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दीक्षांत समारोह में सात को मेडल, 43 को उपाधियां
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 19 Dec 2015 11:23 PM IST
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बांदा। कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय का पहला
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दीक्षांत समारोह भव्यता से भरपूर रहा। विश्वविद्यालय कुलाधिपति और प्रदेश
के राज्यपाल राम नाईक ने इस मौके पर महाविद्यालय के सात मेधावी छात्रों को
स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक के साथ उपाधियां सौंपी।
केंद्र सरकार के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग सचिव डा.एस अय्यप्पन ने बढ़ते तापमान पर चिंता जताई। मेधावियों के अलावा 43 अन्य छात्रों को उपाधियां सौंपी गईं।
राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह के मंच पर बुंदेलखंड के किसानों की भी चर्चा की। कहा कि यहां के किसानों को कुछ लोग बेवजह बदनाम करते हैं कि वह अनपढ़ होता है, लेकिन ऐसा नहीं है।
किसान भले ही ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं लेकिन शिक्षित और साक्षर होता है। उन्होंने किसानों को अपना उत्पादन बढ़ाने और मुनाफा कमाने के लिए प्रेरित किया।
कहा कि अच्छी क्वालिटी का उत्पादन होना चाहिए। विज्ञान के साथ खेती-बारी की जरूरत पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर हो रहे हैं।
उन्होंने आज ही के दिन काकोरी में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह और राजेंद्र प्रसाद को फांसी दिए जाने की जिक्र करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। कहा कि इन चारों ने देश के लिए बलिदान हो गए।
समारोह में उपस्थित केंद्र सरकार के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग में सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली महानिदेशक डा. एस अय्यप्पन ने कहा कि तापमान में वृद्धि चिंताजनक है। दिसंबर में तापमान पांच, छह डिग्री होना चाहिए।
लेकिन इससे करीब छह डिग्री तापमान अधिक है। यही परिवर्तन कृषि, वन और मौसम पर प्रभाव डाल रही है। केंद्रीय सचिव ने पीएम नरेंद्र मोदी के संदेश-पेट भी भरे और जेब भी भरे पर किसानों को काम करने के लिए प्रेरित किया।
कहा कि बुंदेलखंड में कृषि वानिकी, तिलहन और दलहन की संभावनाएं काफी हैं। केंद्रीय सचिव ने यह भी जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने फार्मर फस्र्ट, मेरा गांव-मेरा गौरव कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत युवाओं को कृषि से जोडने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय कुलपति डा. एसएल गोस्वामी ने समारोह में आए सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट पेश की।
उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय चित्रकूट धाम और झांसी मंडल के किसानों को कृषि, औद्यानिकी और पशु पालन क्षेत्रों में उन्नतिशील बनाएगा।
उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड में 27.77 लाख हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है। इसमें 20.13 लाख हेक्टेयर में बुआई होती है। सिंचित क्षेत्र मात्र 10.97 लाख हेक्टेयर है।
कहा कि उचित तकनीक से बुंदेलखंड को दलहन और तिलहन के कटोरे के रूप में विकसित किया जा सकता है। कुलपति ने राज्यपाल का स्मृति चिन्ह भेंट किया और शाल ओढ़ाई।
मेधावी छात्रों को मंच पर बुलाकर राज्यपाल के हाथों मेडल और उपाधियां दिलाईं। समारोह की शुरुआत वंदे मातरम और समापन राष्ट्रगान से हुआ। इसे छात्राओं ने पेश किया। समारोह में कुल 50 छात्रों को उपाधियां दी गईं।
केंद्र सरकार के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग सचिव डा.एस अय्यप्पन ने बढ़ते तापमान पर चिंता जताई। मेधावियों के अलावा 43 अन्य छात्रों को उपाधियां सौंपी गईं।
राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह के मंच पर बुंदेलखंड के किसानों की भी चर्चा की। कहा कि यहां के किसानों को कुछ लोग बेवजह बदनाम करते हैं कि वह अनपढ़ होता है, लेकिन ऐसा नहीं है।
किसान भले ही ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं लेकिन शिक्षित और साक्षर होता है। उन्होंने किसानों को अपना उत्पादन बढ़ाने और मुनाफा कमाने के लिए प्रेरित किया।
कहा कि अच्छी क्वालिटी का उत्पादन होना चाहिए। विज्ञान के साथ खेती-बारी की जरूरत पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर हो रहे हैं।
उन्होंने आज ही के दिन काकोरी में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह और राजेंद्र प्रसाद को फांसी दिए जाने की जिक्र करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। कहा कि इन चारों ने देश के लिए बलिदान हो गए।
समारोह में उपस्थित केंद्र सरकार के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग में सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली महानिदेशक डा. एस अय्यप्पन ने कहा कि तापमान में वृद्धि चिंताजनक है। दिसंबर में तापमान पांच, छह डिग्री होना चाहिए।
लेकिन इससे करीब छह डिग्री तापमान अधिक है। यही परिवर्तन कृषि, वन और मौसम पर प्रभाव डाल रही है। केंद्रीय सचिव ने पीएम नरेंद्र मोदी के संदेश-पेट भी भरे और जेब भी भरे पर किसानों को काम करने के लिए प्रेरित किया।
कहा कि बुंदेलखंड में कृषि वानिकी, तिलहन और दलहन की संभावनाएं काफी हैं। केंद्रीय सचिव ने यह भी जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने फार्मर फस्र्ट, मेरा गांव-मेरा गौरव कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत युवाओं को कृषि से जोडने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय कुलपति डा. एसएल गोस्वामी ने समारोह में आए सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट पेश की।
उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय चित्रकूट धाम और झांसी मंडल के किसानों को कृषि, औद्यानिकी और पशु पालन क्षेत्रों में उन्नतिशील बनाएगा।
उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड में 27.77 लाख हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है। इसमें 20.13 लाख हेक्टेयर में बुआई होती है। सिंचित क्षेत्र मात्र 10.97 लाख हेक्टेयर है।
कहा कि उचित तकनीक से बुंदेलखंड को दलहन और तिलहन के कटोरे के रूप में विकसित किया जा सकता है। कुलपति ने राज्यपाल का स्मृति चिन्ह भेंट किया और शाल ओढ़ाई।
मेधावी छात्रों को मंच पर बुलाकर राज्यपाल के हाथों मेडल और उपाधियां दिलाईं। समारोह की शुरुआत वंदे मातरम और समापन राष्ट्रगान से हुआ। इसे छात्राओं ने पेश किया। समारोह में कुल 50 छात्रों को उपाधियां दी गईं।