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संस्कारों में बंधी बेटियों को अब मिला ‘सुप्रीम’ अधिकार

Sun, 16 Aug 2020 11:36 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 16 Aug 2020 11:36 PM IST
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Daughters tied in rites now get 'supreme' rights
शबीना मुमताज। - फोटो : BANDA
बांदा। संयुक्त हिंदू परिवार में पिता की संपत्ति में बेटी को बराबरी का अधिकार दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे। बेटियों के सामाजिक और आर्थिक स्तर में सुधार आएगा। हालांकि भारतीय बेटियां संस्कारों से बंधी होती हैं।
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पिता की संपत्ति में जल्दी हक नहीं मांगतीं। यही वजह है कि जिले भर में इस तरह के मामले न के बराबर हैं, जिसमें बेटियों ने अपनी पिता की संपत्ति में हक मांगा हो। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से बुद्धिजीवी महिलाएं खुश हैं। वे मानती हैं कि जरूरतमंद बेटियां इस फैसले से अपना सामाजिक और आर्थिक स्तर मजबूत कर सकतीं हैं।
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अब हिंदू लॉ में भी लागू हुआ नियम
संयुक्त हिंदू परिवार में बेटियों को पैतृक संपत्ति में अधिकार देने के फैसले की प्रशंसा की जानी चाहिए। मुस्लिम लॉ में बेटियों को पिता की संपत्ति में पहले से ही अधिकार है। अब हिंदू लॉ में भी यह लागू हो जाने से बेटियों को अपने अधिकार के लिए लड़ना नहीं पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सराहनीय है।-सैय्यद अली मंजर, वरिष्ठ अधिवक्ता।
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हिंदू लॉ में नहीं था अधिकार, फैसला हित में
हिंदू लॉ में बेटियों को पिता की संपत्ति में अधिकार नहीं था। भले ही वह संस्कारों के चलते पिता और भाई से संपत्ति में हक नहीं मांगतीं पर सुप्रीम कोर्ट ने उनके हित में अच्छा निर्णय दिया है। यह फैसला महिलाओं के सम्मान और सामाजिक व आर्थिक रूप से मजबूत करने में मददगार साबित होगा।-डॉ. निर्मला व्यास, समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष, पंडित जेएन महाविद्यालय।
पति की संपत्ति में खुश रहना जानती हैं
बेटियां संस्कारों से भरी होती हैं। यही वजह कि माता-पिता से कभी संपत्ति में हक नहीं मांगतीं। भले ही सुप्रीम कोर्ट ने पिता की संपत्ति में बराबरी का हक दे दिया हो पर अभी भी बहुत सी महिलाएं पति की संपत्ति में ही खुश रहना चाहेंगी। अलबत्ता जरूरतमंद बेटियों के लिए यह कानून बेहतर है। इसके दूरगामी परिणाम होंगे।-कामिनी त्रिपाठी, प्रबंधक, रामादेवी पब्लिक स्कूल, इंदिरा नगर
बुरे वक्त में साथ देगा नया कानून
सुप्रीम कोर्ट ने बेटियों के हक में बेहतर फैसला दिया है। बेटियां माता-पिता की प्यारी होती हैं। शादी के बाद भी उनमें मायके के प्रति प्रेम रहता है, लेकिन संकोच भी बहुत होता है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न्याय संगत है। भले ही बेटियां अपना हक न लें पर यह कानून उनके बुरे वक्त में जरूर साथ देगा।-रागिनी श्रीवास्तव, पूर्व प्रधानाचार्य, जीजीआईसी, अतर्रा।

फैसले से समाज में समरसता आएगी
सुप्रीमकोर्ट के इस फैसले से अब बेटियां भी अपने हक की लड़ाई लड़ सकतीं हैं। मुस्लिम लॉ के बाद अब हिंदू लॉ में भी बेटियों को पिता की संपत्ति में अधिकार दिए जाने से समाज में समरसता आएगी। उत्पीड़न का शिकार बहन-बेटियां इस कानून के जरिये अपना सामाजिक और आर्थिक स्तर मजबूत कर सकेंगी।-शबीना मुमताज, वरिष्ठ सदस्य, महिला संगठन वनागंना।

अधिवक्ता सैय्यद अली मंजर।

अधिवक्ता सैय्यद अली मंजर।- फोटो : BANDA

डा.निर्मला।

डा.निर्मला।- फोटो : BANDA

दामिनी त्रिपाठी।

दामिनी त्रिपाठी।- फोटो : BANDA

रागिनी श्रीवास्तव।

रागिनी श्रीवास्तव।- फोटो : BANDA

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