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बाधित अवधि के पट्टे और मशीनाें पर रोक
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 02 Mar 2015 11:37 PM IST
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बालू खनन मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो अलग-अलग याचिकाओं पर दिए
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आदेशों में बालू खनन में मशीनों के इस्तेमाल और बाधित अवधि के नाम पर दी गई
खनन अनुमति पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। उधर, हाईकोर्ट के चीफ स्टैंडिंग कौंसिल ने इन दोनों याचिकाओं से संबंधित अलग-अलग पत्र बांदा डीएम को भेजे हैं। इनमें हाईकोर्ट के आदेशों की संक्षिप्त जानकारी दी है। साथ ही डीएम से कहा है कि किसी राजपत्रित संबंधित अधिकारी को जवाब दाखिल करने के लिए हाईकोर्ट भेजें।
याचिका संख्या 12136/2015 (जगदीश प्रसाद निषाद बनाम यूपी स्टेट सरकार) में 4 दिसंबर 2014 को खनिज विभाग द्वारा दिए गए पांच आदेशों को चुनौती दी गई थी। इसमें पट्टेदार चंद्रकांत मिश्रा, प्रकाशचंद्र द्विवेदी और सीरजध्वज सिंह को जवाब दाखिल करने का आदेश हाईकोर्ट ने दिया था।
26 फरवरी को न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति एसबी सिंह ने इस याचिका पर पुन: सुनवाई करते हुए 4 दिसंबर 2014 को बाधित अवधि का खनन करने की अनुमति देने संबंधी आदेश के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट के चीफ स्टैंडिंग कौंसिल (द्वितीय) कमरुल हसन सिद्दीकी और स्टैंडिंग कौंसिल आलोक कुमार सिंह ने संयुक्त हस्ताक्षरों से डीएम को भेजे गए पत्र में इससे अवगत कराने के साथ ही इस मामले में संबंधित किसी राजपत्रित अधिकारी को जवाब दाखिल करने के लिए हाईकोर्ट में पेश होने को कहा है।
उधर, एक अन्य रिट संख्या 12137/2015 (जगदीश प्रसाद निषाद बनाम यूपी स्टेट) में मनोज तिवारी और प्रकाशचंद्र द्विवेदी के खनन पट्टों को चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि ये पट्टे नर नारायण मिश्रा के मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के वितरित है।
इस पर हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने सुनवाई करते हुए पट्टा देने के आदेश को स्थगित कर दिया है। साथ ही दो सप्ताह के अंदर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि खनन में कार्य में मशीनों का प्रयोग नहीं किया जाएगा।
इस बारे में भी चीफ स्टैंडिंग कौंसिल ने डीएम को पत्र भेजकर अवगत कराते हुए किसी राजपत्रित संबंधित अधिकारी को जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट मेें तलब किया है।
अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। उधर, हाईकोर्ट के चीफ स्टैंडिंग कौंसिल ने इन दोनों याचिकाओं से संबंधित अलग-अलग पत्र बांदा डीएम को भेजे हैं। इनमें हाईकोर्ट के आदेशों की संक्षिप्त जानकारी दी है। साथ ही डीएम से कहा है कि किसी राजपत्रित संबंधित अधिकारी को जवाब दाखिल करने के लिए हाईकोर्ट भेजें।
याचिका संख्या 12136/2015 (जगदीश प्रसाद निषाद बनाम यूपी स्टेट सरकार) में 4 दिसंबर 2014 को खनिज विभाग द्वारा दिए गए पांच आदेशों को चुनौती दी गई थी। इसमें पट्टेदार चंद्रकांत मिश्रा, प्रकाशचंद्र द्विवेदी और सीरजध्वज सिंह को जवाब दाखिल करने का आदेश हाईकोर्ट ने दिया था।
26 फरवरी को न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति एसबी सिंह ने इस याचिका पर पुन: सुनवाई करते हुए 4 दिसंबर 2014 को बाधित अवधि का खनन करने की अनुमति देने संबंधी आदेश के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट के चीफ स्टैंडिंग कौंसिल (द्वितीय) कमरुल हसन सिद्दीकी और स्टैंडिंग कौंसिल आलोक कुमार सिंह ने संयुक्त हस्ताक्षरों से डीएम को भेजे गए पत्र में इससे अवगत कराने के साथ ही इस मामले में संबंधित किसी राजपत्रित अधिकारी को जवाब दाखिल करने के लिए हाईकोर्ट में पेश होने को कहा है।
उधर, एक अन्य रिट संख्या 12137/2015 (जगदीश प्रसाद निषाद बनाम यूपी स्टेट) में मनोज तिवारी और प्रकाशचंद्र द्विवेदी के खनन पट्टों को चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि ये पट्टे नर नारायण मिश्रा के मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के वितरित है।
इस पर हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने सुनवाई करते हुए पट्टा देने के आदेश को स्थगित कर दिया है। साथ ही दो सप्ताह के अंदर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि खनन में कार्य में मशीनों का प्रयोग नहीं किया जाएगा।
इस बारे में भी चीफ स्टैंडिंग कौंसिल ने डीएम को पत्र भेजकर अवगत कराते हुए किसी राजपत्रित संबंधित अधिकारी को जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट मेें तलब किया है।