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Banda News: केन और यमुना घटीं, पर मुसीबत बढ़ी
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पैलानी/जसपुरा (बांदा)। केन और यमुना का पानी तेजी से घट रहा है, लेकिन दोनों नदियां मुसीबत छोड़ गई हैं। तीन दिन से बाढ़ में डूबे रपटे अब धराशायी होने लगे है। संपर्क मार्गों और सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए है। फसलें बर्बाद हो गईं। डीएम ने तहसीलदारों को नुकसान का सर्वे कराकर तीन दिन में रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
जसपुरा के बरेहटा-शिवरामपुर के बीच बना रपटा बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त हो गया था। गुरुवार को जमींदोज हो गया। इससे शिवरामपुर, डिप्पा डेरा, नई दिल्ली का डेरा, फकिरा डेरा, हजारी डेरा, छनिहन डेरा, डोलन डेरा, शिवपाल का डेरा आदि का आवागमन ठप हो गया है। इसी प्रकार बरेहटा व शिवरामपुर को जाने वाली सीसी रोड भी जगह-जगह टूट गई है। मार्ग पर गड्ढे हो गए हैं।
बरेहटा से अमारा, गौरीकला-जसपुरा संपर्क मार्ग का डामर बह गया है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद नदी खासा मलबा छोड़ गई है। जो बदबू मार रहा है। डीएम के आदेश पर नांदादेव में कीटनाशक का छिड़काव किया गया। जुखाम, खांसी, बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य टीम ने शिविर लगाकर मरीजों का इलाज किया। पूर्व प्रधान रज्जन ने बताया कि गौलीघाट में स्टीमर बंद है। सिंधनकला का रपटा भी बंद है। इससे स्वास्थ्य टीम को बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचने में दिक्कतें हो रही है।
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पैलानी संवाद सहयोगी के अनुसार बाढ़ का पानी उतरने के बाद कई गांवों में मलबा इकट्ठा हो गया है। इसकी दुर्गंध से ग्रामीण परेशान हैं। हालांकि ग्राम पंचायतों ने सफाई का काम शुरू कर दिया है। खप्टिहाकलां से कछार जाने वाला संपर्क मार्ग मिट्टी से पूरी तरह से ढंक गया है। इससे आवागमन में दिक्कतें हो रही है। पानी में डूबी तिल, अरहर, मूंग, उड़द की फसलें सड़ गई हैं।
खतरा टला सात मीटर नीचे पहुंची केन
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गुरुवार केन का जलस्तर 95.10 मीटर मापा गया है। इसका खतरे का निशान 104 मीटर पर है। दो दिन पहले केन 106 मीटर पर बह रही थी। चिल्ला घाट पर यमुना का जलस्तर 97.11 मीटर मापा गया। यहां खतरे का निशान 100 मीटर है। यमुना 15 सेंटीमीटर की गति से घट रही है।
बांधों से केन में पानी का डिस्चार्ज बढ़ा
एमपी स्थित गंगऊ और बरियारपुर बांधों के संग्रहण क्षेत्र में बुधवार की रात झमाझम बारिश हुई। इससे बांधों से केन नदी में डिस्चार्ज होने वाले पानी में इजाफा हुआ है। गंगऊ बांध प्रभारी व अवर अभियंता वेद प्रकाश गौड़ का कहना है कि गंगऊ बांध के क्रस्टवाल से 69,684 क्यूसिक पानी केन में गिर रहा है। बरियारपुर बांध से 35,389 क्यूसिक पानी केन में गिर रहा है।
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जसपुरा के बरेहटा-शिवरामपुर के बीच बना रपटा बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त हो गया था। गुरुवार को जमींदोज हो गया। इससे शिवरामपुर, डिप्पा डेरा, नई दिल्ली का डेरा, फकिरा डेरा, हजारी डेरा, छनिहन डेरा, डोलन डेरा, शिवपाल का डेरा आदि का आवागमन ठप हो गया है। इसी प्रकार बरेहटा व शिवरामपुर को जाने वाली सीसी रोड भी जगह-जगह टूट गई है। मार्ग पर गड्ढे हो गए हैं।
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बरेहटा से अमारा, गौरीकला-जसपुरा संपर्क मार्ग का डामर बह गया है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद नदी खासा मलबा छोड़ गई है। जो बदबू मार रहा है। डीएम के आदेश पर नांदादेव में कीटनाशक का छिड़काव किया गया। जुखाम, खांसी, बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य टीम ने शिविर लगाकर मरीजों का इलाज किया। पूर्व प्रधान रज्जन ने बताया कि गौलीघाट में स्टीमर बंद है। सिंधनकला का रपटा भी बंद है। इससे स्वास्थ्य टीम को बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचने में दिक्कतें हो रही है।
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पैलानी संवाद सहयोगी के अनुसार बाढ़ का पानी उतरने के बाद कई गांवों में मलबा इकट्ठा हो गया है। इसकी दुर्गंध से ग्रामीण परेशान हैं। हालांकि ग्राम पंचायतों ने सफाई का काम शुरू कर दिया है। खप्टिहाकलां से कछार जाने वाला संपर्क मार्ग मिट्टी से पूरी तरह से ढंक गया है। इससे आवागमन में दिक्कतें हो रही है। पानी में डूबी तिल, अरहर, मूंग, उड़द की फसलें सड़ गई हैं।
खतरा टला सात मीटर नीचे पहुंची केन
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गुरुवार केन का जलस्तर 95.10 मीटर मापा गया है। इसका खतरे का निशान 104 मीटर पर है। दो दिन पहले केन 106 मीटर पर बह रही थी। चिल्ला घाट पर यमुना का जलस्तर 97.11 मीटर मापा गया। यहां खतरे का निशान 100 मीटर है। यमुना 15 सेंटीमीटर की गति से घट रही है।
बांधों से केन में पानी का डिस्चार्ज बढ़ा
एमपी स्थित गंगऊ और बरियारपुर बांधों के संग्रहण क्षेत्र में बुधवार की रात झमाझम बारिश हुई। इससे बांधों से केन नदी में डिस्चार्ज होने वाले पानी में इजाफा हुआ है। गंगऊ बांध प्रभारी व अवर अभियंता वेद प्रकाश गौड़ का कहना है कि गंगऊ बांध के क्रस्टवाल से 69,684 क्यूसिक पानी केन में गिर रहा है। बरियारपुर बांध से 35,389 क्यूसिक पानी केन में गिर रहा है।