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घर-घर खिलाई जाएगी पेट के कीड़े मारने वाली दवा
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अभियान के तहत दवा खाते बच्चे।
- फोटो : BANDA
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बांदा। जनपद में सोमवार से शुरू हुए राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान में एक से 19 वर्ष तक के 5.24 लाख बच्चों, किशोर-किशोरियों और युवक-युवतियों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी। कोरोना संक्रमण के चलते स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद हैं। इससे फ्रंट लाइन वर्कर घर-घर जाकर दवा खिलाएंगे। मंगलवार को अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ.आरबी गौतम और सीएमओ डॉ.संतोष कुमार ने आजाद नगर स्थित नगरीय स्वास्थ्य केंद्र में बच्चों को दवा खिलाकर अभियान की शुरुआत की।
अपर निदेशक ने कहा कि बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए हर छह महीने में एल्बेंडाजोल (पेट के कीड़े मारने वाली दवा) खिलानी चाहिए। पेट में कीड़े होने से कुपोषण और खून की कमी हो जाती है। एक से 19 साल तक के सभी बच्चों को छह माह में एक बार यह दवा लेनी चाहिए। एल्बेंडाजोल टेबलेट आंगनबाड़ी केंद्रों में और 6 से 19 वर्ष तक के बच्चों, किशोर-किशोरियों को स्कूलों में खिलाई जाती है। बताया कि जनपद में 5 लाख 24 हजार 182 को दवा खिलाने का लक्ष्य है। यह अभियान 10 दिन चलेगा। अभियान की शुरुआत के मौके पर अपर सीएमओ डॉ.आरएन प्रसाद, जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुशल यादव और पीएचसी व सीएचसी चिकित्सक और स्टाफ मौजूद रहा।
खुले में शौच से हो सकते हैं पेट में कीड़े
बांदा। जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुशल यादव ने बताया कि खुले में शौच जाने से गंदगी के चलते पेट में कीड़े पैदा हो जाते हैं। इससे बच्चे आए दिन बीमार रहते हैं। उन्हें खून की कमी (एनीमिया) और कुपोषण हो जाता है। कृमि मुक्ति दवा खिलाने से इससे बचाव होता है। निजी विद्यालयों में भी बच्चों को यह दवा खिलाई जानी चाहिए।
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अपर निदेशक ने कहा कि बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए हर छह महीने में एल्बेंडाजोल (पेट के कीड़े मारने वाली दवा) खिलानी चाहिए। पेट में कीड़े होने से कुपोषण और खून की कमी हो जाती है। एक से 19 साल तक के सभी बच्चों को छह माह में एक बार यह दवा लेनी चाहिए। एल्बेंडाजोल टेबलेट आंगनबाड़ी केंद्रों में और 6 से 19 वर्ष तक के बच्चों, किशोर-किशोरियों को स्कूलों में खिलाई जाती है। बताया कि जनपद में 5 लाख 24 हजार 182 को दवा खिलाने का लक्ष्य है। यह अभियान 10 दिन चलेगा। अभियान की शुरुआत के मौके पर अपर सीएमओ डॉ.आरएन प्रसाद, जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुशल यादव और पीएचसी व सीएचसी चिकित्सक और स्टाफ मौजूद रहा।
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खुले में शौच से हो सकते हैं पेट में कीड़े
बांदा। जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुशल यादव ने बताया कि खुले में शौच जाने से गंदगी के चलते पेट में कीड़े पैदा हो जाते हैं। इससे बच्चे आए दिन बीमार रहते हैं। उन्हें खून की कमी (एनीमिया) और कुपोषण हो जाता है। कृमि मुक्ति दवा खिलाने से इससे बचाव होता है। निजी विद्यालयों में भी बच्चों को यह दवा खिलाई जानी चाहिए।
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