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धर्म से धन्य चित्रकूट सबसे ज्यादा निर्धन
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बांदा। धर्म से धन्य धर्म नगरी चित्रकूट निर्धन है। बुंदेलखंड में यह सबसे गरीब है। यहां की 52.86 फीसदी आबादी गरीब है। उधर, दो नदियों के बीच आबाद अविकसित हमीरपुर चित्रकूटधाम मंडल की सबसे धनाढ्य है। यहां मात्र 30.92 फीसदी लोग ही गरीब हैं। मंडल मुख्यालय के तमगे से लैस बांदा गरीबी के पैमाने में दूसरे पायदान पर है। यहां 40.29 फीसदी लोग आर्थिक रूप से तंगहाल हैं। वीरभूमि महोबा में 35.29 फीसदी लोग गरीबी में जीवन बसर कर रहे हैं। यह तस्वीर नीति आयोग द्वारा जारी बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) की रिपोर्ट से सामने आई है।
हाल ही में नीति आयोग ने पूरे देश/प्रदेश की एमपीआई जारी की है। यह सर्वे लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर पर आधारित रहा। पोषण, बाल किशोर मृत्युदर, प्रसव पूर्व देखभाल, स्कूली शिक्षा, स्कूलों में उपस्थिति, घरेलू ईंधन, सफाई, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति और बैंकों में बैलेंस आदि सर्वे में शामिल रहा। रिपोर्ट के मुताबिक बुंदेलखंड की एक तिहाई (33.20 फीसदी) आबादी गरीब है। गरीबी की सबसे ज्यादा मार धर्म नगरी चित्रकूट झेल रही है।
पदवार आंकड़े
जिला आबादी गरीबी प्रतिशत गरीब जनसंख्या
चित्रकूट 9,91,730 52.86 5,24,230
बांदा 17,99,410 40.29 7,24,986
महोबा 8,75,958 35.29 3,09,130
हमीरपुर 11,04,285 30.92 3,41,450
जालौन 16,89,974 27.67 4,67,620
झांसी 19,98,630 20.27 4,05,120
ललितपुर 12,21,592 35.98 4,39,530
योग/औसत 96,81,552 33.20 32,12,066
नोट- आबादी के आंकड़े जनगणना 2011 के हैं।
गांवों में 40 और शहर में 16 फीसदी बुंदेली गरीब
बांदा। कहावत है कि भारत गांव में बसता है, लेकिन मजे में शहरी ज्यादा हैं। यह बात नीति आयोग के सर्वे आंकड़ों से साफ जाहिर हो गई है। वीरता, इतिहास और धर्म-अध्यात्म आदि से भरपूर बुंदेलखंड के गांव शहरों की अपेक्षा गांव ज्यादा गरीब हैं। शहर और गांवों के बीच गरीबी का फासला लगभग ढाई गुना है।
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गांवों में ढाई गुना ज्यादा निर्धनता है, शहरों की अपेक्षा। सातों जिलों में कोई भी ऐसा नहीं है जहां ग्रामीणों की आर्थिक हैसियत शहरों के मुकाबले बेहतर हो। बुंदेलखंड की अधिकांश गरीब आबादी गांवों में बसर कर रही है।
चित्रकूटधाम मंडल में गांव और शहरों में गरीबों का सबसे बड़ा अंतर हमीरपुर में है। यहां शहर में जहां 9 फीसदी गरीब हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में 36 फीसदी से ज्यादा गरीबी है। मंडल मुख्यालय बांदा जनपद में गरीबी का आंकड़ा शहर से गांवों में दोगुना है।
जिला ग्रामीण शहरी
बांदा 44.20 22.54
चित्रकूट 55.31 38.39
हमीरपुर 36.33 9.03
महोबा 40.99 16.74
जालौन 34.86 9.09
झांसी 29.26 8.53
ललितपुर 42.49 10.75
औसत 40.49 16.43
भरपूर खनिज संपदा, चिराग तले अंधेरा
बांदा। चिराग तले अंधेरा। बुंदेलखंड का कुछ यही हाल है। यहां की अकूत खनिज संपदा से देश की तमाम नामी-गिरामी कंपनियां और रसूख वाले लोग बालू और पहाड़ों का ठेका लेकर करोड़ों रुपये की पूंजी के मालिक हो गए। कंपनियों के अलावा व्यक्तिगत लोग भी खनिज संपदा से धनपति बन गए। इसके बावजूद आम बुंदेली यहां गरीब का दंश झेल रहा है। यहां की एक तिहाई से ज्यादा आबादी गरीबी और तंगहाली में जी रही है। इनकी तादाद लगभग सवा तीन लाख के आसपास है।
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हाल ही में नीति आयोग ने पूरे देश/प्रदेश की एमपीआई जारी की है। यह सर्वे लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर पर आधारित रहा। पोषण, बाल किशोर मृत्युदर, प्रसव पूर्व देखभाल, स्कूली शिक्षा, स्कूलों में उपस्थिति, घरेलू ईंधन, सफाई, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति और बैंकों में बैलेंस आदि सर्वे में शामिल रहा। रिपोर्ट के मुताबिक बुंदेलखंड की एक तिहाई (33.20 फीसदी) आबादी गरीब है। गरीबी की सबसे ज्यादा मार धर्म नगरी चित्रकूट झेल रही है।
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पदवार आंकड़े
जिला आबादी गरीबी प्रतिशत गरीब जनसंख्या
चित्रकूट 9,91,730 52.86 5,24,230
बांदा 17,99,410 40.29 7,24,986
महोबा 8,75,958 35.29 3,09,130
हमीरपुर 11,04,285 30.92 3,41,450
जालौन 16,89,974 27.67 4,67,620
झांसी 19,98,630 20.27 4,05,120
ललितपुर 12,21,592 35.98 4,39,530
योग/औसत 96,81,552 33.20 32,12,066
नोट- आबादी के आंकड़े जनगणना 2011 के हैं।
गांवों में 40 और शहर में 16 फीसदी बुंदेली गरीब
बांदा। कहावत है कि भारत गांव में बसता है, लेकिन मजे में शहरी ज्यादा हैं। यह बात नीति आयोग के सर्वे आंकड़ों से साफ जाहिर हो गई है। वीरता, इतिहास और धर्म-अध्यात्म आदि से भरपूर बुंदेलखंड के गांव शहरों की अपेक्षा गांव ज्यादा गरीब हैं। शहर और गांवों के बीच गरीबी का फासला लगभग ढाई गुना है।
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गांवों में ढाई गुना ज्यादा निर्धनता है, शहरों की अपेक्षा। सातों जिलों में कोई भी ऐसा नहीं है जहां ग्रामीणों की आर्थिक हैसियत शहरों के मुकाबले बेहतर हो। बुंदेलखंड की अधिकांश गरीब आबादी गांवों में बसर कर रही है।
चित्रकूटधाम मंडल में गांव और शहरों में गरीबों का सबसे बड़ा अंतर हमीरपुर में है। यहां शहर में जहां 9 फीसदी गरीब हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में 36 फीसदी से ज्यादा गरीबी है। मंडल मुख्यालय बांदा जनपद में गरीबी का आंकड़ा शहर से गांवों में दोगुना है।
जिला ग्रामीण शहरी
बांदा 44.20 22.54
चित्रकूट 55.31 38.39
हमीरपुर 36.33 9.03
महोबा 40.99 16.74
जालौन 34.86 9.09
झांसी 29.26 8.53
ललितपुर 42.49 10.75
औसत 40.49 16.43
भरपूर खनिज संपदा, चिराग तले अंधेरा
बांदा। चिराग तले अंधेरा। बुंदेलखंड का कुछ यही हाल है। यहां की अकूत खनिज संपदा से देश की तमाम नामी-गिरामी कंपनियां और रसूख वाले लोग बालू और पहाड़ों का ठेका लेकर करोड़ों रुपये की पूंजी के मालिक हो गए। कंपनियों के अलावा व्यक्तिगत लोग भी खनिज संपदा से धनपति बन गए। इसके बावजूद आम बुंदेली यहां गरीब का दंश झेल रहा है। यहां की एक तिहाई से ज्यादा आबादी गरीबी और तंगहाली में जी रही है। इनकी तादाद लगभग सवा तीन लाख के आसपास है।