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Banda News: अंग्रेजी कफ सिरप का व्यवसाय 95 फीसदी सिमटा, आयुर्वेदिक की बढ़ी मांग
Fri, 16 Jan 2026 01:00 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 16 Jan 2026 01:00 AM IST
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फोटो- 13 संतोष कुमार गुप्ता शातनु, जिलाध्यक्ष, केमस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, बांदा।
बांदा। कोडीनयुक्त कफ सिरप के नशे के तौर पर इस्तेमाल और इसके बढ़ते दुरुपयोग के कारण अंग्रेजी कफ सिरप के बाजार में भारी गिरावट देखी जा रही है। इस समस्या के चलते अब जिले के अधिकांश मेडिकल स्टोर से कोडीनयुक्त कफ सिरप पूरी तरह से गायब हो गए हैं। साथ ही, जो अन्य कफ सिरप उपलब्ध हैं, उनकी बिक्री में भी खासी कमी आई है। पूर्व में जहां जिले में कफ सिरप का मासिक व्यवसाय 25 से 30 लाख रुपये तक होता था, वहीं अब यह घटकर महज डेढ़ से दो लाख रुपये तक सीमित रह गया है।
लोगों का रुझान अब आयुर्वेदिक कफ सिरप की ओर बढ़ा है। मेडिकल स्टोर संचालकों का दावा है कि आयुर्वेदिक कफ सिरप के अब तक कोई दुष्परिणाम सामने नहीं आए हैं। इस कारण खांसी और जुकाम के इलाज के लिए लोग आयुर्वेदिक विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्रशासनिक सख्ती और लोगों में बढ़ती जागरूकता के चलते डॉक्टर भी अब अपने पर्चे पर खांसी के लिए अंग्रेजी कफ सिरप लिखने में सावधानी बरत रहे हैं। कई डॉक्टर या तो केवल प्रमाणिक कफ सिरप लिख रहे हैं या फिर लिखने से परहेज कर रहे हैं।
बांदा में हाल ही में ड्रग इंस्पेक्टर ने गूलर नाका स्थित एक मेडिकल स्टोर पर छापा मारकर भारी मात्रा में कोडीनयुक्त कफ सिरप जब्त किए थे। जानकारी न दे पाने पर मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी। इस घटना के बाद और शासन द्वारा कोडीन युक्त कफ सिरप की बिक्री के संबंध में जारी की गई नई नियमावली के चलते, अधिकांश मेडिकल स्टोर संचालकों ने ऐसे सिरप का स्टॉक वापस भेज दिया है या उन्हें बेचना बंद कर दिया है।
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बाजार में उपलब्ध आयुर्वेदिक कफ सिरप
वर्तमान में बाजार में खांसी और जुकाम के लिए कई आयुर्वेदिक कफ सिरप उपलब्ध हैं, जिनमें दिव्य श्वासारि प्रवाही, हनीटस, हूकफ और जेडएक्स प्रमुख हैं। लोग इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।
नियमावली और रिकॉर्ड रखने की अनिवार्यता
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, बांदा के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार ओमर ने बताया कि मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे कफ सिरप बेचते समय मरीज का नाम, डॉक्टर का नाम, आधार कार्ड नंबर और बिक्री की तारीख का रिकॉर्ड अपने पास रखें। जांच के दौरान यह रिकॉर्ड प्रस्तुत करने होते हैं। इस नियम के कारण भी मेडिकल स्टोर संचालक अब ऐसे कफ सिरप रखने से कतरा रहे हैं, जिनका दुरुपयोग होने की आशंका हो।
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जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में केवल शासन द्वारा प्रमाणित कफ सिरप ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं। डॉक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे कोडीन युक्त कफ सिरप न लिखें, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. विजेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ)
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लोगों का रुझान अब आयुर्वेदिक कफ सिरप की ओर बढ़ा है। मेडिकल स्टोर संचालकों का दावा है कि आयुर्वेदिक कफ सिरप के अब तक कोई दुष्परिणाम सामने नहीं आए हैं। इस कारण खांसी और जुकाम के इलाज के लिए लोग आयुर्वेदिक विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्रशासनिक सख्ती और लोगों में बढ़ती जागरूकता के चलते डॉक्टर भी अब अपने पर्चे पर खांसी के लिए अंग्रेजी कफ सिरप लिखने में सावधानी बरत रहे हैं। कई डॉक्टर या तो केवल प्रमाणिक कफ सिरप लिख रहे हैं या फिर लिखने से परहेज कर रहे हैं।
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बांदा में हाल ही में ड्रग इंस्पेक्टर ने गूलर नाका स्थित एक मेडिकल स्टोर पर छापा मारकर भारी मात्रा में कोडीनयुक्त कफ सिरप जब्त किए थे। जानकारी न दे पाने पर मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी। इस घटना के बाद और शासन द्वारा कोडीन युक्त कफ सिरप की बिक्री के संबंध में जारी की गई नई नियमावली के चलते, अधिकांश मेडिकल स्टोर संचालकों ने ऐसे सिरप का स्टॉक वापस भेज दिया है या उन्हें बेचना बंद कर दिया है।
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बाजार में उपलब्ध आयुर्वेदिक कफ सिरप
वर्तमान में बाजार में खांसी और जुकाम के लिए कई आयुर्वेदिक कफ सिरप उपलब्ध हैं, जिनमें दिव्य श्वासारि प्रवाही, हनीटस, हूकफ और जेडएक्स प्रमुख हैं। लोग इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।
नियमावली और रिकॉर्ड रखने की अनिवार्यता
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, बांदा के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार ओमर ने बताया कि मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे कफ सिरप बेचते समय मरीज का नाम, डॉक्टर का नाम, आधार कार्ड नंबर और बिक्री की तारीख का रिकॉर्ड अपने पास रखें। जांच के दौरान यह रिकॉर्ड प्रस्तुत करने होते हैं। इस नियम के कारण भी मेडिकल स्टोर संचालक अब ऐसे कफ सिरप रखने से कतरा रहे हैं, जिनका दुरुपयोग होने की आशंका हो।
जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में केवल शासन द्वारा प्रमाणित कफ सिरप ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं। डॉक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे कोडीन युक्त कफ सिरप न लिखें, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. विजेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ)