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Banda News: कंप्यूटर चला रहे सफाईकर्मी, गांवों में फैली गंदगी
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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों की 1403 ग्राम पंचायतों को साफ और स्वच्छ रखने के लिए नियुक्त 2743 सफाई कर्मचारियों में 300 से अधिक सफाई कर्मी जिला और ब्लाॅक कार्यालयों में संबद्ध हैं।
कोई कंप्यूटर आपरेटर है तो कोई डाक का काम देख रहा है। अधिकारियों की गाड़ी चलाने के साथ ही कई कर्मचारी आवासों में खाना बनाने का काम कर रहे हैं। जो गांवों में नियुक्त हैं, उनमें 20 फीसदी बीए, एमए, एमएससी पास होने के कारण सफाई करने में शर्म महसूस करते हैं। इसके चलते उन्होंने गांव की सफाई का कार्य स्थानीय कर्मचारियों को पांच से दस हजार रुपये मासिक में ठेके पर दे रखा है।
कुछ ने अपनी ड्यूटी ब्लाक स्तर पर सफाई कर्मियों की टोली में लगवा ली है। ताकि उन्हेें कभी कभार ही काम पर जाना पड़े। ऐसे में कई गांवों में तो सफाई कर्मचारी ही नहीं हैं। पांच हजार की आबादी वाली बड़ी ग्राम पंचायतों में दो के स्थान पर एक ही काम कर रहा है। आलम यह है कि गांव गंदगी से बजबजा रहे हैं। बारिश से जगह-जगह जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई। नाला नालियां का पानी सड़कों पर बह रहा है। इससे संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ रही है।
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गांवों से नदारद 100 सफाई कर्मी
जनपद की 469 ग्राम पंचायतों में 740 सफाई कर्मचारी नियुक्त है। मौजूदा समय में 100 सफाई कर्मचारी गांवों से नदारद हैं। 50 से अधिक कर्मचारी जिला स्तरीय कार्यालयों कलक्ट्रेट, विकास भवन व अधिकारियों के आवासों में लगे हैं। इतने ही कर्मचारी ब्लाॅकों में संबद्ध हैं। नवंबर में जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला व तहसील, ब्लाक स्तरीय कार्यालयों में संबद्ध सफाई कर्मचारियों को मूल तैनाती स्थान पर भेज दिया गया था। लेकिन कुछ ही दिन बाद यह सभी कर्मचारी पुन: अधिकारियों से सांठगांठ कर जिला व तहसील स्तर के कार्यालयों में संबद्ध हो गए।
अफसर मानने के लिए तैयार नहीं, गांवों में गंदगी
हमीरपुर। जिले की 330 ग्राम पंचायतों की साफ-सफाई के लिए 603 सफाई कर्मचारी के पद स्वीकृत हैं। अधिकारी चाहें जितने दावे करें कि सफाई कर्मचारी जिला, तहसील व ब्लाक मुख्यालयों में संबद्ध नहीं हैं, लेकिन बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी गांवों से नदारद हैं। ऐसे में गांवों की सफाई व्यवस्था धड़ाम पड़ी है। जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नालियां मलबा से बजबजा रही हैं। बारिश होने से पर गंदा पानी लोगों के घरों में घुस जाता है। जलभराव कच्चे मकानों के लिए खतरा बन गया है। करीब 30 से 40 सफाई कर्मी जिला व ब्लॉक कार्यालयों से संबद्ध हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी राजेंद्र प्रकाश का कहना है कि सफाई कर्मचारी संबद्ध नहीं है।
बागवानी व भोजन बनाने में लगे सफाई कर्मी
चित्रकूट। जिले में 331 ग्राम पंचायतों में 613 सफाई कर्मी तैनात हैं। इतनी बड़ी संख्या होने के बाद भी गांव गंदगी से बजबजा रहे हैं। बताते हैं कि करीब 100 सफाई कर्मचारी अधिकारियों के संबद्ध रहते हुए घर पर खुशामद में लगे हैं। बागवानी, सफाई, भोजन आदि बनाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कुछ कार्यालयों में डाक बांटने व कंप्यूटर चलाने का काम कर रहे है। कई अधिकारियों के वाहन चला रहे हैं। हैरत की बात तो यह है कि वेतन नियुक्ति विभाग से लिया जा रहा है। जिला पंचायत राज अधिकारी कुमार अमरेंद्र का कहना है कि सफाई कर्मियों की कोई कमी नहीं है।
प्रधानों और सचिवों से साठगांठ, ठेके पर करा रहे कार्य
महोबा। जिले की 273 ग्राम पंचायतों में 787 सफाई कर्मचारी तैनात हैं। इनमें से 40 से अधिक सफाई कर्मचारी जिला, तहसील, ब्लाक मुख्यालयों पर संबद्ध हैं। अधिकारियों के यहां खान बनाने, वाहन चलाने और साफ-सफाई का काम कर रहे हैं। इसके अलावा तमाम कर्मचारी जो पढ़े लिखे हैं और वह सफाई करने में शर्म महसूस करते हैं, ग्राम पंचायतों में प्रधान व सचिवों से सेटिंग बनाए हैं। गांव के ही सफाई करने वाले लोगों को पांच हजार देकर ठेके पर काम करा रहे हैं। विभागीय अधिकारी सबकुछ जानते हुए भी मौन हैं। इन्हें पंचायती राज विभाग के बड़े लोगों का भी संरक्षण प्राप्त है।
वर्जन-
सफाई कर्मियों के संबंद्धीकरण की जानकारी नहीं है। डीपीआरओ से रिपोर्ट तलब की जाएगी। संबद्धता समाप्त कर मूल तैनाती स्थान पर भेजा जाएगा। -संजय यादव, उप निदेशक (पंचायत), चित्रकूटधाम मंडल, बांदा
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कोई कंप्यूटर आपरेटर है तो कोई डाक का काम देख रहा है। अधिकारियों की गाड़ी चलाने के साथ ही कई कर्मचारी आवासों में खाना बनाने का काम कर रहे हैं। जो गांवों में नियुक्त हैं, उनमें 20 फीसदी बीए, एमए, एमएससी पास होने के कारण सफाई करने में शर्म महसूस करते हैं। इसके चलते उन्होंने गांव की सफाई का कार्य स्थानीय कर्मचारियों को पांच से दस हजार रुपये मासिक में ठेके पर दे रखा है।
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कुछ ने अपनी ड्यूटी ब्लाक स्तर पर सफाई कर्मियों की टोली में लगवा ली है। ताकि उन्हेें कभी कभार ही काम पर जाना पड़े। ऐसे में कई गांवों में तो सफाई कर्मचारी ही नहीं हैं। पांच हजार की आबादी वाली बड़ी ग्राम पंचायतों में दो के स्थान पर एक ही काम कर रहा है। आलम यह है कि गांव गंदगी से बजबजा रहे हैं। बारिश से जगह-जगह जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई। नाला नालियां का पानी सड़कों पर बह रहा है। इससे संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ रही है।
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गांवों से नदारद 100 सफाई कर्मी
जनपद की 469 ग्राम पंचायतों में 740 सफाई कर्मचारी नियुक्त है। मौजूदा समय में 100 सफाई कर्मचारी गांवों से नदारद हैं। 50 से अधिक कर्मचारी जिला स्तरीय कार्यालयों कलक्ट्रेट, विकास भवन व अधिकारियों के आवासों में लगे हैं। इतने ही कर्मचारी ब्लाॅकों में संबद्ध हैं। नवंबर में जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला व तहसील, ब्लाक स्तरीय कार्यालयों में संबद्ध सफाई कर्मचारियों को मूल तैनाती स्थान पर भेज दिया गया था। लेकिन कुछ ही दिन बाद यह सभी कर्मचारी पुन: अधिकारियों से सांठगांठ कर जिला व तहसील स्तर के कार्यालयों में संबद्ध हो गए।
अफसर मानने के लिए तैयार नहीं, गांवों में गंदगी
हमीरपुर। जिले की 330 ग्राम पंचायतों की साफ-सफाई के लिए 603 सफाई कर्मचारी के पद स्वीकृत हैं। अधिकारी चाहें जितने दावे करें कि सफाई कर्मचारी जिला, तहसील व ब्लाक मुख्यालयों में संबद्ध नहीं हैं, लेकिन बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी गांवों से नदारद हैं। ऐसे में गांवों की सफाई व्यवस्था धड़ाम पड़ी है। जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नालियां मलबा से बजबजा रही हैं। बारिश होने से पर गंदा पानी लोगों के घरों में घुस जाता है। जलभराव कच्चे मकानों के लिए खतरा बन गया है। करीब 30 से 40 सफाई कर्मी जिला व ब्लॉक कार्यालयों से संबद्ध हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी राजेंद्र प्रकाश का कहना है कि सफाई कर्मचारी संबद्ध नहीं है।
बागवानी व भोजन बनाने में लगे सफाई कर्मी
चित्रकूट। जिले में 331 ग्राम पंचायतों में 613 सफाई कर्मी तैनात हैं। इतनी बड़ी संख्या होने के बाद भी गांव गंदगी से बजबजा रहे हैं। बताते हैं कि करीब 100 सफाई कर्मचारी अधिकारियों के संबद्ध रहते हुए घर पर खुशामद में लगे हैं। बागवानी, सफाई, भोजन आदि बनाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कुछ कार्यालयों में डाक बांटने व कंप्यूटर चलाने का काम कर रहे है। कई अधिकारियों के वाहन चला रहे हैं। हैरत की बात तो यह है कि वेतन नियुक्ति विभाग से लिया जा रहा है। जिला पंचायत राज अधिकारी कुमार अमरेंद्र का कहना है कि सफाई कर्मियों की कोई कमी नहीं है।
प्रधानों और सचिवों से साठगांठ, ठेके पर करा रहे कार्य
महोबा। जिले की 273 ग्राम पंचायतों में 787 सफाई कर्मचारी तैनात हैं। इनमें से 40 से अधिक सफाई कर्मचारी जिला, तहसील, ब्लाक मुख्यालयों पर संबद्ध हैं। अधिकारियों के यहां खान बनाने, वाहन चलाने और साफ-सफाई का काम कर रहे हैं। इसके अलावा तमाम कर्मचारी जो पढ़े लिखे हैं और वह सफाई करने में शर्म महसूस करते हैं, ग्राम पंचायतों में प्रधान व सचिवों से सेटिंग बनाए हैं। गांव के ही सफाई करने वाले लोगों को पांच हजार देकर ठेके पर काम करा रहे हैं। विभागीय अधिकारी सबकुछ जानते हुए भी मौन हैं। इन्हें पंचायती राज विभाग के बड़े लोगों का भी संरक्षण प्राप्त है।
वर्जन-
सफाई कर्मियों के संबंद्धीकरण की जानकारी नहीं है। डीपीआरओ से रिपोर्ट तलब की जाएगी। संबद्धता समाप्त कर मूल तैनाती स्थान पर भेजा जाएगा। -संजय यादव, उप निदेशक (पंचायत), चित्रकूटधाम मंडल, बांदा