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Banda News: बेटी - बहन का हक अदा किए बगैर रोजा, नमाज़ बेकार

Fri, 15 Mar 2024 11:56 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 15 Mar 2024 11:56 PM IST
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Fasting and namaz without paying the rights of daughter and sister are useless
बांदा। रोजा, नमाज या दीगर इबादतें तभी कुबूल होती हैं, जब वारिसों को उनका पूरा हक अदा किया जाए। खासकर बेटियों-बहनों को जायदाद में उनका हक व हिस्सा देना जरूरी है। यह बात रमजान माह के पहले जुमा पर नमाज के पूर्व नवाबी जामा मस्जिद में मदरसा जामिया, हथौरा के मौलाना हाफिज कारी हबीब अहमद ने कही।
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मौलाना ने कहा कि हर अमल का हिसाब देना होगा। जिस्म के एक-एक अजा (अंग) खुद अमल की गवाही देंगे। कहा कि बेटी या बहन की परवरिश और शादी-ब्याह कर देना ही काफी नहीं है। उसे उसका पूरा हक देने से ही दीगर नेक अमल भी कुबूल किए जाएंगे। जायदाद में शरीयत के मुताबिक बेटियों - बहनों का हिस्सा न देकर हड़प लेना हराम है।
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पहले जुमा पर शहर की जामा मस्जिद समेत शेख़ सरवर की मस्जिद, मरकज मस्जिद, हाथी खाना रब्बानिया मस्जिद, जिन्नातों वाली मस्जिद आदि में भी बड़ी तादाद में नमाज़ी पहुंचे। सीएए के मद्दे नजर जुमा के मौके पर मस्जिदों में कड़ी चौकसी रही। नवाबी जामा मस्जिद में क्षेत्राधिकारी नगर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस और बीएसएफ जवान तैनात रहे।
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