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खौफ : काफिला चला गया, तब कारवां हुआ रवाना
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बांदा। भले ही जिंदगी के आखिरी दिनों में मुख्तार तन्हा था, लेकिन कभी वह दौर भी था कि मुख्तार के काफिले में समर्थकों की गाड़ियों की लंबी लाइन रहती थी। जेल में भी मिलने वालों का तांता लगा रहता था।
माफिया मुख्तार अंसारी वर्ष 2016 में जब बांदा जेल आया तो उसके चाहने वालों से जेल परिसर खचाखच भर गया। काफिले के साथ दो दर्जन से अधिक समर्थकों के दो दर्जन गाडिय़ा आई। इसी प्रकार वर्ष 2017 में मुख्तार प्रोटक्शन वारंट पर पंजाब की रोपड जेल गया समर्थकों का लंबा काफिला होने से दो बार प्रशासन को समय में परिवर्तन करना पड़ा। इसके बाद भी बड़ी संख्या में समर्थक काफिले के पीछे-पीछे गए। अप्रैल 2021 को पुन: वापसी के दौरान भी समथकों का हुजूम यहां आया।
इधर, प्रतिदिन जेल में मुख्तार से मिलने वालों का तांता लगा रहता था। बांदा-चित्रकूट में भी उसके चाहने वालों की फेहरिश्त है। लेकिन पुलिस के खौफ से वह मुख्तार के मेडिकल कालेज में भर्ती होने से दिवंगत होने तक सभी पास नहीं आए। काफिला गुजरने के बाद सीधे गाजीपुर पहुंचकर मुख्तार के प्रति अपनी आस्था प्रदर्शित की। समर्थकों को भय था कि कही पुलिस की हेड लिस्ट में मुख्तार के समर्थक के रूप में उसका नाम न दर्ज हो जाए।
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माफिया मुख्तार अंसारी वर्ष 2016 में जब बांदा जेल आया तो उसके चाहने वालों से जेल परिसर खचाखच भर गया। काफिले के साथ दो दर्जन से अधिक समर्थकों के दो दर्जन गाडिय़ा आई। इसी प्रकार वर्ष 2017 में मुख्तार प्रोटक्शन वारंट पर पंजाब की रोपड जेल गया समर्थकों का लंबा काफिला होने से दो बार प्रशासन को समय में परिवर्तन करना पड़ा। इसके बाद भी बड़ी संख्या में समर्थक काफिले के पीछे-पीछे गए। अप्रैल 2021 को पुन: वापसी के दौरान भी समथकों का हुजूम यहां आया।
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इधर, प्रतिदिन जेल में मुख्तार से मिलने वालों का तांता लगा रहता था। बांदा-चित्रकूट में भी उसके चाहने वालों की फेहरिश्त है। लेकिन पुलिस के खौफ से वह मुख्तार के मेडिकल कालेज में भर्ती होने से दिवंगत होने तक सभी पास नहीं आए। काफिला गुजरने के बाद सीधे गाजीपुर पहुंचकर मुख्तार के प्रति अपनी आस्था प्रदर्शित की। समर्थकों को भय था कि कही पुलिस की हेड लिस्ट में मुख्तार के समर्थक के रूप में उसका नाम न दर्ज हो जाए।
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