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वेंटीलेटर पर सरकारी अस्पताल, कैसे हो मरीजों का इलाज

Wed, 15 Jan 2020 11:48 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jan 2020 11:48 PM IST
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Government hospital on ventilator, how to treat patients
अस्पताल में पर्चा बनवाने के लिए लाइन में लगे तीमारदार। - फोटो : BANDA
बांदा। संसाधन और डाक्टरों की कमी से यहां के सरकारी अस्पताल वेंटीलेटर पर पहुंच गए हैं। मंडल मुख्यालय के मेडिकल कालेज, जिला पुरुष और महिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं।
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इसके अलावा ग्रामीण अस्पतालों में डाक्टरों और अन्य स्टाफ के अधिकांश पद खाली हैं। अस्पतालों में वेंटीलेटर, इक्यूबेटर, रेडिएंट वार्मर सुविधाएं नहीं है। डायलिसिस, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, आपरेशन थियेटर आदि के संसाधन होने के बाद भी मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल रहा है। ज्यादातर मरीजों को रेफर किया जा रहा हैं।
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इसकी बानगी मंडल मुख्यालय के महिला व पुरुष जिला अस्पताल तथा ट्रामा सेंटर हैं। यहां से पिछले दो महीनों में 2841 मरीजों को रेफर किया गया है। इसी तरह सीएचसी व पीएचसी से 2131 मरीजों को रेफर किया गया। रेफर कुल मरीजों में लगभग 50 चल बसे । इनमें आठ से 15 वर्ष तक के बच्चे भी शामिल हैं।
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रेफरल सेंटर बने सीएचसी और पीएचसी
जिले के तहसील व ब्लाक स्तर पर खुले 75 सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक व संसाधन दोनों का अभाव है। 121 चिकित्सकों के स्थान पर 75 ही कार्यरत हैं। 46 पद रिक्त हैं। जिला स्तरीय अस्पतालों में 44 के सापेक्ष 20 डाक्टर हैं। अधिकांश सीएससी व पीएससी में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। ज्यादातर मरीजों को यहां पर प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। दो माह के आंकड़ों पर गौर करें तो इन स्वास्थ्य केंद्रों से 2131 मरीज जिला अस्पताल व मेडिकल कालेज के लिए रेफर किए गए।
जिले में चिकित्सकों की उपलब्धता
अस्पताल स्वीकृत कार्यरत
जिला चिकित्सालय 17 11
महिला अस्पताल 07 03
सीएचसी 61 35
पीएचसी 60 40
जरूरी दवाएं 71 प्रतिशत ही उपलब्ध
सकारी चिकित्सालयों में जीवन रक्षक दवाओं का भी अभाव है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिला अस्पतालों में ईडीएल में 276 के सापेक्ष 198 दवाएं ही उपलब्ध हैं। इसी तरह सीएचसी में 148 दवाएं उपलब्ध बताई गई है। जिला अस्पतालों में 71.74 प्रतिशत और सीएचसी में 87 प्रतिशत दवाएं उपलब्ध बताई गईं हैं। विभाग का दावा है कि जीवन रक्षक दवाएं सभी अस्पतालों में उपलब्ध हैं।

डाक्टरों के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए शासन को समय-समय पर पत्र भेजकर अवगत कराया जाता रहा है। कई विशेषज्ञों की कमी से उपलब्ध संसाधनों का भी पूरा इस्तेमान नहीं हो पा रहा है। उम्मीद है कि शासन जल्द ही डाक्टरों की तैनाती करेगा।-डॉ. आरएन प्रसाद, प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी।
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