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सो कर नहीं, इबादतों में गुजारें रमजान की आखिरी रातें

Wed, 20 May 2020 11:06 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 20 May 2020 11:06 PM IST
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Do not sleep, spend the last nights of Ramadan in prayers
दुआ मांगती मासूम रोजदार तमन्ना असलम। - फोटो : BANDA
बांदा। पूरे रमजान माह में आखिरी अशरा सबसे अहम है। रमजान में चंद दिन और बचे हैं। ऐसे में इबादतों में और तेजी व कसरत आनी चाहिए। इस मुबारक माह की रातें सोकर गुजारने की नहीं बल्कि इबादत और तिलावत में मशगूल रहने की है। मुबारक माह चंद दिन बाद रुखसत हो जाएगा। हममें से कितने ऐसे होंगे जिन्हें यह माह अब मयस्सर न हो।
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मौलाना फरीद अहमद नदवी (हथौरा) कहते हैं कि आखिरी अशरे में शबे कद्र होती है। ये हजार महीनों से भी ज्यादा अफजल है। गुरुब आफताब (सूर्यास्त) से लेकर अगले दिन सुबह तुलु आफताब (सूर्योदय) तक इस रात रहमतें और बरकतें नाजिल होती हैं। इसी मुबारक रात को कुरान जैसा कीमती तोहफा हासिल हुआ।
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मौलाना ने कहा कि बचे चंद दिनों की जमकर कद्र करें। एक लम्हा भी जाया न करें। कोई भी गुनाह का काम न करें। अपने रब को राजी करने के लिए इबादत करें और गुनाहों की माफी मांगें। मुल्क की तरक्की, सलामती और वबा (महामारी) से निजात की दुआएं करें। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में बाहर निकलने पर पाबंदी है इसलिए सारी इबादतें वगैरह घर पर ही घरवालों के साथ अंजाम दें।

मौलाना फरीद अहमद कासमी।

मौलाना फरीद अहमद कासमी।- फोटो : BANDA

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