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बांदा: काली खांसी से 11 दिन में तीन बच्चों की जान गई, त्रिवेणी गांव पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम

Thu, 25 Aug 2022 12:15 AM IST
कानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: कानपुर ब्यूरो Updated Thu, 25 Aug 2022 12:15 AM IST
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Banda: Three children died in 11 days due to whooping cough
बीमारी पर सीएमओ से रोष जताते पूर्व प्रधान राम बहादुर यादव व अन्य ग्रामीण। - फोटो : BANDA
बांदा जिले में बड़ोखर खुर्द तहसील के त्रिवेणी गांव में संक्रामक बीमारी काली खांसी (डिप्थीरिया) से 11 दिन में तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। तीसरे बच्चे की तीन दिन पहले हुई मौत के बाद बुधवार को सीएमओ डॉ. एके श्रीवास्तव के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और बीमार बच्चों की जांच की। जरूरतमंदों को दवाएं बांटी। 15 वर्ष तक के बच्चों व गर्भवतियों का टीकाकरण किया।
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सीएमओ ने बताया कि एक बच्चे की मौत के बाद लखनऊ से जांच रिपोर्ट आई है। लक्षणों के आधार पर माना जा रहा है कि सभी मौतें डिप्थीरिया की वजह से हुई हैं। शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है। डॉ. एसपी सिंह व डॉ. अर्चना भारती के नेतृत्व में स्वास्थ्य टीम ने 200 मरीजों का परीक्षण किया।
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मरीजों की सूची तैयार की गई है। डिप्थीरिया लक्षण वाले सात बच्चों का नमूना जांच के लिए भेजा गया है। 27 लोगों की मलेरिया की स्लाइड बनाई गई है। एएनएम शैलकुमारी, शकुंतला निषाद व अपर्णा यादव को टीकाकरण में लगाया गया है।
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पहली मौत- नौ अगस्त
मजदूरी करके गुजर बसर कर रहे दिलीप यादव के पुत्र अंशुल (4) को मौत से हफ्ते भर पहले बुखार आया था। उसके गले में दर्द था। पहले जिला अस्पताल ले जाकर दवा कराई। फिर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। आठ अगस्त को हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे रेफर कर दिया। नौ अगस्त को परिजन अंशुल को लेकर एक निजी अस्पताल आ गए। यहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर ने डिप्थीरिया से मौत बताई। इसकी लखनऊ से जांच रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी। दो भाइयों में अंशुल दूसरे नंबर का था।

दूसरी मौत- 15 अगस्त
बेलदारी करके परिवार पाल रहे बच्चा वर्मा के पुत्र उमंग (10) की बुखार से 12 अगस्त को हालत बिगड़ गई। उसे जिला अस्पताल और फिर मेडिकल कॉलेज में दिखाया। 14 अगस्त को डॉक्टर ने हालत गंभीर बताकर रेफर कर दिया। घरवाले उमंग को कानपुर ले गए। 15 अगस्त को हैलट में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। बड़े बेटे की मौत से मां रचना का बुरा हाल है। बच्चा के मुताबिक पुत्र के इलाज में लगभग 10 हजार रुपये खर्च हो गए।

तीसरी मौत- 20 अगस्त
तीसरी मौत अनिल विश्वकर्मा के पुत्र अंश (10) की 20 अगस्त को दोपहर में हुई। उसे बुखार के साथ गले में दिक्कत थी। कानपुर के मरियमपुर अस्पताल में उसने दम तोड़ा। उसके दो भाई प्रांशु (3) व हिमांशु (डेढ़ वर्ष) और चचेरी बहन अंशिका (6) भी बुखार से ग्रसित हैं। उनका इलाज चल रहा है। प्रांशु व चचेरी बहन अंशिका की लार का नमूना जांच के लिए लखनऊ लैब भेजा गया है। अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। पिता अनिल ने बताया कि आठ अगस्त को तबीयत बिगड़ी थी। जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज सहित कानपुर के कई प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन सुधार नहीं हुआ। उसके इलाज में लगभग एक लाख रुपये खर्च हो गए। उधार रकम लेकर इलाज कराया।

दो बच्चों का हैलट में चल रहा इलाज
गांव के ही करीम खां का बेटे मुस्तफा (10) और बेटी रवीना (8) की हालत भी गंभीर है। दोनों का इलाज हैलट में चल रहा है। उन्हें बुखार के साथ गले में दिक्कत है। सूजन से सांस लेने में परेशानी हो रही है। बड़ी मां शफीना ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम पहले गांव आकर जांच-पड़ताल कर लेती तो रोग नहीं फैलता। लापरवाही के चलते बच्चों की मौत हुई और कई बीमार हैं।


सीएमओ के सामने ग्रामीणों ने जताया रोष
सीएमओ डॉ. एके श्रीवास्तव, अपर सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल व एआरओ राधा शर्मा और डब्ल्यूएचओ की टीम गांव पहुंची। सीएमओ को पूर्व प्रधान राम बहादुर यादव सहित ग्रामीणों के रोष का सामना करना पड़ा। पूर्व प्रधान ने कहा कि गांव में समय पर स्वास्थ्य टीम नहीं आई। न ही यहां किसी का टीकाकरण हुआ। गांव में सफाई नहीं हुई। जगह-जगह जलभराव और गंदगी से मच्छरों का प्रकोप है। यही सक्रियता पहले दिखाई होती तो गांव में संक्रामक रोग नहीं फैल पाता। सीएमओ ने दवा छिड़काव का भरोसा दिलाया।
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