{"_id":"5f46a4ba8ebc3e176a7e7305","slug":"four-thousand-metric-tons-of-urea-and-paddy-in-the-mandal-if-found-banda-news-knp5790183119","type":"story","status":"publish","title_hn":"चार हजार मीट्रिक टन यूरिया और मिले तो मंडल में लहलहाए धान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चार हजार मीट्रिक टन यूरिया और मिले तो मंडल में लहलहाए धान
विज्ञापन
Four thousand metric tons of urea and paddy in the mandal if found
- फोटो : BANDA
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में धान की फसल को खाद देने में किसानों को इस समय पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। वैसे तो पूरे बुंदेलखंड में यूरिया की भीषण किल्लत बनी हुई है, लेकिन चित्रकूटधाम मंडल में स्थित थोड़ी अलग तरह की है। यहां किसान को पूरी कीमत अदा करने के बाद भी मांग के मुताबिक यूरिया खाद नहीं मिल रही है।
चारों जिलों में अभी चार हजार मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया की दरकार है। इस वर्ष खरीफ की फसल के लिए 9,242 मीट्रिक टन लक्ष्य खाद की जरूरत है। इसमें अब तक सिर्फ 5,233 मीट्रिक टन खाद ही किसानों को मिल सकी है। चारों जिलों में 58 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई होनी है। मुख्यालय स्थित पीसीएफ, डीसीडीएफ और एग्रो के बिक्री केंद्रों में किसानों को कड़ी जद्दोजहद के बाद बमुश्किल एक या दो बोरी खाद मिल रही है।
सप्ताह भर दौड़ने के बाद दो बोरी मिली खाद
मंडी समिति स्थित पीसीएफ खाद बिक्री केंद्र में यूरिया लेने आए बिलबई (मौदहा) गांव के किसान पंचा ने बताया कि एक सप्ताह से यूरिया के लिए भटक रहे हैं। केंद्र में आज यूरिया आई है। उसे 10 बोरी की जरूरत थी, लेकिन दो बोरी ही दी जा रही है।
विज्ञापन
जरूरत दस की, मिलीं सिर्फ दो बोरी यूरिया
डीसीडीएफ खाद बिक्री केंद्र (बांदा) में खाद लेने आए फतपुरवा गांव के किसान महेश ने बताया कि दो एकड़ में धान की बेड़ लगाई है। कम से कम 10 बोरी खाद मिले तो फसल पनप सकती है, लेकिन दो बोरी से ज्यादा खाद नहीं मिल रही।
रकबा बढ़ा, खाद का लक्ष्य नहीं
चित्रकूटधाम मंडल में इस वर्ष धान की खेती में 5000 हेक्टेयर रकबा बढ़ाया गया है, लेकिन खाद का लक्ष्य नहीं बढ़ा। पिछले वर्ष मंडल में धान की रोपाई का लक्ष्य 53,132 हेक्टेयर था। इस वर्ष यह बढ़कर 58,466 हेक्टेयर कर दिया गया, लेकिन खरीफ में पिछले वर्ष यूरिया का लक्ष्य 9000 एमटी पूर्ववत है। इसे नहीं बढ़ाया गया। खाद संकट की एक यह भी वजह है।
विज्ञापन
चारों जिलों में अभी चार हजार मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया की दरकार है। इस वर्ष खरीफ की फसल के लिए 9,242 मीट्रिक टन लक्ष्य खाद की जरूरत है। इसमें अब तक सिर्फ 5,233 मीट्रिक टन खाद ही किसानों को मिल सकी है। चारों जिलों में 58 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई होनी है। मुख्यालय स्थित पीसीएफ, डीसीडीएफ और एग्रो के बिक्री केंद्रों में किसानों को कड़ी जद्दोजहद के बाद बमुश्किल एक या दो बोरी खाद मिल रही है।
विज्ञापन
सप्ताह भर दौड़ने के बाद दो बोरी मिली खाद
मंडी समिति स्थित पीसीएफ खाद बिक्री केंद्र में यूरिया लेने आए बिलबई (मौदहा) गांव के किसान पंचा ने बताया कि एक सप्ताह से यूरिया के लिए भटक रहे हैं। केंद्र में आज यूरिया आई है। उसे 10 बोरी की जरूरत थी, लेकिन दो बोरी ही दी जा रही है।
विज्ञापन
जरूरत दस की, मिलीं सिर्फ दो बोरी यूरिया
डीसीडीएफ खाद बिक्री केंद्र (बांदा) में खाद लेने आए फतपुरवा गांव के किसान महेश ने बताया कि दो एकड़ में धान की बेड़ लगाई है। कम से कम 10 बोरी खाद मिले तो फसल पनप सकती है, लेकिन दो बोरी से ज्यादा खाद नहीं मिल रही।
रकबा बढ़ा, खाद का लक्ष्य नहीं
चित्रकूटधाम मंडल में इस वर्ष धान की खेती में 5000 हेक्टेयर रकबा बढ़ाया गया है, लेकिन खाद का लक्ष्य नहीं बढ़ा। पिछले वर्ष मंडल में धान की रोपाई का लक्ष्य 53,132 हेक्टेयर था। इस वर्ष यह बढ़कर 58,466 हेक्टेयर कर दिया गया, लेकिन खरीफ में पिछले वर्ष यूरिया का लक्ष्य 9000 एमटी पूर्ववत है। इसे नहीं बढ़ाया गया। खाद संकट की एक यह भी वजह है।

Four thousand metric tons of urea and paddy in the mandal if found- फोटो : BANDA