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नहीं थम रहा बुखार का प्रकोप, 24 घंटे में 15 नए मरीज भर्ती
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Banda: Outbreak of fever is not stopping, 15 new patients admitted in 24 hours
- फोटो : BANDA
बांदा। बुखार से पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है। 24 घंटे में 15 नए मरीज जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। जांच में ज्यादातर मरीजों के प्लेटलेट्स कम हैं। डॉक्टर वायरल फीवर मानकर इलाज कर रहे हैं।
जिला अस्पताल में बुखार पीड़ित गुरेह की लक्ष्मी (16) व चुन्नी (85), जमालपुर निवासी विजय (40), तिंवारी की सुनीता (40) को भर्ती कराया गया है। इसके अलावा चमरौडी के भारत प्रसाद (40), मवई के शिवपाल (60), रामलीला मैदान निवासी गजेंद्र (42), खाईंपार के वसीम (28), डीएम कॉलोनी की सुनीता (25), गोखिया के दादूराम (34), गूलरनाका के शीतला (62), छेहरांव के आर्यन (1), कबरई की शैरबानो (28), स्वराज कालोनी के अभि (6) और सिविल लाइन निवासी भोलेबाबा (42) भी अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। इन लोगों को घर पर दो तीन दिन से बुखार था। हालत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचे।
ऐसे बढ़ रहे मरीज
30 सितंबर- 17 मरीज
01 अक्तूबर- 6 मरीज
02 अक्तूबर- 15 मरीज
केस-1
गहबरा गांव निवासी राजेश श्रीवास ने बताया कि उसके आठ वर्षीय बेटे अंकित को कई दिन से बुखार आ रहा है। कालूकुआं स्थित प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। जांच रिपोर्ट में 77000 प्लेटलेट्स निकले हैं। डॉक्टर डेंगू का इलाज कर रहे हैं।
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केस-2
सिविल लाइन स्थित प्राइवेट अस्पताल में बुखार से भर्ती चिल्ला गांव निवासी नरेश वर्मा (41) को तीन दिन से बुखार है। निजी पैथोलॉजी में खून जांच में 600 रुपये खर्च हुए। 61,000 प्लेटलेट्स निकलीं। डॉक्टर वायरल के साथ डेंगू का इलाज कर रहे हैं। अब तक 10 हजार रुपये खर्च हो चुके।
निजी अस्पताल डेंगू के मरीजों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को नहीं दे रहे हैं। यही वजह है कि जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, लेकिन सरकारी आंकड़ों में मरीजों की संख्या दर्ज नहीं है। इसी वजह से डेंगू पीड़ित के इलाके में जांच और रोकथाम के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
शनिवार दोपहर को दरदा गांव की सुमतिया की जिला अस्पताल में डेंगू से हुई मौत भी सरकारी आंकड़ों में नहीं है। निजी पैथोलॉजी की जांच में सुमतिया में डेंगू की पुष्टि हुई थी। इसी तरह ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अंकित सिंह और मेडिकल कॉलेज कर्मी अपर्णा द्विवेदी और आदित्य कुमार डेंगू से पीड़ित मिले हैं। मगर सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं हैं।
5 से 10 फीसदी मरीजों में डेंगू के लक्षण
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मोहम्मद रफीक ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में पहुंच रहे मरीजों में पांच से 10 फीसदी तक डेंगू लक्षण वाले हैं। सीबीसी जांच में प्लेटलेट्स कम मिल रहे हैं। लगातार बुखार, शरीर में चकत्ते हो रहे हैं। पिछले पखवारे से ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है।
डेंगू की शुरुआत अभी हुई है। विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्ययोजना तैयार की जाएगी। सोमवार को निजी पैथोलॉजी और अस्पताल संचालकों को पत्र जारी करेंगे। उनसे हर दिन रिपोर्ट मांगी जाएगी। प्लेटलेट्स कम होने वाले मरीजों का अलग विवरण लिया जाएगा। नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. एके श्रीवास्तव, सीएमओ, बांदा।
हैरान करने वाली बात ये है कि मेडिकल कॉलेज कर्मी अपर्णा द्विवेदी और आदित्य कुमार डेंगू का इलाज निजी अस्पताल में करा रहे हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में डेंगू के इलाज की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। इस पर रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव का कहना है कि यह मरीजों का व्यक्तिगत निर्णय है। दावा किया कि मेडिकल कॉलेज में सारी सुविधाएं हैं। फिलहाल मेडिकल कॉलेज में कोई डेंगू मरीज भर्ती नहीं है।
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जिला अस्पताल में बुखार पीड़ित गुरेह की लक्ष्मी (16) व चुन्नी (85), जमालपुर निवासी विजय (40), तिंवारी की सुनीता (40) को भर्ती कराया गया है। इसके अलावा चमरौडी के भारत प्रसाद (40), मवई के शिवपाल (60), रामलीला मैदान निवासी गजेंद्र (42), खाईंपार के वसीम (28), डीएम कॉलोनी की सुनीता (25), गोखिया के दादूराम (34), गूलरनाका के शीतला (62), छेहरांव के आर्यन (1), कबरई की शैरबानो (28), स्वराज कालोनी के अभि (6) और सिविल लाइन निवासी भोलेबाबा (42) भी अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। इन लोगों को घर पर दो तीन दिन से बुखार था। हालत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचे।
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ऐसे बढ़ रहे मरीज
30 सितंबर- 17 मरीज
01 अक्तूबर- 6 मरीज
02 अक्तूबर- 15 मरीज
केस-1
गहबरा गांव निवासी राजेश श्रीवास ने बताया कि उसके आठ वर्षीय बेटे अंकित को कई दिन से बुखार आ रहा है। कालूकुआं स्थित प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। जांच रिपोर्ट में 77000 प्लेटलेट्स निकले हैं। डॉक्टर डेंगू का इलाज कर रहे हैं।
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केस-2
सिविल लाइन स्थित प्राइवेट अस्पताल में बुखार से भर्ती चिल्ला गांव निवासी नरेश वर्मा (41) को तीन दिन से बुखार है। निजी पैथोलॉजी में खून जांच में 600 रुपये खर्च हुए। 61,000 प्लेटलेट्स निकलीं। डॉक्टर वायरल के साथ डेंगू का इलाज कर रहे हैं। अब तक 10 हजार रुपये खर्च हो चुके।
निजी अस्पताल डेंगू के मरीजों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को नहीं दे रहे हैं। यही वजह है कि जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, लेकिन सरकारी आंकड़ों में मरीजों की संख्या दर्ज नहीं है। इसी वजह से डेंगू पीड़ित के इलाके में जांच और रोकथाम के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
शनिवार दोपहर को दरदा गांव की सुमतिया की जिला अस्पताल में डेंगू से हुई मौत भी सरकारी आंकड़ों में नहीं है। निजी पैथोलॉजी की जांच में सुमतिया में डेंगू की पुष्टि हुई थी। इसी तरह ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अंकित सिंह और मेडिकल कॉलेज कर्मी अपर्णा द्विवेदी और आदित्य कुमार डेंगू से पीड़ित मिले हैं। मगर सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं हैं।
5 से 10 फीसदी मरीजों में डेंगू के लक्षण
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मोहम्मद रफीक ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में पहुंच रहे मरीजों में पांच से 10 फीसदी तक डेंगू लक्षण वाले हैं। सीबीसी जांच में प्लेटलेट्स कम मिल रहे हैं। लगातार बुखार, शरीर में चकत्ते हो रहे हैं। पिछले पखवारे से ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है।
डेंगू की शुरुआत अभी हुई है। विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्ययोजना तैयार की जाएगी। सोमवार को निजी पैथोलॉजी और अस्पताल संचालकों को पत्र जारी करेंगे। उनसे हर दिन रिपोर्ट मांगी जाएगी। प्लेटलेट्स कम होने वाले मरीजों का अलग विवरण लिया जाएगा। नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. एके श्रीवास्तव, सीएमओ, बांदा।
हैरान करने वाली बात ये है कि मेडिकल कॉलेज कर्मी अपर्णा द्विवेदी और आदित्य कुमार डेंगू का इलाज निजी अस्पताल में करा रहे हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में डेंगू के इलाज की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। इस पर रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव का कहना है कि यह मरीजों का व्यक्तिगत निर्णय है। दावा किया कि मेडिकल कॉलेज में सारी सुविधाएं हैं। फिलहाल मेडिकल कॉलेज में कोई डेंगू मरीज भर्ती नहीं है।