{"_id":"587919e94f1c1b7c58baa7a0","slug":"caught-aslha-factory","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुलिस ने असलहा फैक्ट्री पकड़ी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
पुलिस ने असलहा फैक्ट्री पकड़ी
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 13 Jan 2017 11:48 PM IST
विज्ञापन
पुलिस गिरफ्त में असलहा बनाने वाले आरोपी।
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधान सभा चुनाव में अवैध शस्त्रों के इस्तेमाल पर भी पुलिस की नजरें टिकी हैं। बिसंडा थाना पुलिस ने पल्हरी गांव से अवैध असलहा फैक्ट्री पकड़ी। कई तमंचे और एकनाली बंदूक समेत असलहा बनाने के उपकरण बरामद हुए। असलहे बनाते रंगेहाथ दो सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि अवैध असलहे खरीदने वालों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
विज्ञापन
बिसंडा थाना पुलिस ने गुरुवार की रात पल्हरी गांव में दबिश देकर अवैध असलहा फैक्ट्री पकड़ी। घर में असलहे बना रहे सगे भाई कमलेश व विमलेश पुत्रगण शिवनाथ को गिरफ्तार कर लिया। 12 बोर एकनाली बंदूक, 315 बोर के दो तमंचे समेत नाल, बट व अन्य उपकरण बरामद हुए। दोनों को आर्म्स एक्ट में जेल भेज दिया गया।
विज्ञापन
पुलिस अधीक्षक ने गैंगेस्टर एक्ट कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं। पुलिस टीम को ढाई हजार रुपये पुरस्कार की घोषणा की। शुक्रवार को पुलिस लाइन सभागार में अभियुक्तों ने बताया कि 15 सालों से वह शस्त्र बनाने का काम करते हैं। 2000 से 5000 रुपये तक में असलहे बेचते हैं। जबकि कमलेश बूट हाउस, परचून व बैट्री का व्यवसाय भी करता है। एसपी डा.श्रीपति मिश्र ने बताया कि आरोपी दोनों भाई झांसी जनपद में अवैध शस्त्र बनाने में जेल जा चुके हैं। छूटने के बाद यहां अपने गांव आकर अवैध कारोबार करने लगे।
विज्ञापन
पुलिस अधीक्षक डा.श्रीपति मिश्र ने बताया कि अवैध शस्त्र बनाने वालों के अलावा बिचौलियों और अवैध असलहे खरीदने वालों पर भी कार्रवाई की तैयारी है। पिछले तीन माह में पकड़ी गई शस्त्र फैक्ट्रियों के आरोपियों से अवैध तमंचा व बंदूक खरीदने वालों की जानकारी जुटाई जा रही है। अवैध असलहा खरीदने की जरूरत क्यों पड़ी? इस पर ध्यान देते हुए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। विधान सभा चुनाव शांतिपूर्वक निपटाने के लिए पुलिस की कवायदें जारी हैं।