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राहत पैकेट और राशन वितरण की हकीकत जानने पर रहा जोर
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 25 May 2016 12:45 AM IST
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फसल
- फोटो : अमर उजाला
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सूखे के हालात जानने आई केंद्रीय टीम ने मंगलवार को कृषि विश्वविद्यालय समेत तीन गांवों का दौरा किया। चार सदस्यीय टीम ने किसानों से मिलकर सूखे के हालात जाने और रबी फसल में होने वाला नुकसान और पेयजल समस्या के बारे में जानकारी ली।
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केंद्रीय दल में शामिल केंद्र सरकार के निगरानी एवं मूल्यांकन निदेशालय के निदेशक आशीष बनर्जी, एफसीआई रीजनल आफिस के डीजीएम (जी) डीके भाष्कर, पशुपालन विभाग के सहायक आयुक्त आरपी दुबे और प्रदेश सरकार के नामित अधिकारी एमके भाटिया की टीम मंगलवार को अतर्रा क्षेत्र के तरसूमा गांव पहुंची।
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किसानों से भुखमरी व आत्महत्याओं के बारे में पूछा। गांव के रामबहोरी, जगदीश तिवारी, जोकड़, जियालाल, मातादीन आदि से बातचीत की। यहां से नरैनी तहसील के जबरापुरा गांव पहुंची टीम ने चौपाल लगाकर किसानों से अंत्योदय के तरह राशन वितरण के बारे में पूछा। बघेलाबारी गांव में सिंचाई संसाधनों के बारे में जानकारियां लीं।
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किसान देवीदीन, शिवभूषण गौतम, हीरालाल और शेष मणि ने फसलों के हालात बयां किए। टीम ने रसिन बांध के निरीक्षण में देखा कि बांध की तलहटी पर ही पानी बचा है। टीम ने सभी गांवों में किसानों से उनकी फसल की लागत और पैदावार इत्यादि के बारे में भी सवाल किए। इस दौरान एसडीएम अतर्रा एके पुष्कर, तहसीलदार धीरेंद्र कुमार, नायब तहसीलदार संजय अग्रहरि व थाने की पुलिस मौजूद रही।
खेत और गांवों की बदहाली देखने आया केंद्रीय दल बारिश से हुए मामूली दलदल में ही ठिठक गया। मंगलवार को सुबह केंद्रीय सर्किट हाउस से सीधे कृषि विश्वविद्यालय पहुंचा। वहां खेत-तालाब योजना का स्थलीय जायजा लेना था। एक दिन पूर्व हुई बारिश से विश्वविद्यालय परिसर के अंदर कीचड़नुमा दलदल था। केंद्रीय दल दलदल देख ठहर गया। वाहनों को दलदल में दाखिल करना मुनासिब नहीं समझा। नतीजे में विश्वविद्यालय परिसर में बनाए जा रहे तालाब तक जाए बिना विश्वविद्यालय के कमरों में बैठकर जानकारियां हासिल कर लीं और रवाना हो गया।