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ड्रोन की उड़ान...पार्क की निगहबान
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Drone flight...Park's watch
- फोटो : BANDA
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बांदा। बुंदेलखंड के एकलौते बाघ अभ्यारण्य पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क (पीटीआर) में बाघ और अन्य जीव-जंतुओं की निगहबानी अब ड्रोन यानी मानव रहित यान कर रहा है। लगभग 1600 वर्ग किलोमीटर में फैले इस पार्क की निगरानी के लिए इस आधुनिक तकनीक की शुरुआत पिछले माह से की गई है।
पार्क प्रबंधन ने इसके लिए ड्रोन दस्ता भी गठित कर दिया है। पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क न सिर्फ पूरे देश, बल्कि विदेशों में भी जाना जाता है। यहां का मुख्य आकर्षण का केंद्र बाघ हैं। इनके अलावा अन्य जीव-जंतु भी हैं।
पूरे साल देश-विदेश के पर्यटक यहां आते हैं। लंबे-चौड़े क्षेत्रफल में फैले पार्क के अंदर पहाड़, नदी और जंगल भी हैं। इस भौगोलिक परिस्थिति में पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन को पूरे पार्क में नजर रखना काफी दुश्वारी भरा था, लेकिन अब ड्रोन के दम पर यह दुश्वारी आसानी में बदल गई है।
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ड्रोन सफलता पूर्वक उड़ान भरकर पार्क की निगरानी कर रहे हैं। पन्ना टाइगर पार्क में ड्रोन से नजर रखने के लिए कई वर्ष पूर्व केंद्र सरकार ने मंजूरी दी थी, लेकिन अमल अब पिछले माह शुरू हुआ है।
रिजर्व पार्क प्रशासन ने ड्रोन संचालन के लिए ड्रोन स्क्वॉड गठित किया है। कहा जा रहा कि वन्य जीव संरक्षण के लिए ड्रोन अत्याधुुनिक तकनीक है। ड्रोन दस्ते में एक आपरेटर और एक सहायक शामिल किया गया है।
इस दस्ते द्वारा हर माह ड्रोन संचालन और उपयोग के बारे में दिशा-निर्देश के साथ कार्यक्रम जारी किया जाता है। ड्रोन का वजन करीब दो किलो है। लंबाई दो मीटर और चौड़ाई एक मीटर बताई गई है।
यह ड्रोन 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ान भरता है। इसमें लगे कैमरे पार्क के चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहे हैं। देहरादून की वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया इसके क्रियान्वयन में सहयोग दे रही है।
तस्वीर के साथ डेटा भी दे रहा ड्रोन
ड्रोन की खूबी यह है कि यह पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क का बड़ी मात्रा में ऐसा डेटा संग्रह कराने में मददगार साबित हो रहा है जो संग्रहित, संसाधित और विश्लेषण में जरूरी होते हैं।
भविष्य में वन्य जीव प्रबंधन और ईको टूरिज्म क्षेत्र में भी ड्रोन के इस्तेमाल की योजना बनाने की तैयारी है। इससे अवैध गतिविधियों में भी बहुत कम समय में नियंत्रण हो रहा है।
निगरानी के साथ रिकार्डिंग भी होगी
पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के अधिकारियों के मुताबिक, ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन से जंगल में होने वाली हर गतिविधि देखी जा सकेगी और इसकी रिकार्डिंग भी होगी। जंगल में अवैध कार्य करने वाले लोगों को पकड़ना और सजा दिलाना आसान हो जाएगा।
दो दिन संचालन, रिमोट से कंट्रोल
ड्रोन का संचालन पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में हर माह दो दिन होगा। इससे मिलने वाली तस्वीरों आदि के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जाती है। इससे मिलने वाली जानकारी से बाघों के संरक्षण की योजना तैयार की जा रही है। ड्रोन का संचालन रिमोट से हो रहा है।
हर साल बढ़ सकते हैं 16 शावक
पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में मौजूदा समय में लगभग 64 बाघ बताए गए हैं। हाल ही में एक बाघिन ने चार शावकों को जन्म दिया है। इस बाबत पार्क प्रशासन का अनुमान है कि हर साल करीब 16 शावक बढ़ेंगे। जल्द ही 100 का आंकड़ा पूरा हो जाएगा। इस वर्ष सात बाघिन 18 शावकों को जन्म दे चुकी हैं।
यूनेस्को के बायो स्फेयर रिजर्व में शामिल
बुंदेलखंड के मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क यूनेस्को के बायो स्फेयर रिजर्व के रूप में घोषित है। कुछ दिन पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट करते हुए पार्क प्रबंधन को राय दी थी। बताया गया कि इस समय दुनिया के 129 देशों में 714 बायो स्फेयर रिजर्व हैं।
दस्यु ठोकिया की शिकारगाह था पन्ना पार्क
एक जमाना था जब यूपी-एमपी में फैले बुंदेलखंड के दुर्दांत दस्यु सरगना ठोकिया की निगाहें पन्ना टाइगर रिजर्व में थीं। ठोकिया गिरोह बांदा के पाठा क्षेत्र से लेकर मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क तक धावा बोलता था।
यह गिरोह पार्क में बाघों का शिकार करता था। वर्ष 2007 में यहां बाघ खात्मे की कगार में पहुंच गए थे। ठोकिया वर्ष 2011 में मार दिया गया था।
दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों का भी बसेरा
पन्ना टाइगर रिजर्व गिद्धों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां कई दुर्लभ प्रजातियों के गिद्धों का बसेरा है। कुछ दिन पहले वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया, देहरादून के सहयोग से 25 गिद्धों की पीठ पर रेडियो टैगिंग डिवाइस बांधी गई थी। फरवरी माह में हुई गणना में यहां लगभग 722 गिद्ध पाए जाना बताया गया था।
कोरोना गाइडलाइन का पार्क में पालन
कोरोना महामारी के दौरान पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में भी लॉकडाउन लागू कर दिया गया था। पहली जून से यह पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था। अब यह कुछ प्रतिबंधों के साथ खोल दिया गया है।
पन्ना टाइगर पार्क के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि पर्यटकों को कोरोना गाइड लाइन का पालन करने पर ही पार्क में प्रवेश दिया जा रहा है। उन्हें थर्मल स्क्रीनिंग के साथ जिप्सी चालकों और पर्यटकों को मास्क, सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन कराया गया है। वाहन भी पूरी तरह सैनिटाइज किए जा रहे हैं।
मानव-पशु संघर्ष से होगा बचाव
ड्रोन स्क्वॉड से वन्य जीव की खोज करके उनके बचाव और जंगल की आग आदि का स्त्रोत पता चलता है। साथ ही आसपास आबाद गांवों के लोगों पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के जंगल में आ जाने से संभावित मानव-पशु संघर्ष को टालने में मदद और वन्य जीव संरक्षण कानूनों का पालन कराने में मदद मिल रही है।
-ऋषभ जैन, जनसंपर्क अधिकारी, पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क
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पार्क प्रबंधन ने इसके लिए ड्रोन दस्ता भी गठित कर दिया है। पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क न सिर्फ पूरे देश, बल्कि विदेशों में भी जाना जाता है। यहां का मुख्य आकर्षण का केंद्र बाघ हैं। इनके अलावा अन्य जीव-जंतु भी हैं।
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पूरे साल देश-विदेश के पर्यटक यहां आते हैं। लंबे-चौड़े क्षेत्रफल में फैले पार्क के अंदर पहाड़, नदी और जंगल भी हैं। इस भौगोलिक परिस्थिति में पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन को पूरे पार्क में नजर रखना काफी दुश्वारी भरा था, लेकिन अब ड्रोन के दम पर यह दुश्वारी आसानी में बदल गई है।
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ड्रोन सफलता पूर्वक उड़ान भरकर पार्क की निगरानी कर रहे हैं। पन्ना टाइगर पार्क में ड्रोन से नजर रखने के लिए कई वर्ष पूर्व केंद्र सरकार ने मंजूरी दी थी, लेकिन अमल अब पिछले माह शुरू हुआ है।
रिजर्व पार्क प्रशासन ने ड्रोन संचालन के लिए ड्रोन स्क्वॉड गठित किया है। कहा जा रहा कि वन्य जीव संरक्षण के लिए ड्रोन अत्याधुुनिक तकनीक है। ड्रोन दस्ते में एक आपरेटर और एक सहायक शामिल किया गया है।
इस दस्ते द्वारा हर माह ड्रोन संचालन और उपयोग के बारे में दिशा-निर्देश के साथ कार्यक्रम जारी किया जाता है। ड्रोन का वजन करीब दो किलो है। लंबाई दो मीटर और चौड़ाई एक मीटर बताई गई है।
यह ड्रोन 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ान भरता है। इसमें लगे कैमरे पार्क के चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहे हैं। देहरादून की वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया इसके क्रियान्वयन में सहयोग दे रही है।
तस्वीर के साथ डेटा भी दे रहा ड्रोन
ड्रोन की खूबी यह है कि यह पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क का बड़ी मात्रा में ऐसा डेटा संग्रह कराने में मददगार साबित हो रहा है जो संग्रहित, संसाधित और विश्लेषण में जरूरी होते हैं।
भविष्य में वन्य जीव प्रबंधन और ईको टूरिज्म क्षेत्र में भी ड्रोन के इस्तेमाल की योजना बनाने की तैयारी है। इससे अवैध गतिविधियों में भी बहुत कम समय में नियंत्रण हो रहा है।
निगरानी के साथ रिकार्डिंग भी होगी
पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के अधिकारियों के मुताबिक, ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन से जंगल में होने वाली हर गतिविधि देखी जा सकेगी और इसकी रिकार्डिंग भी होगी। जंगल में अवैध कार्य करने वाले लोगों को पकड़ना और सजा दिलाना आसान हो जाएगा।
दो दिन संचालन, रिमोट से कंट्रोल
ड्रोन का संचालन पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में हर माह दो दिन होगा। इससे मिलने वाली तस्वीरों आदि के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जाती है। इससे मिलने वाली जानकारी से बाघों के संरक्षण की योजना तैयार की जा रही है। ड्रोन का संचालन रिमोट से हो रहा है।
हर साल बढ़ सकते हैं 16 शावक
पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में मौजूदा समय में लगभग 64 बाघ बताए गए हैं। हाल ही में एक बाघिन ने चार शावकों को जन्म दिया है। इस बाबत पार्क प्रशासन का अनुमान है कि हर साल करीब 16 शावक बढ़ेंगे। जल्द ही 100 का आंकड़ा पूरा हो जाएगा। इस वर्ष सात बाघिन 18 शावकों को जन्म दे चुकी हैं।
यूनेस्को के बायो स्फेयर रिजर्व में शामिल
बुंदेलखंड के मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क यूनेस्को के बायो स्फेयर रिजर्व के रूप में घोषित है। कुछ दिन पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट करते हुए पार्क प्रबंधन को राय दी थी। बताया गया कि इस समय दुनिया के 129 देशों में 714 बायो स्फेयर रिजर्व हैं।
दस्यु ठोकिया की शिकारगाह था पन्ना पार्क
एक जमाना था जब यूपी-एमपी में फैले बुंदेलखंड के दुर्दांत दस्यु सरगना ठोकिया की निगाहें पन्ना टाइगर रिजर्व में थीं। ठोकिया गिरोह बांदा के पाठा क्षेत्र से लेकर मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क तक धावा बोलता था।
यह गिरोह पार्क में बाघों का शिकार करता था। वर्ष 2007 में यहां बाघ खात्मे की कगार में पहुंच गए थे। ठोकिया वर्ष 2011 में मार दिया गया था।
दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों का भी बसेरा
पन्ना टाइगर रिजर्व गिद्धों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां कई दुर्लभ प्रजातियों के गिद्धों का बसेरा है। कुछ दिन पहले वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया, देहरादून के सहयोग से 25 गिद्धों की पीठ पर रेडियो टैगिंग डिवाइस बांधी गई थी। फरवरी माह में हुई गणना में यहां लगभग 722 गिद्ध पाए जाना बताया गया था।
कोरोना गाइडलाइन का पार्क में पालन
कोरोना महामारी के दौरान पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में भी लॉकडाउन लागू कर दिया गया था। पहली जून से यह पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था। अब यह कुछ प्रतिबंधों के साथ खोल दिया गया है।
पन्ना टाइगर पार्क के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि पर्यटकों को कोरोना गाइड लाइन का पालन करने पर ही पार्क में प्रवेश दिया जा रहा है। उन्हें थर्मल स्क्रीनिंग के साथ जिप्सी चालकों और पर्यटकों को मास्क, सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन कराया गया है। वाहन भी पूरी तरह सैनिटाइज किए जा रहे हैं।
मानव-पशु संघर्ष से होगा बचाव
ड्रोन स्क्वॉड से वन्य जीव की खोज करके उनके बचाव और जंगल की आग आदि का स्त्रोत पता चलता है। साथ ही आसपास आबाद गांवों के लोगों पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के जंगल में आ जाने से संभावित मानव-पशु संघर्ष को टालने में मदद और वन्य जीव संरक्षण कानूनों का पालन कराने में मदद मिल रही है।
-ऋषभ जैन, जनसंपर्क अधिकारी, पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क

Drone flight...Park's watch- फोटो : BANDA