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सारे मुद्दे दरकिनार, हर तरफ नोटों की तकरार

Wed, 09 Nov 2016 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बांदा
अमर उजाला ब्यूरो बांदा Updated Wed, 09 Nov 2016 11:46 PM IST
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Bypassing all the issues, all sides of the argument notes
बांदा रेलवे स्टेशन की टिकट बुकिंग काउंटर पर प्रतिबंधित नोट न लिए जाने से नोट दिखाते यात्री। - फोटो : अमर उजाला

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500 और 1000 के नोटों पर अचानक लगाई गई पाबंदी ने देश एवं प्रदेश, घर से लेकर होटल व राजनीतिक गलियारों में चल रहे विभिन्न मुद्दों को रातों-रात काफूर कर दिया। अब हर तरफ नोटों की तकरार और प्रतिबंध को लेकर हाय तोबा है। गरीब जहां जस के तस हैं वहीं मध्यम वर्ग और धनपतियों की शामत है।

सबसे ज्यादा दिक्कत अस्पताल, पेट्रोल पंप, ट्रेन व बस के यात्रियों व रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर है। प्रतिबंध के पहले दिन हर तरह के व्यापार का लेनदेन औंधे मुंह गिरा। 50 फीसदी से भी कम कारोबार रहा। प्रतिबंध को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं हुई। पहले दिन के कुछ नजारे कैमरे व शब्दों में बयां किए जा रहे हैं।
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लागू करने का तरीका गलत
उद्देश्य भले ही अच्छा हो, लेकिन लागू करने का तरीका गलत है। वैसे इस मामले में हमारी राष्ट्रीय अध्यक्ष ‘बहन जी’ भी प्रतिक्रिया देंगी। लेकिन फौरी तौर पर लोगों को जो परेशानी हो रही है। वह चिंताजनक है। ट्रेनों में बच्चे भूखे हैं उनके लिए घरवाले दूध, फल आदि नहीं खरीद पा रहे हैं। मरीजों के लिए दवाएं अटक गई हैं और भी ऐसी कई परेशानियां हैं। इसका कोई सरल तरीका लागू किया जाना चाहिए।- नसीमुद्दीन सिद्दीकी, विधान परिषद, नेता प्रतिपक्ष (बसपा)
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तिजोरियों में सर्जिकल स्ट्राइक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों की तिजोरियों में सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है। खास कर चुनाव लड़ने वालों के लिए खासी मुसीबत खड़ी हो गई है। केंद्र सरकार को कोई बेहतर तरीका अपनाना चाहिए, ताकि किसी भी वर्ग को इस कदम से परेशानी न हो। -विवेक कुमार सिंह, सदर विधायक (कांग्रेस)

ध्यान बंटाने के लिए तुगलकी फरमान
अपने ऐब छिपाने और देश की तमाम समस्याओं से लोगों का ध्यान बंटाने के लिए प्रधानमंत्री ने यह अचानक तुगलकी फरमान जारी किया है। इससे हर वर्ग का आदमी परेशान है। 500 का नोट अधिकांश लोगों के पास होना आम बात है। इस पर अचानक प्रतिबंध हरगिज उचित नहीं। -शमीम बांदवी, जिलाध्यक्ष सपा

काला धन निकले, मगर आम आदमी परेशान न हो
अच्छे उद्देश्य का क्रियान्वयन गलत हो रहा है। अचानक प्रतिबंध से जनजीवन प्रभावित हुआ है। काले धन को जरूर निकाला जाना चाहिए, लेकिन उपाय ऐसा अपनाया जाए कि गरीब और मध्यम वर्ग और एक नंबर की पूंजी रखने वालों और कारोबारियों को बेवजह परेशानियां न झेलनी पड़े। खासकर स्वास्थ्य विभाग में इस प्रतिबंध का काफी असर पड़ रहा है। -डा. मोहम्मद रफीक (एमडी), वरिष्ठ चिकित्सक, बांदा

कारपोरेट घराने सफल नहीं होने देंगे
दो बड़े नोटों पर अचानक प्रतिबंध लगा दिए जाने का कदम तो अच्छा है, लेकिन इससे अर्थव्यवस्था पूरी तरह नहीं सुधर पाएगी। क्योंकि कारपोरेट घराने इसे सफल नहीं होने देंगे। कालाधन तो उन्हीं के पास है। आम जनता के पास नहीं है। इस प्रतिबंध से शायद महंगाई पर कुछ कंट्रोल हो, क्योंकि अवैध रुपये सप्लाई का दायरा सिमटेगा। इससे प्राइस लेवल डाउन होने के आसार हैं। नकली नोटों की तस्करी पर रोक लगेगी। वैसे प्रतिबंध संबंधी कार्यवाई को विमुद्रीकरण प्रक्रिया कहा जाता है। -डा. एसके त्रिपाठी, पूर्व विभागाध्यक्ष (अर्थशास्त्र), पंडित जेएन डिग्री कालेज, बांदा

500 का 350 में और 1000 का 800 में ले रहे नोट
बांदा। 500 और 1000 के नोटों पर प्रतिबंध ने कई कारोबारियों की चांदी कर दी है। खुलेआम ग्राहकों से ठगी हो रही हैं। इस पर जिला प्रशासन चुप्पी साधे है। सर्राफा, कपड़ा, मिठाई, ईंधन व रोजमर्रा की अन्य वस्तुओं की खरीददारी पर ग्राहकों को अच्छी खासी चपत लग रही है। पचनेही गांव के राधेश्याम और तिंदवारी के बाबू बुधवार को जेवर खरीदने आए थे। सराफा दुकानदारों ने उन्हें लगभग 26 फीसदी की चपत लगाई। 500 के नोट 350 रुपये में और 1000 के नोट 850 रुपये में लिए। दोनों ने बताया इसी माह उनके यहां शादी है। जेवर लेना मजबूरी है। इसी तरह सादिक न्याजी ने बताया उनके घर की महिलाएं कपड़ा लेने गईं थीं। कपड़ा दुकानदार ने 500 का नोट 400 में लिया। कहा 100 रुपये टैक्स लग रहा है।


बस से उतारे गए यात्री, रेलवे ने भी लौटाया
बांदा। सरकारी सेवाएं भी नोटों से प्रभावित रहीं। रोडवेज बसों में कंडक्टरों ने यात्रियों से 500 और एक हजार के नोट नहीं लिए। कई यात्रियों को चलती बस से नीचे उतार दिया गया। इसी तरह रेलवे की टिकट बुकिंग में प्रतिबंधित नोट न लिए जाने से तमाम यात्रियों को अपनी यात्रा स्थगित करना पड़ी। खम्हौरा गांव का चंदन अपनी पत्नी और बच्चों के साथ घाटमपुर जा रहा था। रोडवेज बस में कंडक्टर को उसने 500-500 के नोट दिए तो उसने टिकट देने से मना कर दिया और शहर के बाहर बस रोककर पूरे परिवार को नीचे उतार दिया। रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर पर भी बड़ी संख्या में यात्रियों को सिर्फ इसलिए टिकट नहीं मिला कि उनके पास 500 और 1000 के नोट थे। यह नोट लेकर लोगों ने बुकिंग विंडो के पास प्रदर्शन भी किया।
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