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मंत्रोच्चारण के बीच जल तर्पण के साथ पितृपक्ष का विसर्जन
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Immersion of Pitru Paksha with water tarpan between chanting
- फोटो : BANDA
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बांदा/जसपुरा। 15 दिन तक चलने वाला पितृ पक्ष बुधवार को समाप्त हो गया। पितरों के प्रति श्रद्धा प्रदर्शित करने का पर्व पितृपक्ष है। मान्यता है कि पितरों के खुश होने पर घर में सुख-शांति आती है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने 15 दिन पितरों का जल तर्पण और श्राद्ध किया।
बुधवार को अंतिम दिन केन नदी, नवाब टैंक में पितृपक्ष का विसर्जन करने वालों की खासी भीड़ रही। पुरोहितों ने मंत्रोच्चारण के बीच पितरों का जल तर्पण के साथ विसर्जन कराया। पितरों की खुशी के लिए गरीबों और पशु-पक्षियों को भोजन कराया।
उधर, तमाम लोगों ने घरों में पितृपक्ष का विसर्जन कर ब्राम्हणों को भोजन कराया और दान दिया। कमोवेश यही स्थिति बबेरू, नरैनी, अतर्रा आदि में भी रही। उधर, 15 दिन तक चलने वाला बच्चों का महाबुलिया पर्व भी खत्म हो गया। अंतिम दिन बालिकाओं ने जोश के साथ गाजे-बाजे के बीच नदी, तालाब आदि में विसर्जन कर विदाई दी।
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बुधवार को अंतिम दिन केन नदी, नवाब टैंक में पितृपक्ष का विसर्जन करने वालों की खासी भीड़ रही। पुरोहितों ने मंत्रोच्चारण के बीच पितरों का जल तर्पण के साथ विसर्जन कराया। पितरों की खुशी के लिए गरीबों और पशु-पक्षियों को भोजन कराया।
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उधर, तमाम लोगों ने घरों में पितृपक्ष का विसर्जन कर ब्राम्हणों को भोजन कराया और दान दिया। कमोवेश यही स्थिति बबेरू, नरैनी, अतर्रा आदि में भी रही। उधर, 15 दिन तक चलने वाला बच्चों का महाबुलिया पर्व भी खत्म हो गया। अंतिम दिन बालिकाओं ने जोश के साथ गाजे-बाजे के बीच नदी, तालाब आदि में विसर्जन कर विदाई दी।
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