{"_id":"610ecd538ebc3e6fc174ddbe","slug":"khel-ratna-is-fine-bharat-ratna-s-tease-banda-news-knp6449366123","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेल रत्न तो ठीक, भारत रत्न की टीस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेल रत्न तो ठीक, भारत रत्न की टीस
विज्ञापन
बांदा। अशोक ध्यनाचंद, ध्यानचंद के बेटे।
- फोटो : BANDA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। देर आए, दुरुस्त आए। खेलों के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान खेल रत्न से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाकर मेजर ध्यानचंद (दद्दा) के नाम कर दिए जाने पर खेल प्रेमियों और खास कर हाकी खिलाड़ियों ने फैसले को दुरुस्त बताया है।
दलील दी कि खेल पुरस्कार खिलाड़ी के नाम पर ही होना चाहिए। खिलाड़ियों को मलाल है कि लंबे अरसे से मांग के बावजूद बुंदेलखंड का नाम रोशन करने वाले दद्दा ध्यानचंद को मरणोपरांत अब तक भारत रत्न सम्मान नहीं दिया गया।
खेल पुरस्कार खिलाड़ी के नाम पर हो
राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार हाकी के जादूगर कहे जाने वाले दद्दा मेजर ध्यानचंद के नाम किया जाना उनकी राय में अच्छी बात है। खेल पुरस्कार खिलाड़ी के नाम पर ही होना चाहिए।
विज्ञापन
- शैलेंद्र कुशवाहा, उप क्रीड़ाधिकारी
भारत रत्न के हकदार हैं दद्दा
खेल पुरस्कारों को खिलाड़ी के नाम पर ही रखा जाना न्याय संगत और उचित है। दद्दा देश की खेल शख्सियत थे। उन्हें हाकी का जादूगर कहा जाता था। वह भारत रत्न सम्मान के हकदार हैं। केंद्र सरकार को यह निर्णय लेना चाहिए।
-वासिफ जमां खा, जिला क्रिकेट एसोसिएशन सचिव और वरिष्ठ खिलाड़ी
खेल रत्न काफी नहीं, भारत रत्न मिले
खेल रत्न पुरस्कार मेजर ध्यानचंद के नाम कर देना ही काफी नहीं है। दद्दा को तो भारत रत्न पुरस्कार का सम्मान दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री खिलाड़ियों की इस भावना का सम्मान करते हुए तत्काल इसकी घोषणा करें।
-सैय्यद अहमद मगरबी, वरिष्ठ हाकी खिलाड़ी, चित्रकूटधाम मंडल
देश को खुशियों का मौका दिया पीएम ने
बांदा। हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के पुत्र और विश्व कप के पूर्व विजेता, भारतीय हाकी टीम के सदस्य अशोक ध्यानचंद का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को एक बड़ी खुशी का मौका दिया है। देर से ही सही पर दुरुस्त फैसला हुआ है।
अशोक ध्यानचंद की ससुराल बांदा शहर में है। वह सपरिवार दिल्ली में रह रहे हैं। शनिवार को फोन पर बातचीत में कहा कि बाबूजी (मेजर ध्यानचंद) का देश के खेल जगत में खास योगदान है। वह खिलाड़ियों के प्रेरणा स्रोत हैं। बाबूजी ने खिलाड़ियों में जोश भरा और खेलों के प्रति आकर्षण पैदा किया।
देश को मेडल दिला गौरवान्वित किया। अशोक ने कहा कि खेल रत्न पुरस्कार बाबू जी के नाम पर करने पर पूरे देश में एक स्वर पर स्वागत हो रहा है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को ओलंपिक खेलों के समय खुशी की सौगात दी है।
अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हैं अशोक
करीब 71 वर्षीय अशोक ध्यानचंद 1974 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने तीन विश्व कप खेले। 1975 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय हाकी टीम में अशोक भी शामिल थे। उन्होंने दो बार 1972 में म्यूनिख में और 1976 में मॉट्रिंयल में ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। कई पदक जीते।
देश की मिट्टी में मिले खून को कैसे मिटाओगे
सर्वोच्च खेल पुरस्कार से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाने पर कांग्रेसी खफा हैं। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की संकुचित सोच बता रहे हैं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रदुम्न दुबे (लालू) ने कहा कि अवार्ड से नाम तो हटा दोगे, लेकिन देश की मिट्टी में मिले हुए खून को कैसे मिटाओगे?
विज्ञापन
दलील दी कि खेल पुरस्कार खिलाड़ी के नाम पर ही होना चाहिए। खिलाड़ियों को मलाल है कि लंबे अरसे से मांग के बावजूद बुंदेलखंड का नाम रोशन करने वाले दद्दा ध्यानचंद को मरणोपरांत अब तक भारत रत्न सम्मान नहीं दिया गया।
विज्ञापन
खेल पुरस्कार खिलाड़ी के नाम पर हो
राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार हाकी के जादूगर कहे जाने वाले दद्दा मेजर ध्यानचंद के नाम किया जाना उनकी राय में अच्छी बात है। खेल पुरस्कार खिलाड़ी के नाम पर ही होना चाहिए।
विज्ञापन
- शैलेंद्र कुशवाहा, उप क्रीड़ाधिकारी
भारत रत्न के हकदार हैं दद्दा
खेल पुरस्कारों को खिलाड़ी के नाम पर ही रखा जाना न्याय संगत और उचित है। दद्दा देश की खेल शख्सियत थे। उन्हें हाकी का जादूगर कहा जाता था। वह भारत रत्न सम्मान के हकदार हैं। केंद्र सरकार को यह निर्णय लेना चाहिए।
-वासिफ जमां खा, जिला क्रिकेट एसोसिएशन सचिव और वरिष्ठ खिलाड़ी
खेल रत्न काफी नहीं, भारत रत्न मिले
खेल रत्न पुरस्कार मेजर ध्यानचंद के नाम कर देना ही काफी नहीं है। दद्दा को तो भारत रत्न पुरस्कार का सम्मान दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री खिलाड़ियों की इस भावना का सम्मान करते हुए तत्काल इसकी घोषणा करें।
-सैय्यद अहमद मगरबी, वरिष्ठ हाकी खिलाड़ी, चित्रकूटधाम मंडल
देश को खुशियों का मौका दिया पीएम ने
बांदा। हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के पुत्र और विश्व कप के पूर्व विजेता, भारतीय हाकी टीम के सदस्य अशोक ध्यानचंद का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को एक बड़ी खुशी का मौका दिया है। देर से ही सही पर दुरुस्त फैसला हुआ है।
अशोक ध्यानचंद की ससुराल बांदा शहर में है। वह सपरिवार दिल्ली में रह रहे हैं। शनिवार को फोन पर बातचीत में कहा कि बाबूजी (मेजर ध्यानचंद) का देश के खेल जगत में खास योगदान है। वह खिलाड़ियों के प्रेरणा स्रोत हैं। बाबूजी ने खिलाड़ियों में जोश भरा और खेलों के प्रति आकर्षण पैदा किया।
देश को मेडल दिला गौरवान्वित किया। अशोक ने कहा कि खेल रत्न पुरस्कार बाबू जी के नाम पर करने पर पूरे देश में एक स्वर पर स्वागत हो रहा है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को ओलंपिक खेलों के समय खुशी की सौगात दी है।
अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हैं अशोक
करीब 71 वर्षीय अशोक ध्यानचंद 1974 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने तीन विश्व कप खेले। 1975 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय हाकी टीम में अशोक भी शामिल थे। उन्होंने दो बार 1972 में म्यूनिख में और 1976 में मॉट्रिंयल में ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। कई पदक जीते।
देश की मिट्टी में मिले खून को कैसे मिटाओगे
सर्वोच्च खेल पुरस्कार से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाने पर कांग्रेसी खफा हैं। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की संकुचित सोच बता रहे हैं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रदुम्न दुबे (लालू) ने कहा कि अवार्ड से नाम तो हटा दोगे, लेकिन देश की मिट्टी में मिले हुए खून को कैसे मिटाओगे?