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पानी बचाने के हुनर से बुंदेलखंड को मिलेगी पहचान
Fri, 31 May 2019 11:59 PM IST
ASIF ASIF
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Published by: ASIF ASIF
Updated Fri, 31 May 2019 11:59 PM IST
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लातूर में गहराया जल संकट
- फोटो : ANI
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पानी बचाने का हुनर सीख लीजिए। बुंदेलखंड को पूरी दुनिया में पहचान मिल जाएगी। प्यासे को पानी पिलाना पुण्य का काम है। इसी तरह अब पानी बचाने का काम किसी पुण्य से कम नहीं है।
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ये बातें डीएम हीरा लाल ने शुक्रवार को सुबह पड़मई गांव में सूखे पड़े पुराने तालाब के जीर्णोद्धार के लिए तालाब में ही आयोजित भूमि पूजन के दौरान कही और तालाब खुदवाने की शुरुआत कराई। सुबह 6 बजे पहुंच गए डीएम ने पहले तालाब का पूजन किया। फिर फावड़ा चलाकर खुदाई शुरू की। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि पेयजल संकट पूरी दुनिया में हैं। शायद इसीलिए जानकार लोग तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए बता रहे हैं।
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डीएम ने कहा कि पंजाब में बुंदेलखंड से कम बारिश होती है, लेकिन वहां पानी पर्याप्त है। खुशहाली और हरियाली है। ग्रामीणों से अपील की कि बारिश के पानी को बहकर जाने न दें। श्रमदान से तालाब खोदें और कुओं को पुनरुद्धार करें। इसीलिए कुआं-तालाब जिआओ अभियान चलाया गया है। इससे भू-जल स्तर बढ़ेगा। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी हरिश्चंद्र, एसडीएम वंदिता श्रीवास्तव, परियोजना निदेशक आरपी मिश्रा, खंड विकास अधिकारी मनोज कुमार सिंह, ग्राम प्रधान माया देवी, एडीओ पंचायत रमेशचंद्र कुशवाहा, तकनीकी सहायक विजय द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।
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