{"_id":"59a465d94f1c1bbd018b4634","slug":"111503946201-banda-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोआपरेटिव बैंक घोटाले में मैनेजर और कैशियर निलंबित","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कोआपरेटिव बैंक घोटाले में मैनेजर और कैशियर निलंबित
Updated Tue, 29 Aug 2017 12:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। कोआपरेटिव बैंक की ओरन ब्रांच में 16 लाख की हेराफेरी मामले में बैंक मैनेजर और कैशियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है। यह 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। जांच में दोषी पाए जाने पर एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
कोआपरेटिव बैंक की ओरन शाखा में लगभग एक दर्जन से ज्यादा खाताधारकों के खाते से गुपचुप ढंग से कई बार में रकम निकाल ली गई। 17 अगस्त को बैंक उप महाप्रबंधक विनोद मिश्रा दो अन्य शाखा प्रबंधकों के साथ औचक निरीक्षण में ओरन गए थे। वहां खाताधारकों ने पैसा निकालने में हो रही लेटलतीफी की शिकायत की।
इस पर उप महाप्रबंधक ने बैंक के लेजर आदि देखे। उन्हें दाल में कुछ काला नजर आया। इस पर उन्होंने मुख्यालय से तीन सदस्यीय टीम जांच के लिए ओरन भेजी। 21 अगस्त को टीम ने बैंक में जांच की। इसमें भंडाफोड़ हुआ कि लगभग 16 लाख रुपये खातों से निकाल लिए गए।
विज्ञापन
टीम ने अपनी रिपोर्ट महाप्रबंधक को दी। इसी बीच बैंक कर्मियों ने आनन-फानन खातों से निकाला गया पैसा वापस जमा कर दिया। यह लगभग 16 लाख रुपये बताया जा रहा है। हालांकि महाप्रबंधक का कहना है कि यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितना पैसा या जमा किया गया?
उधर, यह घोटाला खामोशी से दबा रहा। सोमवार 28 अगस्त को ‘अमर उजाला’ ने यह समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद कोआपरेटिव बैंक के अधिकारियों ने इस पर कार्रवाई तेज कर दी। सोमवार को महाप्रबंधक/सचिव एके श्रीवास्तव ने बताया कि ओरन ब्रांच मैनेजर विजय कुमार शुक्ला और कैशियर नीरज त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि इन पर बाउचरों में हेराफेरी और हाथ से लिखकर मैन्युअल लेनदेन तथा खाताधारकों को समय से भुगतान न करने के आरोप हैं। हालांकि महाप्रबंधक अब कह रहे हैं कि निलंबन तीन दिन पूर्व कर दिया गया है।
महाप्रबंधक ने बताया कि उप महाप्रबंधक यूके प्रजापति के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। इसमें दो वरिष्ठ और दो कनिष्ठ शाखा प्रबंधक हैं। टीम की जांच में दोषी पाया गया तो एफआईआर भी कराई जाएगी। निकाली और जमा की गई रकम के बारे में महाप्रबंधक बोले कि जांच के बाद ही कुछ बताएंगे। कहा कि अगर मिलान के बाद बैंक का पैसा कम पाया गया तो रिकवरी भी कराई जाएगी। ग्राहकों को किसी तरह का नुकसान या असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
-पांच सदस्यीय जांच टीम गठित
-गड़बड़ी मिली तो होगी एफआईआर
-‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद कार्रवाई तेज
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
कोआपरेटिव बैंक की ओरन शाखा में लगभग एक दर्जन से ज्यादा खाताधारकों के खाते से गुपचुप ढंग से कई बार में रकम निकाल ली गई। 17 अगस्त को बैंक उप महाप्रबंधक विनोद मिश्रा दो अन्य शाखा प्रबंधकों के साथ औचक निरीक्षण में ओरन गए थे। वहां खाताधारकों ने पैसा निकालने में हो रही लेटलतीफी की शिकायत की।
विज्ञापन
इस पर उप महाप्रबंधक ने बैंक के लेजर आदि देखे। उन्हें दाल में कुछ काला नजर आया। इस पर उन्होंने मुख्यालय से तीन सदस्यीय टीम जांच के लिए ओरन भेजी। 21 अगस्त को टीम ने बैंक में जांच की। इसमें भंडाफोड़ हुआ कि लगभग 16 लाख रुपये खातों से निकाल लिए गए।
विज्ञापन
टीम ने अपनी रिपोर्ट महाप्रबंधक को दी। इसी बीच बैंक कर्मियों ने आनन-फानन खातों से निकाला गया पैसा वापस जमा कर दिया। यह लगभग 16 लाख रुपये बताया जा रहा है। हालांकि महाप्रबंधक का कहना है कि यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितना पैसा या जमा किया गया?
उधर, यह घोटाला खामोशी से दबा रहा। सोमवार 28 अगस्त को ‘अमर उजाला’ ने यह समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद कोआपरेटिव बैंक के अधिकारियों ने इस पर कार्रवाई तेज कर दी। सोमवार को महाप्रबंधक/सचिव एके श्रीवास्तव ने बताया कि ओरन ब्रांच मैनेजर विजय कुमार शुक्ला और कैशियर नीरज त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि इन पर बाउचरों में हेराफेरी और हाथ से लिखकर मैन्युअल लेनदेन तथा खाताधारकों को समय से भुगतान न करने के आरोप हैं। हालांकि महाप्रबंधक अब कह रहे हैं कि निलंबन तीन दिन पूर्व कर दिया गया है।
महाप्रबंधक ने बताया कि उप महाप्रबंधक यूके प्रजापति के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। इसमें दो वरिष्ठ और दो कनिष्ठ शाखा प्रबंधक हैं। टीम की जांच में दोषी पाया गया तो एफआईआर भी कराई जाएगी। निकाली और जमा की गई रकम के बारे में महाप्रबंधक बोले कि जांच के बाद ही कुछ बताएंगे। कहा कि अगर मिलान के बाद बैंक का पैसा कम पाया गया तो रिकवरी भी कराई जाएगी। ग्राहकों को किसी तरह का नुकसान या असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
-पांच सदस्यीय जांच टीम गठित
-गड़बड़ी मिली तो होगी एफआईआर
-‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद कार्रवाई तेज
अमर उजाला ब्यूरो