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नहीं निकले खरीददार, मंदा रहा राखियों का कारोबार

Sun, 02 Aug 2020 11:37 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 02 Aug 2020 11:37 PM IST
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Buyers did not turn out, the business of the clans was slowing down
बांदा। भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन सोमवार को मनाया जाएगा। इसके बावजूद पूर्व संध्या पर रविवार को बाजार में पहली जैसी रौनक नहीं रही। कोरोना महामारी का असर साफ नजर आया। दुकानदार हताश और लागत न निकलने से परेशान हैं। कई दुकानदारों ने कर्ज लेकर दुकानें सजाई हैं। अब उन्हें कर्ज अदायगी की चिंता सता रही है।
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वैश्विक महामारी का कारण बने कोरोना ने ईद-बकरीद व अन्य त्योहारों की तरह रक्षाबंधन को भी प्रभावित किया है। रविवार को बंदी लागू होने के बावजूद शासन की छूट पर राखी और मिठाई की दुकानें खुलीं, लेकिन खरीददारों की संख्या बेहद कम रही। दोनों ही कारोबार मंदा रहा।
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बिक्री का ग्राफ कमजोर होने पर फुटकर दुकानदार निराश हैं। बाजार इस बार स्वदेशी और आकर्षक राखियों से पटा रहा। चाइनीज राखियां पूरी तरह गायब रहीं। दुकानदारों के मुताबिक महंगी राखियों की बजाए अधिकांश बिक्री धागों की हुई। इस बार नयापन ये रहा कि महिलाओं ने राखी/धागा खरीदने से पहले उन्हें सैनिटाइज कराया। प्रतिदिन 100 रुपये सैनिटाइजर पर खर्च करना पड़े।
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मुन्नीलाल वर्मा ने बताया कि 30 साल से राखी का व्यापार कर रहा है। इससे पहले कभी ऐसी मंदी नहीं देखी। 40 हजार रुपये प्राइवेट कर्ज लेकर कोलकाता से राखी मंगाई और दुकान लगाई। कोरोना के भय से खरीददार नहीं निकले। अबकी लागत निकलना मुश्किल है।
महेश्वरी रोड पर राखी दुकान सजाए रोहितराज गुप्ता ने बताया कि महिलाएं राखी खरीद रही हैं, मगर पहले जैसी बात नहीं रही। रिश्तेदारों से 30 हजार रुपये की व्यवस्था कर दुकान लगाई, लेकिन कमजोर बिक्री से अब कर्ज अदायगी न कर पाने का डर सता रहा है।

संकट मोचन मंदिर के पास राखी की दुकान रखे आमिर शेख बताते हैं कि चार माह से दुकान लगाने के लिए रुपये इकट्ठे कर रहा था। हाल ही में 10 हजार रुपये नगर पालिका से लोन मिल गया, लेकिन प्रतिबंधों और कोरोना से बिक्री धड़ाम है। पूंजी भी नहीं निकल रही।
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