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चौकीदारों ने मांगी राइफल
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 28 Jul 2016 11:39 PM IST
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मंडलायुक्त कार्यालय पर ज्ञापन से पहले प्रदर्शन करते चौकीदार।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। गांवों की गलियों में रात के अंधेरे में ‘जागते रहो-जागते रहो’ की सदा गुंजाने वालों ने बृहस्पतिवार को मंडल मुख्यालय की सड़कों पर अपनी मांगों के नारे लगाए। हाथ में डंडा लेकर चौकीदारी करने वालों ने अब राइफल मांगी है। साथ ही मनरेगा में मजदूरी के जॉब कार्ड की भी फरियाद की है।
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गांवों में चौकीदारों की व्यवस्था अंग्रेजों के जमाने से चल रही है। ये पुलिस का ही एक अंग हैं, लेकिन पुलिस कर्मियों के मुकाबले रुआब कुछ भी नहीं है। इनकी भूमिका गांव में किसी घटना के बाद संबंधित थाने को सिर्फ सूचना देने तक सीमित होकर रह गई है। मात्र 1500 रुपये मानदेय मिलता है।
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महंगाई के इस दौर में एक परिवार के लिए यह नाकाफी है। चौकीदार संघ के बैनर तले बृहस्पतिवार को जिले के विभिन्न गांवाें से आए चौकीदारों ने मंडल मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। मंडलायुक्त को उनके आवास पर मांगपत्र दिया। इसमें 11 मांगें शामिल हैं।
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चौकीदारों ने कहा है कि उन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मी मानकर 7000 रुपये मानदेय दिया जाए। गांव की सुरक्षा के लिए राइफल मिले। मनरेगा का जॉब कार्ड और मजदूरों की सुरक्षा ड्यूटी दी जाए। चौकीदारों ने लोहिया आवास, शौचालय, सोलर लाइट, अंत्योदय राशन कार्ड, सरकारी खर्च पर मोबाइल फोन, वर्दी और साफा, गांव की बचत भूमि का पट्टा भी मांगा है।
दुर्घटना बीमा के साथ यह भी चाहा है कि उनके साथ कोई हादसा हो जाए तो उनके बच्चों को वरीयता के आधार पर नौकरी दी जाए। संघ अध्यक्ष विचित्रबाबू के नेतृत्व में मंडलायुक्त को ज्ञापन देने वालों शिव कुमार विश्वकर्मा, रामलखन यादव, रामशरण निषाद, महेशचंद्र, जगदीश, मतोला, रामऔतार सिंह, तोताराम, राजबहादुर, रमेशचंद्र, देशराज, दिवाकर सिंह खंगार, रामनिहोर, कृष्ण किशोर सिंह, नोखेलाल सिंह खंगार भी शामिल रहे।