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चार विशेष ट्रेनें और लाईं महानगरों से 4226 श्रमिक
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रूपा देवी।
- फोटो : BANDA
बांदा। रविवार को चार विशेष श्रमिक ट्रेनों में 4226 प्रवासी मजदूर और बांदा आए। इनमें बुंदेलखंड के सातों जिलों के 1852 मजदूर थे। इनके अलावा प्रदेश के 54 अन्य जिले के श्रमिक भी ट्रेन से उतरे। उन्हें परिवहन निगम की बसों से उनके पैतृक गांव/जनपद भेजा गया है। अब तक जिले में 12 विशेष श्रमिक ट्रेनें आ चुकी हैं। इनमें 14 हजार से ज्यादा प्रवासी मजदूर और उनके परिवार यहां पहुंचे हैं।
रविवार को पहली विशेष श्रमिक ट्रेन अहमदाबाद (गुजरात) से सुबह 5.15 बजे बांदा आई। इसमें 1726 श्रमिक यात्री आए। इनमें मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, नेपाल और उत्तराखंड के भी श्रमिक शामिल थे। दूसरी ट्रेन भी अहमदाबाद से दोपहर करीब डेढ़ बजे यहां प्लेटफार्म पर आई। इसमें 22 जिलों के 685 मजदूर थे। तीसरी ट्रेन दोपहर 2 बजे भीलवाड़ा से आई। इसमें सिर्फ बांदा जिले के 132 मजदूर यहां उतरे। ट्रेन अन्य मजदूरों को लेकर चित्रकूट की तरफ रवाना हो गई। चौथी ट्रेन शाम सवा 4 बजे सूरत से आई। इसमें 1683 श्रमिक आए।
ट्रेनों के आने से पहले ही प्लेटफार्म पर काफी संख्या में पुलिस बल और प्रशासन और पुलिस के अफसर तैनात थे। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए श्रमिकों को ट्रेन से उतारकर रेलवे स्टेशन के बाहर खड़ी परिवहन निगम की 50 से ज्यादा बसों में उनके पैतृक जनपद/गांव रवाना किया गया। इन सभी की थर्मल स्क्रीनिंग वहीं होगी।
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बच्चों के गोलक की पूंजी से हुआ खाने का जुगाड़
सूरत से लौटी रूपा बबेरू के चरका गांव की है। ट्रेन से उतरने के बाद चेहरे पर थकान, लेकिन घर आने की खुशी थी। रूपा ने लॉकडाउन के बाद पैदा हुई मुश्किलें बयां कीं। बताया कि पति भट्ठे पर ईंट पथाई करता था। लॉकडाउन में काम बंद हो गया। जो पूंजी थी वह खत्म हो गई। खाने-पीने के लाले पड़ गए। रूपा ने बताया कि उसके मासूम दो बच्चों ने कुछ पैसे अपनी गोलक में जमा किए थे। मिट्टी के इस गोलक को फोड़कर उसमें जो पूंजी निकली उससे कुछ खाने-पीने का बंदोबस्त किया और ट्रेन से वापसी के लिए रवाना हुई।
दीपावली में खरीदा चांदी का सिक्का आया काम
गुजरात से लौटे बबेरू क्षेत्र के मझीवां गांव निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि वह भीलवाड़ा में अपने साथियों के साथ काम धंधे में गया था। संयोग से वह अपने साथ वह चांदी का सिक्का भी ले गया था जो उसने पिछले साल दीपावली पर खरीदा था। लॉकडाउन में काम बंद होने के साथ ही पूंजी भी खत्म हो गई। तब दीपावली के मुहूर्त में खरीदा गया सिक्का काम आया। सिक्के को बेचकर कई दिन का राशन जुटाया और इसी बीच वापसी की ट्रेन मिल गई, जिससे किसी तरह वह आ गया। उसने गृह जनपद पहुंचने पर खुशी जताई।
अहमदाबाद से विशेष ट्रेन में आए इन जिलों के मजदूर
कानपुर- 32, इटावा- 06, हरदोई- 01, उन्नाव- 01, औरैया- 03, बलिया- 236, जौनपुर- 69, फतेहपुर- 13, वाराणसी- 06, रायबरेली- 26, गोरखपुर- 16, सुल्तानपुर- 35, कुशीनगर- 06, मुरादाबाद- 01, देवरिया- 23, मिर्जापुर- 10, भदोही- 51, कौशांबी- 05, संत कबीर नगर- 06, चंदौली- 22, आजमगढ़- 27, अमेठी- 35, मऊ- 33, महाराजगंज- 02, गाजीपुर- 28, बाराबंकी- 12, इलाहाबाद- 28, प्रतापगढ़- 18, फैजाबाद- 16, बरेली- 01, हाथरस- 02, फिरोजाबाद- 10, फर्रुखाबाद- 03, लखीमपुर खीरी-03, आगरा-03, बदायूं- 01, बस्ती- 02, सिद्धार्थनगर- 03, बलरामपुर- 06। इनके अलावा मध्य प्रदेश के 18, बिहार के 713, झारखंड- 12, नेपाल- 4 और उत्तराखंड के 2 श्रमिक भी विशेष ट्रेन से आए।
सूरत से बांदा लाए गए विभिन्न जिलों के मजदूर
फतेहपुर- 151, कानपुर- 54, प्रयागराज- 14, सुल्तानपुर- 03, लखनऊ- 01, कौशांबी- 19, इटावा- 03, बाराबंकी- 04, रायबरेली- 05, जौनपुर- 01, बस्ती- 04, आगरा- 02, महाराजगंज- 01
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रविवार को पहली विशेष श्रमिक ट्रेन अहमदाबाद (गुजरात) से सुबह 5.15 बजे बांदा आई। इसमें 1726 श्रमिक यात्री आए। इनमें मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, नेपाल और उत्तराखंड के भी श्रमिक शामिल थे। दूसरी ट्रेन भी अहमदाबाद से दोपहर करीब डेढ़ बजे यहां प्लेटफार्म पर आई। इसमें 22 जिलों के 685 मजदूर थे। तीसरी ट्रेन दोपहर 2 बजे भीलवाड़ा से आई। इसमें सिर्फ बांदा जिले के 132 मजदूर यहां उतरे। ट्रेन अन्य मजदूरों को लेकर चित्रकूट की तरफ रवाना हो गई। चौथी ट्रेन शाम सवा 4 बजे सूरत से आई। इसमें 1683 श्रमिक आए।
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ट्रेनों के आने से पहले ही प्लेटफार्म पर काफी संख्या में पुलिस बल और प्रशासन और पुलिस के अफसर तैनात थे। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए श्रमिकों को ट्रेन से उतारकर रेलवे स्टेशन के बाहर खड़ी परिवहन निगम की 50 से ज्यादा बसों में उनके पैतृक जनपद/गांव रवाना किया गया। इन सभी की थर्मल स्क्रीनिंग वहीं होगी।
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बच्चों के गोलक की पूंजी से हुआ खाने का जुगाड़
सूरत से लौटी रूपा बबेरू के चरका गांव की है। ट्रेन से उतरने के बाद चेहरे पर थकान, लेकिन घर आने की खुशी थी। रूपा ने लॉकडाउन के बाद पैदा हुई मुश्किलें बयां कीं। बताया कि पति भट्ठे पर ईंट पथाई करता था। लॉकडाउन में काम बंद हो गया। जो पूंजी थी वह खत्म हो गई। खाने-पीने के लाले पड़ गए। रूपा ने बताया कि उसके मासूम दो बच्चों ने कुछ पैसे अपनी गोलक में जमा किए थे। मिट्टी के इस गोलक को फोड़कर उसमें जो पूंजी निकली उससे कुछ खाने-पीने का बंदोबस्त किया और ट्रेन से वापसी के लिए रवाना हुई।
दीपावली में खरीदा चांदी का सिक्का आया काम
गुजरात से लौटे बबेरू क्षेत्र के मझीवां गांव निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि वह भीलवाड़ा में अपने साथियों के साथ काम धंधे में गया था। संयोग से वह अपने साथ वह चांदी का सिक्का भी ले गया था जो उसने पिछले साल दीपावली पर खरीदा था। लॉकडाउन में काम बंद होने के साथ ही पूंजी भी खत्म हो गई। तब दीपावली के मुहूर्त में खरीदा गया सिक्का काम आया। सिक्के को बेचकर कई दिन का राशन जुटाया और इसी बीच वापसी की ट्रेन मिल गई, जिससे किसी तरह वह आ गया। उसने गृह जनपद पहुंचने पर खुशी जताई।
अहमदाबाद से विशेष ट्रेन में आए इन जिलों के मजदूर
कानपुर- 32, इटावा- 06, हरदोई- 01, उन्नाव- 01, औरैया- 03, बलिया- 236, जौनपुर- 69, फतेहपुर- 13, वाराणसी- 06, रायबरेली- 26, गोरखपुर- 16, सुल्तानपुर- 35, कुशीनगर- 06, मुरादाबाद- 01, देवरिया- 23, मिर्जापुर- 10, भदोही- 51, कौशांबी- 05, संत कबीर नगर- 06, चंदौली- 22, आजमगढ़- 27, अमेठी- 35, मऊ- 33, महाराजगंज- 02, गाजीपुर- 28, बाराबंकी- 12, इलाहाबाद- 28, प्रतापगढ़- 18, फैजाबाद- 16, बरेली- 01, हाथरस- 02, फिरोजाबाद- 10, फर्रुखाबाद- 03, लखीमपुर खीरी-03, आगरा-03, बदायूं- 01, बस्ती- 02, सिद्धार्थनगर- 03, बलरामपुर- 06। इनके अलावा मध्य प्रदेश के 18, बिहार के 713, झारखंड- 12, नेपाल- 4 और उत्तराखंड के 2 श्रमिक भी विशेष ट्रेन से आए।
सूरत से बांदा लाए गए विभिन्न जिलों के मजदूर
फतेहपुर- 151, कानपुर- 54, प्रयागराज- 14, सुल्तानपुर- 03, लखनऊ- 01, कौशांबी- 19, इटावा- 03, बाराबंकी- 04, रायबरेली- 05, जौनपुर- 01, बस्ती- 04, आगरा- 02, महाराजगंज- 01

प्रदीप कुमार।- फोटो : BANDA

बांदा में रोडवेज बसों पर सवार होते ट्रेन से आए प्रवासी मजदूर।- फोटो : BANDA

बांदा रेलवे स्टेशन में बस का इंतजार करते प्रवासी मजदूर।- फोटो : BANDA

सामान का बोझ लादे बसों की ओर जाते मजदूर।- फोटो : BANDA