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नाबालिग से छेड़छाड़ में ग्राम प्रधान जेल गया
Updated Fri, 19 Jan 2018 10:56 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। नाबालिग से छेड़छाड़ में अदालत ने ग्राम प्रधान को जेल भेज दिया। बदौसा थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने एसीजेएम कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत दी अर्जी में कहा था कि 27 जून 2017 को उसका पति दीवार बना रहा था।
उसी दौरान ग्राम प्रधान राजेंद्र यादव, ब्रजमोहन यादव, लल्लू यादव, रज्जन यादव, मुन्नीलाल यादव और उमरदीप वहां पहुंच गए और अभद्रता कर दीवार बनाने से मना किया। यूपी-100 ने पहुंचने के बाद कार्रवाई नहीं की। पुलिस के जाने के बाद आरोपी दोबारा पहुंचे और पति-पत्नी को लाठियों से पीटने लगे।
16 वर्षीय पुत्री और ननद ने बीचबचाव किया तो राजेंद्र और ब्रजमोहन ने पुत्री से अश्लील हरकत की। कपड़े भी फाड़ दिए और मारपीट की। बदौसा थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अदालत ने आईपीसी की धारा 452, 354, 323, 504 व पास्को एक्ट के तहत परिवाद स्वीकार कर सभी आरोपियों को सम्मन जारी किया। ग्राम प्रधान राजेंद्र यादव ने हाईकोर्ट की शरण ली।
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हाईकोर्ट ने उसी दिन सुनवाई का आदेश दिया। शुक्रवार को ग्राम प्रधान राजेंद्र यादव ने अपर जिला जज (प्रथम) नीरज कुमार की अदालत में आत्मसमर्पण कर जमानत की अर्जी दी। न्यायाधीश ने सुनवाई के बाद अगली तारीख नियत कर राजेंद्र को जेल भेज दिया।
गवाही से मुकरने पर मुकदमे का आदेश
बांदा। गवाह के मुकर जाने पर अदालत ने आरोपी को बरी करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने वाले के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिसंडा के चौकीदार छोटेलाल ने 15 अप्रैल 1993 को दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि कस्बा निवासी ओम प्रकाश पुत्र बिंदा प्रसाद ने डाक्टर के न होने पर उससे अभद्रता की। कुर्सी और बेंच तोड़ दी तथा अस्पताल के दरवाजे बंद कर दिए।
मना करने पर उसकी बुरी तरह पिटाई की। जान से मारने की धमकी दी। विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी) अरुण कुमार मल्ल की अदालत में सुनवाई के दौरान छोटेलाल ने घटना से पूरी तरह इनकार कर दिया।
नतीजे में अदालत ने ओमप्रकाश को बरी कर दिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता उमाशंकर पटेल ने बताया कि अपनी ही तहरीर से मुकरने और गलत साक्ष्य देने पर न्यायाधीश ने छोटेलाल के विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 344 के तहत मुकदमा दर्ज कर सम्मन जारी करने के आदेश दिए हैं। (ब्यूरो)
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बांदा। नाबालिग से छेड़छाड़ में अदालत ने ग्राम प्रधान को जेल भेज दिया। बदौसा थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने एसीजेएम कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत दी अर्जी में कहा था कि 27 जून 2017 को उसका पति दीवार बना रहा था।
उसी दौरान ग्राम प्रधान राजेंद्र यादव, ब्रजमोहन यादव, लल्लू यादव, रज्जन यादव, मुन्नीलाल यादव और उमरदीप वहां पहुंच गए और अभद्रता कर दीवार बनाने से मना किया। यूपी-100 ने पहुंचने के बाद कार्रवाई नहीं की। पुलिस के जाने के बाद आरोपी दोबारा पहुंचे और पति-पत्नी को लाठियों से पीटने लगे।
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16 वर्षीय पुत्री और ननद ने बीचबचाव किया तो राजेंद्र और ब्रजमोहन ने पुत्री से अश्लील हरकत की। कपड़े भी फाड़ दिए और मारपीट की। बदौसा थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अदालत ने आईपीसी की धारा 452, 354, 323, 504 व पास्को एक्ट के तहत परिवाद स्वीकार कर सभी आरोपियों को सम्मन जारी किया। ग्राम प्रधान राजेंद्र यादव ने हाईकोर्ट की शरण ली।
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हाईकोर्ट ने उसी दिन सुनवाई का आदेश दिया। शुक्रवार को ग्राम प्रधान राजेंद्र यादव ने अपर जिला जज (प्रथम) नीरज कुमार की अदालत में आत्मसमर्पण कर जमानत की अर्जी दी। न्यायाधीश ने सुनवाई के बाद अगली तारीख नियत कर राजेंद्र को जेल भेज दिया।
गवाही से मुकरने पर मुकदमे का आदेश
बांदा। गवाह के मुकर जाने पर अदालत ने आरोपी को बरी करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने वाले के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिसंडा के चौकीदार छोटेलाल ने 15 अप्रैल 1993 को दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि कस्बा निवासी ओम प्रकाश पुत्र बिंदा प्रसाद ने डाक्टर के न होने पर उससे अभद्रता की। कुर्सी और बेंच तोड़ दी तथा अस्पताल के दरवाजे बंद कर दिए।
मना करने पर उसकी बुरी तरह पिटाई की। जान से मारने की धमकी दी। विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी) अरुण कुमार मल्ल की अदालत में सुनवाई के दौरान छोटेलाल ने घटना से पूरी तरह इनकार कर दिया।
नतीजे में अदालत ने ओमप्रकाश को बरी कर दिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता उमाशंकर पटेल ने बताया कि अपनी ही तहरीर से मुकरने और गलत साक्ष्य देने पर न्यायाधीश ने छोटेलाल के विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 344 के तहत मुकदमा दर्ज कर सम्मन जारी करने के आदेश दिए हैं। (ब्यूरो)