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काले हिरनों का पलायन
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Thu, 15 Mar 2018 11:35 PM IST
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मौसम की मार से जीव-जंतु भी बुंदेलखंड से पलायन कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण यहां पाए जाने वाले दुर्लभ प्रजाति के काले हिरन हैं। यहां इनकी संख्या घट रही है। जून 2016 में हुई गणना में जहां इनकी संख्या 1549 थी, वहीं ताजी गणना में इनकी संख्या 1368 रह गई है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जंगलों में चारा-पानी का संकट होने से जीव-जंतु हरियाली वाले इलाकों में पलायन कर रहे हैं।
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पिछले कुछ साल से बुंदेलखंड में लगातार सूखा या कम बारिश से खेतों के साथ जंगलों के हालात भी बिगड़ रहे हैं। हरियाली खत्म हो रही है। नदी, तालाब, जलाशय, पोखर आदि सूख रहे हैं। जंगल भी सिमट रहे हैं। ऐसे में जंगली जीव-जंतुओं के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है। बांदा जिले की सीमा से जुड़े फतेहपुर और हमीरपुर जिलों के सरहदी इलाकों में बड़ी संख्या में काले और अन्य प्रजाति के हिरन पाये जाते हैं। पहले इनकी संख्या लगातार बढ़ रही थी, लेकिन अब घट रही है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017-18 में जिले में 1368 काले हिरन पाए गए हैं, जबकि वर्ष 2015-16 की गणना में इनकी संख्या 1549 थी, यानी दो साल में इनकी संख्या में 181 कम हो गई है।
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बांदा जिले में हिरनों की सर्वाधिक संख्या तिंदवारी क्षेत्र में है। माना जा रहा है कि सूखे की मार से चारा पानी न मिलने पर परेशान हिरन सीमा से जुड़े फतेहपुर के जंगलों में पलायन कर रहे हैं। वहां पानी-चारे की इतनी समस्या नहीं है। खेत पूरे साल हरे-भरे रहते हैं और पानी भी उपलब्ध है।
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बांदा जिले के गांवों में हिरनों की संख्या
बांदा। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले के लामा गांव में 132, पचनेही में 140, करहिया में 70, जमुनी पुरवा में 32, बरगहनी में 50, गोहनवा में 35, कमनौड़ी में 40, सेमरा में 62, कुरसेजा में 42, महुई में 52, गोखरही में 50, भुजौली में 40, ब्योंजा में 40, बड़ेहा में 28, मिरगहनी में 68, अमरइया में 25, गजनी में 30, भिड़ौरा में 33, ललौली में 45, महेदू में 53, सिंधौली में 33, छिरछुटा में 42, बिछवाही में 70, अतरहट में 30, बछेउरा में 32, परसौंड़ा में 40, पिपरी में 22 असैा बरेठी असकान गांव में 30 काले हिरन पाये गए हैं।
जंगल घटना भी पलायन का कारण
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) डॉ. अरविंद कुमार सिंह स्वीकारते हैं कि हिरनों और अन्य दुर्लभ जीव-जंतुओं में आ रही कमी का मुख्य कारण पलायन है। चारा-पानी की तलाश में भटक कर जीव-जंतु यहां से दूर चले जा रहे हैं। कहा कि जंगल क्षेत्र घट रहा है। प्राकृतवार (प्राकृतिक संसाधन) कम होने से वन्य जीव और मनुष्य आमने-सामने आ रहे हैं। इस कारण भी जीव-जंतुओं का पलायन हो रहा है।