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Banda News: आयुक्त ने एसडीएम मऊ का आदेश निरस्त किया, दोबारा सुनवाई के निर्देश
Mon, 12 Oct 2026 11:51 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 12 Oct 2026 11:51 PM IST
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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त अजीत कुमार ने राजस्व वाद में कौशल किशोर व अन्य की अपील स्वीकार करते हुए उपजिलाधिकारी मऊ के 16 अप्रैल 2018 के आदेश को निरस्त कर दिया है।
आयुक्त ने प्रकरण को दोबारा सुनवाई के लिए अधीनस्थ न्यायालय को वापस भेजते हुए सभी पक्षों को साक्ष्य और सुनवाई का उचित अवसर देने के निर्देश दिए हैं।
अपील उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 के तहत दाखिल की गई थी। अपील उपजिलाधिकारी मऊ के एक वाद में पारित आदेश के खिलाफ की गई थी। यह वाद धारा 229बी के तहत अभयराज बनाम प्रताप नारायण आदि से संबंधित था।
अपीलकर्ताओं के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उनके पूर्वज अभयराज 1373 फसली से पहले से विवादित भूमि पर काबिज थे और खतौनी में उनका नाम वर्ग-9 में दर्ज था। इस आधार पर उन्हें संक्रमणीय भूमिधर घोषित किया जाना चाहिए था। अधिवक्ता का कहना था कि अधीनस्थ न्यायालय ने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का सही परीक्षण किए बिना ही वाद निरस्त कर दिया था।
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आयुक्त अजीत कुमार ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि उपजिलाधिकारी मऊ ने अभिलेखों और तथ्यों का सही परीक्षण किए बिना आदेश पारित किया था। यह आदेश त्रुटिपूर्ण होने के कारण कायम रहने योग्य नहीं है। इसी आधार पर आयुक्त ने 16 अप्रैल 2018 के आदेश को निरस्त कर दिया।
आयुक्त ने प्रकरण अधीनस्थ न्यायालय को प्रतिप्रेषित करते हुए निर्देश दिया कि सभी पक्षों को साक्ष्य प्रस्तुत करने और सुनवाई का उचित अवसर दिया जाए। इसके बाद वाद का गुण-दोष के आधार पर दोबारा निस्तारण किया जाए।
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आयुक्त ने प्रकरण को दोबारा सुनवाई के लिए अधीनस्थ न्यायालय को वापस भेजते हुए सभी पक्षों को साक्ष्य और सुनवाई का उचित अवसर देने के निर्देश दिए हैं।
अपील उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 के तहत दाखिल की गई थी। अपील उपजिलाधिकारी मऊ के एक वाद में पारित आदेश के खिलाफ की गई थी। यह वाद धारा 229बी के तहत अभयराज बनाम प्रताप नारायण आदि से संबंधित था।
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अपीलकर्ताओं के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उनके पूर्वज अभयराज 1373 फसली से पहले से विवादित भूमि पर काबिज थे और खतौनी में उनका नाम वर्ग-9 में दर्ज था। इस आधार पर उन्हें संक्रमणीय भूमिधर घोषित किया जाना चाहिए था। अधिवक्ता का कहना था कि अधीनस्थ न्यायालय ने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का सही परीक्षण किए बिना ही वाद निरस्त कर दिया था।
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आयुक्त अजीत कुमार ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि उपजिलाधिकारी मऊ ने अभिलेखों और तथ्यों का सही परीक्षण किए बिना आदेश पारित किया था। यह आदेश त्रुटिपूर्ण होने के कारण कायम रहने योग्य नहीं है। इसी आधार पर आयुक्त ने 16 अप्रैल 2018 के आदेश को निरस्त कर दिया।
आयुक्त ने प्रकरण अधीनस्थ न्यायालय को प्रतिप्रेषित करते हुए निर्देश दिया कि सभी पक्षों को साक्ष्य प्रस्तुत करने और सुनवाई का उचित अवसर दिया जाए। इसके बाद वाद का गुण-दोष के आधार पर दोबारा निस्तारण किया जाए।