{"_id":"631e273260a076151c6008dc","slug":"banda-dozens-of-villages-in-the-grip-of-infectious-diseases-12-thousand-people-have-been-investigated-banda-news-knp7176174138","type":"story","status":"publish","title_hn":"बांदा : संक्रामक रोगों की चपेट में दर्जनों गांव, 12 हजार लोगों की हो चुकी जांच...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बांदा : संक्रामक रोगों की चपेट में दर्जनों गांव, 12 हजार लोगों की हो चुकी जांच...
विज्ञापन
11बीएनडीपी 08- राहुल
- फोटो : BANDA
बांदा/खप्टिहा कलां। केन और यमुना नदी का जलस्तर चुका है, लेकिन 46 गांवों के ग्रामीणों की दुश्वारियां कम नहीं हो रहीं हैं। बाढ़ के बाद इन गांवों में दर्जनों लोग बीमार हैं। स्वास्थ्य टीमें 12 हजार से अधिक लोगों की जांच करके दवाइयां दे चुकी हैं। वहीं बाढ़ और सूखा राहत के सर्वे के लिए लेखपालों के नेतृत्व में 69 टीमें लगाई गयीं हैं। इन्हें एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट प्रशासन को देनी है।
नदियों के उफनाने से बड़ोखर, जसपुरा, तिंदवारी, कमासिन व बबेरू ब्लाक के चंदवारा, इछावर, बड़ा गांव ,मड़ौली कला, सबादा, पिपरोदर, महबरा, अदरी, बसधरी, गलौली, गडो़ला, लसडा़, खप्टिहा खुर्द, मवई घाट, बुधेडा़, नारायढ सहित 46 गांवों में पानी भर गया था।
इन गांवों में नदियों का पानी कम होने के बाद ग्रामीण बीमार हो रहे हैं। यहां के भुल्लारू निषाद, जगन्नाथ निषाद, सजीवन, जगतपाल, राम करन, टंडन सिंह, वीरेंद्र सिंह, चंदेल, करन सिंह, रानी निषाद, रामचरन सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि पानी घटने के बाद गांवों संक्रामक बीमारियां जैसे सर्दी, जुकाम, बुखार, सिर दर्द आदि से लोग ग्रसित हैं।
विज्ञापन
सीएमओ डा. एके श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक 12 हजार से अधिक मरीजों की जांच करके दवा दी जा चुकी है। वहीं महामारी विशेषज्ञ डा. प्रसून खरे ने बताया कि बाढ़ कम होने के बाद संक्रामक बीमारियों के खतरे को देखते हुए गांवों में क्लोरीन की टैबलेट बांटी जा रही है। अभी तक करीब 22 हजार टैबलेट का वितरण किया जा चुका है। इसके अलावा 14,842 ओआरएस के पैकेट भी दिए गए हैं।
छनिया डेरा के दयाराम निषाद और बुजुर्ग नरैना का कहना है कि वह अपने घरों को लौट आये हैं, लेकिन अब उन्हें कई दिनों से बुखार आ रहा है। अस्पताल की टीम ने दवा दी है, मगर उससे आराम नहीं हो रहा है। दोनों का कहना कि गांव के 20 से अधिक घरों में कोई न कोई सदस्य बीमार है। सेमरा डेरा के जीतू निषाद और होरी लाल का कहना है कि उनके बच्चे सर्दी और जुकाम से परेशान हैं। खप्टिहा खुर्द, मवई घाट सहित कई गांवों में बच्चों के साथ ही अन्य दर्जनों की संख्या में लोग बुखार व जुकाम से पीड़ित हैं।
पैलानी तहसीलदार रामचंद्र ने बताया कि तहसील में 24 लेखपाल हैं, जिसमें पांच चकबंदी के और कृषि विभाग के कर्मचारी भी इस कार्य में लगाए गए हैं। तहसील में केन नदी के किनारे 22 से 25 गांव हैं जो आंशिक रूप से प्रभावित है। जानकारी के अनुसार सूखा का प्रभाव से अच्छादित एरिया 100 एकड़ है। अभी इस कार्य में 5 से 6 दिन का समय और लग सकता है। वहीं बबेरू तहसील के 45 लेखपालों के साथ में टीमों को सर्वे के काम में लगाया गया है।
विज्ञापन
नदियों के उफनाने से बड़ोखर, जसपुरा, तिंदवारी, कमासिन व बबेरू ब्लाक के चंदवारा, इछावर, बड़ा गांव ,मड़ौली कला, सबादा, पिपरोदर, महबरा, अदरी, बसधरी, गलौली, गडो़ला, लसडा़, खप्टिहा खुर्द, मवई घाट, बुधेडा़, नारायढ सहित 46 गांवों में पानी भर गया था।
विज्ञापन
इन गांवों में नदियों का पानी कम होने के बाद ग्रामीण बीमार हो रहे हैं। यहां के भुल्लारू निषाद, जगन्नाथ निषाद, सजीवन, जगतपाल, राम करन, टंडन सिंह, वीरेंद्र सिंह, चंदेल, करन सिंह, रानी निषाद, रामचरन सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि पानी घटने के बाद गांवों संक्रामक बीमारियां जैसे सर्दी, जुकाम, बुखार, सिर दर्द आदि से लोग ग्रसित हैं।
विज्ञापन
सीएमओ डा. एके श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक 12 हजार से अधिक मरीजों की जांच करके दवा दी जा चुकी है। वहीं महामारी विशेषज्ञ डा. प्रसून खरे ने बताया कि बाढ़ कम होने के बाद संक्रामक बीमारियों के खतरे को देखते हुए गांवों में क्लोरीन की टैबलेट बांटी जा रही है। अभी तक करीब 22 हजार टैबलेट का वितरण किया जा चुका है। इसके अलावा 14,842 ओआरएस के पैकेट भी दिए गए हैं।
छनिया डेरा के दयाराम निषाद और बुजुर्ग नरैना का कहना है कि वह अपने घरों को लौट आये हैं, लेकिन अब उन्हें कई दिनों से बुखार आ रहा है। अस्पताल की टीम ने दवा दी है, मगर उससे आराम नहीं हो रहा है। दोनों का कहना कि गांव के 20 से अधिक घरों में कोई न कोई सदस्य बीमार है। सेमरा डेरा के जीतू निषाद और होरी लाल का कहना है कि उनके बच्चे सर्दी और जुकाम से परेशान हैं। खप्टिहा खुर्द, मवई घाट सहित कई गांवों में बच्चों के साथ ही अन्य दर्जनों की संख्या में लोग बुखार व जुकाम से पीड़ित हैं।
पैलानी तहसीलदार रामचंद्र ने बताया कि तहसील में 24 लेखपाल हैं, जिसमें पांच चकबंदी के और कृषि विभाग के कर्मचारी भी इस कार्य में लगाए गए हैं। तहसील में केन नदी के किनारे 22 से 25 गांव हैं जो आंशिक रूप से प्रभावित है। जानकारी के अनुसार सूखा का प्रभाव से अच्छादित एरिया 100 एकड़ है। अभी इस कार्य में 5 से 6 दिन का समय और लग सकता है। वहीं बबेरू तहसील के 45 लेखपालों के साथ में टीमों को सर्वे के काम में लगाया गया है।

11बीएनडीपी 09 शिव कुमार- फोटो : BANDA

11बीएनडीपी 10 बीमार दाई- फोटो : BANDA