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अधिकारी झांकने भी नहीं गए मृतक किसान के घर
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 13 Jan 2017 11:37 PM IST
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झोपड़ीनुमा घर के बाहर खड़ी मृतक किसान की पत्नी व नातिन।
- फोटो : amarujala
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अंत्योदय कार्ड व आवास न मिलने से गरीब किसान द्वारा जहर खाकर जान देने के बाद भी कोई बड़ा अधिकारी उसके दरवाजे झांकने नहीं पहुंचा। एसडीएम के आदेश पर सिर्फ लेखपाल ने गांव जाकर जानकारी जुटाई। ग्रामीणों द्वारा इकट्ठा किए गए लकड़ी व उपलों से उसका अंतिम संस्कार किया गया।
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अतर्रा तहसील क्षेत्र के देवखेर गांव निवासी किसान मूलचंद्र पुत्र हीरालाल तिवारी के नाम तीन बीघा जमीन है। दैवी आपदा के चलते तीन साल से यह जमीन भी परती पड़ी रही। नतीजे में उसका परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया। नौ साल पहले पुत्र दिनेश द्वारा आत्महत्या करने के बाद बहू और छोटे बच्चों को पालने की जिम्मेदारी भी उस पर थी।
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डीएम को संबोधित सुसाइड नोट में उसने अंत्योदय राशन कार्ड व आवास न मिलने पर जान देने की बात कही थी। शुक्रवार को मृतक की पत्नी आशा अपने पौत्र व पौत्री के साथ झोपड़ीनुमा घर के दरवाजे पर असहाय बैठी थी। उसका कहना था कि बरसात व ठंड से बचने के लिए कोठरीनुमा मंदिर के कमरे में बसर करना पड़ता है।
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उसके घर में 10 किलो गेहूं के सिवा कुछ नहीं था। इलाहाबाद बैंक बदौसा शाखा से मृतक के नाम 30 हजार रुपये केसीसी कर्ज है। नातिन रेखा (8) ने बताया कि छोटे भाई के साथ स्कूल में खाना खाकर पेट भरते हैं। रात में घर में सूखी रोटी मिल जाती हैं। बाबा के मरने से अब और मुसीबत हुई गई।
उधर, ग्राम प्रधान छेदीलाल यादव का कहना है कि उसके कार्यकाल अभी तक जिला व ब्लाक से उनकी ग्राम पंचायत को एक भी आवास नहीं मिला। अंत्योदय कार्ड का कोटा भी नहीं बढ़ाया गया। इसी वजह से पात्र होने के बावजूद वह मदद करने में असमर्थ रहा। लेखपाल ने ग्रामीणों व मृतक की पत्नी से आर्थिक स्थिति की जानकारी ली।
उसके घर में चिता के लिए लकड़ी और सामान को रुपये भी नहीं थे। गांव वालों ने मिलकर लकड़ी व कंडे की व्यवस्था की। एसडीएम अरविंद कुमार तिवारी ने बताया कि चुनावी बैठकों में व्यस्तता के चलते लेखपाल को भेजकर जानकारी मंगाई है। रिपोर्ट मिलने पर मदद करेंगी।