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कोरोना के साथ डेंगू की भी आहट, अस्पतालों में 4 मरीज मिले
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मलेरिया की स्लाइड बनाता फील्ड वर्कर।
- फोटो : BANDA
बांदा। मौसम में बदलाव से अब कोरोना के साथ डेंगू की भी आहट मिलने लगी है। यह दोनों संक्रमित रोग हैं। बुखार ग्रस्त कई मरीजों में डेंगू के लक्षण पाए गए हैं। इस पर मलेरिया विभाग ने घर-घर सर्वे और मच्छरजनित रोगों की जांच शुरू करा दी है। डेंगू लक्षण वाले चार मरीज पाए गए हैं। मलेरिया के भी 17 मरीज मिले हैं।
बीते सितंबर माह में जिले के विभिन्न अस्पतालों में जांच के दौरान चार मरीजों में डेंगू के लक्षणों की पुष्टि हुई है। इनमें बांदा शहर के कालूकुआं व धीरज नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में रेहुंटा तथा गोखरही गांव के मरीज शामिल हैं। हालांकि मलेरिया विभाग ने शासन को भेजी रिपोर्ट में चारों को डेंगू का संभावित मरीज बताया है।
मलेरिया विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से सितंबर (कुल नौ माह) में मलेरिया की जांच के लिए 15,778 स्लाइड बनाई गईं। इनमें कुल 17 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए। मरीजों में शहर मुख्यालय में तीन, नरैनी में पांच, बिसंडा में सात और तिंदवारी में दो मरीज शामिल हैं।
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सहायक जिला मलेरिया अधिकारी लाल साहब सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में शहर के 2457 घरों की जांच की गई। इनमें कुल 288 घर डेंगू/मलेरिया पॉजिटिव श्रेणी के पाए गए। इन घरों में कूलर, टॉयर, बर्तनों, गमलों आदि में मच्छरों के लार्वा मिले हैं। इन घरों के आसपास छिड़काव कराया गया है। हालांकि वह ग्रामीण क्षेत्रों में जांच आदि के बारे में नहीं बता सके। फिलहाल अभिलेख तैयार न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। स्लाइड बनाने की कमजोर प्रगति के बाबत उनकी दलील थी कि कोरोना संक्रमण और ओपीडी बंद होने से इसमें दिक्कत हुई।
संचारी रोग दस्तक अभियान के तहत जिले में 1217 टीमें घर-घर जाकर कोरोना, डेंगू और मलेरिया आदि संक्रामक रोगों के बारे में जागरूक कर रही हैं। सर्वे का यह अभियान पहली से 15 अक्तूबर तक चला। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अभियान में 3,28,174 घरों तक पहुंचने का लक्ष्य था लेकिन टीमें 2,85,788 घरों तक ही पहुंच सकीं। 42,386 घर सर्वे से अछूते रहे।
सहायक मलेरिया अधिकारी ने बताया कि फील्ड में जाकर स्लाइड बनाने का काम मल्टी परपज वर्कर (एमपीडब्ल्यू) करते हैं। लेकिन इनका भारी टोटा है। स्वीकृत 105 पदों में सिर्फ आठ ही भरे हैं। आउटसोर्सिंग में 12 डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स (डीबीसी) नियुक्त किए गए हैं। उन्हें सर्वे में लगाया गया है।
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बीते सितंबर माह में जिले के विभिन्न अस्पतालों में जांच के दौरान चार मरीजों में डेंगू के लक्षणों की पुष्टि हुई है। इनमें बांदा शहर के कालूकुआं व धीरज नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में रेहुंटा तथा गोखरही गांव के मरीज शामिल हैं। हालांकि मलेरिया विभाग ने शासन को भेजी रिपोर्ट में चारों को डेंगू का संभावित मरीज बताया है।
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मलेरिया विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से सितंबर (कुल नौ माह) में मलेरिया की जांच के लिए 15,778 स्लाइड बनाई गईं। इनमें कुल 17 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए। मरीजों में शहर मुख्यालय में तीन, नरैनी में पांच, बिसंडा में सात और तिंदवारी में दो मरीज शामिल हैं।
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सहायक जिला मलेरिया अधिकारी लाल साहब सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में शहर के 2457 घरों की जांच की गई। इनमें कुल 288 घर डेंगू/मलेरिया पॉजिटिव श्रेणी के पाए गए। इन घरों में कूलर, टॉयर, बर्तनों, गमलों आदि में मच्छरों के लार्वा मिले हैं। इन घरों के आसपास छिड़काव कराया गया है। हालांकि वह ग्रामीण क्षेत्रों में जांच आदि के बारे में नहीं बता सके। फिलहाल अभिलेख तैयार न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। स्लाइड बनाने की कमजोर प्रगति के बाबत उनकी दलील थी कि कोरोना संक्रमण और ओपीडी बंद होने से इसमें दिक्कत हुई।
संचारी रोग दस्तक अभियान के तहत जिले में 1217 टीमें घर-घर जाकर कोरोना, डेंगू और मलेरिया आदि संक्रामक रोगों के बारे में जागरूक कर रही हैं। सर्वे का यह अभियान पहली से 15 अक्तूबर तक चला। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अभियान में 3,28,174 घरों तक पहुंचने का लक्ष्य था लेकिन टीमें 2,85,788 घरों तक ही पहुंच सकीं। 42,386 घर सर्वे से अछूते रहे।
सहायक मलेरिया अधिकारी ने बताया कि फील्ड में जाकर स्लाइड बनाने का काम मल्टी परपज वर्कर (एमपीडब्ल्यू) करते हैं। लेकिन इनका भारी टोटा है। स्वीकृत 105 पदों में सिर्फ आठ ही भरे हैं। आउटसोर्सिंग में 12 डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स (डीबीसी) नियुक्त किए गए हैं। उन्हें सर्वे में लगाया गया है।