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चोट में खून बहना बंद न हो तो हीमोफीलिया
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बांदा। विश्व हीमोफीलिया दिवस शनिवार को मनाया जाएगा। यह रोग आनुवांशिक होता है। बच्चों के दांत निकलते समय मसूड़ों से लगातार खून आना इस मर्ज का लक्षण है। हीमोफीलिया मरीज के चोट लगने पर खून अपने आप बहना बंद नहीं होता। हालांकि, यह रोग बहुत ही कम लोगों को होता है। इसका औसत 10 हजार लोगों में एक व्यक्ति का है।
राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. मुकेश यादव के मुताबिक, यह रोग मां-बाप से बच्चे पर आता है। इसके रोगी में क्लॉटिंग फैक्टर (खून के थक्के बनना) बंद हो जाता है। आमतौर पर चोट लगने से खून के बहाव के दौरान थक्के बनाने के लिए कुछ जरूरी घटक खून से प्लेटलेट्स में मिलकर उसे गाढ़ा कर देते हैं। ऐसे में खून बहना बंद हो जाता है, लेकिन जिन्हें हीमोफीलिया होता है, उनमें थक्के बनाने वाला घटक बहुत कम हो जाता है या बिल्कुल नहीं होता। बच्चों के दांत निकलने के दौरान यह आसानी से पता चल जाता है। हर वर्ष 17 अप्रैल को हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है।
प्रधानाचार्य ने बताया कि हीमोफीलिया का समय रहते इलाज होना संभव है। मेडिकल कालेज में ऐसे कई बच्चों का ब्लड ट्रांसप्लांट कर उपचार किया गया है। झांसी मेडिकल कालेज में नि:शुल्क इलाज होता है। दवाइयां भी उपलब्ध हैं। इस रोग के लक्षणों में मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, ब्लीडिंग, नाक से लगातार खून आना, त्वचा का आसानी से छिल जाना, शरीर पर लाल, नीले, काले रंग के चकत्ते, त्वचा गर्म होना, चिड़चिड़ापन, दस्त, ऐंठन, चक्कर, घबराहट आदि हैं।
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राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. मुकेश यादव के मुताबिक, यह रोग मां-बाप से बच्चे पर आता है। इसके रोगी में क्लॉटिंग फैक्टर (खून के थक्के बनना) बंद हो जाता है। आमतौर पर चोट लगने से खून के बहाव के दौरान थक्के बनाने के लिए कुछ जरूरी घटक खून से प्लेटलेट्स में मिलकर उसे गाढ़ा कर देते हैं। ऐसे में खून बहना बंद हो जाता है, लेकिन जिन्हें हीमोफीलिया होता है, उनमें थक्के बनाने वाला घटक बहुत कम हो जाता है या बिल्कुल नहीं होता। बच्चों के दांत निकलने के दौरान यह आसानी से पता चल जाता है। हर वर्ष 17 अप्रैल को हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है।
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प्रधानाचार्य ने बताया कि हीमोफीलिया का समय रहते इलाज होना संभव है। मेडिकल कालेज में ऐसे कई बच्चों का ब्लड ट्रांसप्लांट कर उपचार किया गया है। झांसी मेडिकल कालेज में नि:शुल्क इलाज होता है। दवाइयां भी उपलब्ध हैं। इस रोग के लक्षणों में मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, ब्लीडिंग, नाक से लगातार खून आना, त्वचा का आसानी से छिल जाना, शरीर पर लाल, नीले, काले रंग के चकत्ते, त्वचा गर्म होना, चिड़चिड़ापन, दस्त, ऐंठन, चक्कर, घबराहट आदि हैं।
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