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बांदा :आलीशान मकानों में गुम हो गए तालाब, अफसरों की अनदेखी से तालाब के भीटे पर बने मकान, अतिक्रमण से सिकुड़ गए सैकड़ों तालाब, कई बने नाला
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बांदा। अफसरों की अनदेखी से जनपद मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में एक सौ से अधिक तालाबों का नामोनिशान मिट गया है। आलीशान मकानों में कई तालाब गुम हो गए हैं। कहीं-कहीं अतिक्रमण से सिकुड़ गए हैं। कुछ तालाब तो गंदा नाला बन कर रह गए हैं। मौजूदा समय में महज तीन हजार तालाब ही अस्तित्व में हैं। दो हजार से अधिक तालाब या तो धरातल में गुम हो गए हैं या फिर वह अतिक्रमण में सिमटकर वजूद बचाने में लगे हैं।
शहर में नवाब टैंक सहित दो दर्जन से अधिक छोटे बड़े प्राचीन तालाब थे। इनमें गायत्री नगर का परशुराम तालाब, केवटरा का केवटन तालाब, तिंदवारी रोड का बड़ा तालाब, मढ़िया नाका की भरमूजन तलइया, मर्दन नाका की लोहार तलइया, निम्नीपार का कजलिया तालाब आदि का नामोनिशान समाप्त हो गया है।
खप्टिहाकला : कागजों में तीन सौ तालाब
खप्टिहा संवाददाता के अनुसार, पैलानी तहसील के दस्तावेजों की माने तो यहां पर 300 तालाब हैं। लेकिन मौजूदा समय में 200 तालाब भी नहीं हैं। बचे तालाबों में खप्टिहा का मनुई तालाब, डबरा तालाब, पैलानी का पोथी तालाब, निवाइच का श्याम तलइया का अतिक्रमण के कारण आकार छोटा हो गया है।
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नरैनी में भीटे पर बन गए मकान
नरैनी। तहसील क्षेत्र में 1980 के दशक में दो हजार से अधिक छोटे बड़े तालाब थे। गांवों में पानी की आवश्यकता तालाब और कुओं से पूरी की जाती थी। मौजूदा समय में 200 से अधिक तालाब गुम हो गए हैं। इतने ही तालाबों में अतिक्रमण है। तालाब के भीटे पर कच्चे व पक्के मकान बन गए है।
तिंदवारी: 75 फीसदी तालाबों में अतिक्रमण
तिंदवारी। क्षेत्र के 56 ग्राम पंचायतों में 250 तालाब हैं। इनमें 75 फीसदी तालाबों में लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। महुई का महुई तालाब, मरघट तालाब, सिंघौली का मैकेसुर बाबा तालाब, पिपरगवां में इमिलिहा तालाब, तेरही माफी में देवी तालाब, सोन तालाब, बेंदा तालाब के भीटों पर अतिक्रमण है। (संवाद)
अमृत सरोवर तालाब योजना के तहत शहर सहित ग्राम पंचायतों में स्थित तालाबों को खोजा जा रहा है। जिनका जीर्णोद्धार कराया जाएगा। जिन तालाबों में अतिक्रमण है उन्हें हटाया जा रहा है। कुछ तालाबों का अतिक्रमण अदालती पेच में फंसा है।- वेद प्रकाश मौर्य, मुख्य विकास अधिकारी, बांदा
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शहर में नवाब टैंक सहित दो दर्जन से अधिक छोटे बड़े प्राचीन तालाब थे। इनमें गायत्री नगर का परशुराम तालाब, केवटरा का केवटन तालाब, तिंदवारी रोड का बड़ा तालाब, मढ़िया नाका की भरमूजन तलइया, मर्दन नाका की लोहार तलइया, निम्नीपार का कजलिया तालाब आदि का नामोनिशान समाप्त हो गया है।
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खप्टिहाकला : कागजों में तीन सौ तालाब
खप्टिहा संवाददाता के अनुसार, पैलानी तहसील के दस्तावेजों की माने तो यहां पर 300 तालाब हैं। लेकिन मौजूदा समय में 200 तालाब भी नहीं हैं। बचे तालाबों में खप्टिहा का मनुई तालाब, डबरा तालाब, पैलानी का पोथी तालाब, निवाइच का श्याम तलइया का अतिक्रमण के कारण आकार छोटा हो गया है।
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नरैनी में भीटे पर बन गए मकान
नरैनी। तहसील क्षेत्र में 1980 के दशक में दो हजार से अधिक छोटे बड़े तालाब थे। गांवों में पानी की आवश्यकता तालाब और कुओं से पूरी की जाती थी। मौजूदा समय में 200 से अधिक तालाब गुम हो गए हैं। इतने ही तालाबों में अतिक्रमण है। तालाब के भीटे पर कच्चे व पक्के मकान बन गए है।
तिंदवारी: 75 फीसदी तालाबों में अतिक्रमण
तिंदवारी। क्षेत्र के 56 ग्राम पंचायतों में 250 तालाब हैं। इनमें 75 फीसदी तालाबों में लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। महुई का महुई तालाब, मरघट तालाब, सिंघौली का मैकेसुर बाबा तालाब, पिपरगवां में इमिलिहा तालाब, तेरही माफी में देवी तालाब, सोन तालाब, बेंदा तालाब के भीटों पर अतिक्रमण है। (संवाद)
अमृत सरोवर तालाब योजना के तहत शहर सहित ग्राम पंचायतों में स्थित तालाबों को खोजा जा रहा है। जिनका जीर्णोद्धार कराया जाएगा। जिन तालाबों में अतिक्रमण है उन्हें हटाया जा रहा है। कुछ तालाबों का अतिक्रमण अदालती पेच में फंसा है।- वेद प्रकाश मौर्य, मुख्य विकास अधिकारी, बांदा