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मुआवजे की आस में किसानों ने पकड़ी संघर्ष की राह
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 16 Mar 2015 11:51 PM IST
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रूठे मौसम का कहर सोमवार को फिर किसानों पर टूटा। तड़के तड़तड़ाहट के साथ बरसे ओलों ने पूरे जिले में फसल तबाही की नई इबारत लिख दी। पिछले एक पखवारे में बारिश और ओला से बची-खुची फसल भी नेस्तनाबूद हो गई। किसानों में हाहाकार मचा है।
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पूरा दिन किसान आंदोलन में बीता। कई स्थानों पर किसानों ने जाम लगा दिया। अफसरों का घेराव किया। कलेक्ट्रेट में दिन भर हाथों में बर्बाद फसल के नमूने लिए किसानों के प्रदर्शन होते रहे।
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फरवरी के आखिरी दिन और मार्च के पहले हफ्ते में ओला और बारिश से बांदा जिले में सरकारी आंकलन के मुताबिक 1.58 अरब रुपये की फसलों को नुकसान पहुंचा। कुदरत की इस मार से किसान कराह ही रहा था कि सोमवार को तड़के फिर आसमान से आफत बरस पड़ी।
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पूरे जिले में लगभग 5 मिनट तक जमकर ओले गिरे। कुछ स्थानों पर ओलों का वजन 50 ग्राम तक बताया गया। बची-खुची फसल भी मिट्टी में मिल गई। तमाम खेतों में बर्फ जम गई और बारिश का पानी भर गया। तबाही का यह नजारा देखते ही किसानों का धैर्य जवाब दे गया।
सदर तहसील के गुरेह गांव में सैकड़ों किसान सड़कों पर आ गए और मुख्य सड़क पर धरना देकर जाम लगा दिया। इसी बीच वहां से गुजर रही प्राइवेट बस में उत्तेजित किसानों ने तोड़फोड़ कर दी। लगभग एक घंटे तक नायब तहसीलदार गिरिवर सिंह किसानों को समझाते रहे।
इस बीच उन्होंने किसानों को भरपूर मदद का भरोसा दिलाकर जाम खत्म कराया। आंदोलन की अगुवाई ग्राम प्रधान अवधेश सिंह ने की। उधर, जौरही गांव में भी किसानों ने तीन घंटे तक मुख्यालय को आने वाली मुख्य सड़क पर जाम लगाया। यहां भी नायब तहसील ने समझा-बुझाकर जाम खत्म कराया।
कलेक्ट्रेट में किसानों के जत्थे पूरा दिन प्रदर्शन करके ज्ञापन देते रहे। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। किसानों के हाथ में बर्बाद हुई फसलों के नमूने थे। मंडलायुक्त कार्यालय में बैठक में गए डीएम सुरेश कुमार को तमाम गांवों के किसानों ने घेर लिया।
डीएम ने उन्हें सर्वे के बाद मुआवजे का भरोसा दिया। परसौड़ा, पड़ेरी, असकरन, बछेउरा, अमरइया पुरवा, गोखरही, अतरहट, लोहरा, बिजुरी, पिपरी (पैलानी तहसील), माधवपुर, पड़ुई, भसरौड़, तिंदवारा, रागौल (नरैनी तहसील), सदर तहसील के बड़ोखर खुर्द, बजरंग पुरवा और सोहाना, तिंदवारी तहसील के महुई गांवों के किसानों ने फसल मुआवजे के लिए ज्ञापन दिए।