी स्थिति स्पष्ट होगी।